Saranda Siege: नक्सलवाद का 'कब्रिस्तान' बना सारंडा, अब तक 16 नरमुंड ढेर, 1 करोड़ का अनल दा खत्म और अब मिसिर बेसरा की बारी
सारंडा के जंगलों में 'ऑपरेशन मेगाबुरु' के तहत 16 नक्सलियों के खात्मे और 1 करोड़ के इनामी अनल दा की मौत की पूरी ग्राउंड रिपोर्ट यहाँ दी गई है। 30 घंटे से जारी इस भीषण मुठभेड़ और मिसिर बेसरा की तलाश के रोमांचक घटनाक्रम को विस्तार से पढ़िए वरना आप भारतीय इतिहास के इस सबसे बड़े नक्सल विरोधी अभियान की हकीकत जानने से चूक जाएंगे।
चाईबासा/किरीबुरू, 23 जनवरी 2026 – झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम स्थित सारंडा जंगल में पिछले 30 घंटों से जारी 'ऑपरेशन मेगाबुरु' ने लाल आतंक की कमर तोड़ दी है। गुरुवार सुबह 6:30 बजे शुरू हुई इस ऐतिहासिक मुठभेड़ में अब तक 16 नक्सली मारे जा चुके हैं। ताजा जानकारी के अनुसार, शुक्रवार को सुरक्षा बलों ने एक और नक्सली को ढेर कर दिया है, जिसकी पुष्टि एसपी अमित रेनू ने की है। इस कार्रवाई की सबसे बड़ी उपलब्धि 1 करोड़ के इनामी शीर्ष माओवादी नेता पतिराम माझी उर्फ अनल दा का अंत है। कोबरा 209, झारखंड जगुआर और सीआरपीएफ के 1,500 जांबाज जवानों ने सारंडा को नक्सलियों के लिए अभेद्य किला मानने वालों का भ्रम तोड़ दिया है।
30 घंटे का महासंग्राम: 1,500 जवान और खौफनाक मुठभेड़
सारंडा के घने जंगलों में सुरक्षा बलों ने नक्सलियों को उस समय घेरा जब वे बड़ी साजिश रच रहे थे।
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अनल दा का अंत: अनल उर्फ पतिराम माझी, जिसने 2022 से अब तक दर्जनों विस्फोटों और हिंसात्मक घटनाओं को अंजाम दिया था, अपने दस्ते के साथ मारा गया।
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16 शव बरामद: अब तक 16 नक्सलियों के मृत शरीर बरामद हुए हैं, जिनमें से 13 की पहचान की जा चुकी है। 3 अन्य की शिनाख्त के लिए पुलिस प्रयास कर रही है।
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हथियारों का जखीरा: मुठभेड़ स्थल से भारी मात्रा में अत्याधुनिक हथियार, विस्फोटक और दैनिक उपयोग की सामग्री जब्त की गई है।
मिसिर बेसरा और आकाश: अब केवल 2 बड़े शिकार बाकी
इस बड़ी जीत के बावजूद ऑपरेशन अभी थमा नहीं है। सुरक्षा बलों का अगला टारगेट अब मिसिर बेसरा और आकाश हैं।
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एक-एक करोड़ के इनामी: ये दोनों नक्सली सरगना भी 1-1 करोड़ के इनामी हैं, जो फिलहाल 60-70 बचे हुए नक्सलियों के साथ जंगल के गहरे हिस्सों में छिपे हैं।
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बैकफुट पर माओवादी: अनल दा की मौत नक्सलियों के लिए पिछले 26 वर्षों का सबसे बड़ा आघात है। सारंडा, जो कभी उनका सुरक्षित गढ़ था, अब उनके लिए मौत का जाल बन चुका है।
ऑपरेशन मेगाबुरु: ग्राउंड जीरो की रिपोर्ट (Battle Snapshot)
| विवरण | सांख्यिकी/स्थिति (Current Status) |
| मारे गए कुल नक्सली | 16 (16 Bodies Recovered) |
| मुख्य सफलता | अनल उर्फ पतिराम माझी (1 करोड़ का इनामी) ढेर |
| शामिल बल | कोबरा 209, झारखंड जगुआर, सीआरपीएफ एवं जिला पुलिस |
| जवानों की संख्या | लगभग 1,500 (1.5K Troops) |
| अगला लक्ष्य | मिसिर बेसरा एवं आकाश (प्रत्येक 1 करोड़ इनामी) |
इतिहास का पन्ना: सारंडा का 26 साल पुराना 'अभेद' किला और उसका पतन
सारंडा का जंगल केवल भूगोल नहीं, बल्कि नक्सलवाद का 'ऐतिहासिक मुख्यालय' रहा है। 1990 के दशक के अंत में, जब एकीकृत बिहार था, तब से नक्सलियों ने इस 700 पहाड़ियों वाले क्षेत्र को अपनी राजधानी बना लिया था। इतिहास गवाह है कि सारंडा के भीतर पुलिस का घुसना कभी नामुमकिन माना जाता था। साल 2011 में तत्कालीन गृह मंत्री द्वारा 'सारंडा एक्शन प्लान' लाया गया, ताकि विकास से उग्रवाद को खत्म किया जा सके। लेकिन 2022 के बाद अनल दा के दस्ते ने आईईडी (IED) विस्फोटों के जरिए विकास की हर राह को रोक दिया था। 23 जनवरी 2026 का यह दिन इतिहास के पन्नों में स्वर्ण अक्षरों में लिखा जाएगा, क्योंकि आज उसी 'अभेद' किले में घुसकर सुरक्षा बलों ने उस नेतृत्व को खत्म कर दिया जिसने ढाई दशकों तक झारखंड की प्रगति को बंधक बना रखा था।
पुलिस की अपील: "हथियार छोड़ें या मारे जाएं"
झारखंड पुलिस ने मुठभेड़ के बाद बचे हुए नक्सलियों को एक अंतिम चेतावनी और मौका दिया है।
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आत्मसमर्पण नीति: आईजी ने अपील की है कि शेष बचे उग्रवादी मुख्यधारा में लौट आएं और सरकार की पुनर्वास नीति का लाभ उठाएं।
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हौसले बुलंद: एसपी अमित रेनू ने स्पष्ट किया है कि जब तक सारंडा का आखिरी नक्सली खत्म नहीं हो जाता, सर्च ऑपरेशन जारी रहेगा।
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शांति का सवेरा: इस बड़ी कार्रवाई के बाद सारंडा और कोल्हान क्षेत्र के ग्रामीणों में भय का माहौल खत्म होने की उम्मीद जगी है।
सारंडा से लाल आतंक की विदाई
ऑपरेशन मेगाबुरु केवल एक मुठभेड़ नहीं, बल्कि नक्सलवाद के खिलाफ निर्णायक युद्ध का बिगुल है। अनल दा जैसे खूंखार अपराधी का खात्मा यह साबित करता है कि अब सारंडा में नक्सलियों के दिन गिनती के बचे हैं।
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