Saraikela Prisoner: सरायकेला जेल के कैदी की इलाज के दौरान मौत, बाइक चोरी में गया था जेल
सरायकेला कारागार में बंद कैदी मनसा महतो की रांची के बड़े अस्पताल में मौत हो गई है। पीलिया रोग से ग्रसित होने के बाद जेल प्रशासन ने उन्हें विभिन्न अस्पतालों में भर्ती कराया था। बाइक चोरी के आरोप में जेल जाने के एक महीने के भीतर ही कैदी ने दम तोड़ दिया।
सरायकेला, 17 दिसंबर 2025 – सरायकेला-खरसावां जिले की न्यायिक हिरासत में बंद एक विचाराधीन कैदी की बुधवार तड़के राजधानी रांची के आयुर्विज्ञान संस्थान में मृत्यु हो गई। कैदी पिछले कुछ दिनों से गंभीर बीमारी से जूझ रहा था और उसे बेहतर उपचार के लिए एक शहर से दूसरे शहर के अस्पतालों में स्थानांतरित किया जा रहा थ। मृतक की पहचान नावाडीह गांव निवासी मनसा महतो के रूप में हुई है। जेल के भीतर हुई इस मौत ने एक बार फिर जेल प्रशासन की स्वास्थ्य व्यवस्थाओं पर चर्चा छेड़ दी है।
हिरासत से अस्पताल तक का सफर
मनसा महतो को राजनगर पुलिस ने बीते सोलह ($16$) नवंबर को दुपहिया वाहन चोरी के संदेह में पकड़ा था। न्यायालय के आदेश पर उसे सरायकेला मंडल कारा भेज दिया गया था। किन्तु कारागार की चारदीवारी के भीतर जाते ही उसकी शारीरिक स्थिति बिगड़ने लगी। चिकित्सकीय परीक्षण में पाया गया कि वह पीलिया (जॉन्डिस) जैसे घातक रोग की चपेट में है।
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बिगड़ती हालत: एक सप्ताह पूर्व जब स्थानीय जेल अस्पताल में उसकी स्थिति में सुधार नहीं हुआ, तो उसे सरायकेला सदर अस्पताल में भर्ती कराया गया। जटिलता बढ़ने पर उसे जमशेदपुर के महात्मा गांधी चिकित्सा महाविद्यालय भेजा गया। अंततः, जब प्राणों पर संकट आ गया, तो उसे रांची के रिम्स अस्पताल ले जाया गया, जहाँ बुधवार की सुबह उसने अंतिम सांस ली।
सरायकेला जेल और मानवीय अधिकारों का इतिहास
झारखंड के सरायकेला जेल का इतिहास अत्यंत पुराना है। रियासत काल के दौरान बनी यह इमारत अब आधुनिक सुविधाओं की कमी से जूझ रही है। अतीत में भी हिरासत में बीमारी के कारण होने वाली मौतों पर मानवाधिकार आयोग चिंता जता चुका है। कैदियों को समय पर चिकित्सा न मिलना अक्सर विवादों का कारण बनता है। मनसा महतो की मौत ने भी यह प्रश्न खड़ा किया है कि क्या समय रहते उसे बड़े अस्पताल में भर्ती नहीं कराया जा सकता था?
परिजनों में शोक और प्रशासनिक प्रक्रिया
कैदी की मौत की सूचना मिलते ही नावाडीह गांव में मातम पसर गया है। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। नियम के अनुसार, न्यायिक हिरासत में हुई मौत की जांच एक मजिस्ट्रेट द्वारा की जाती है। रांची में शव का परीक्षण किए जाने के बाद उसे अंतिम संस्कार के लिए परिवार को सौंपा जाएगा।
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सुरक्षा व्यवस्था: जेल प्रशासन ने कहा है कि उन्होंने खिलाड़ी की तरह पूरी कोशिश की कि उसे बचाया जा सके और लगातार उच्च चिकित्सा उपलब्ध कराई गई। किन्तु संक्रमण उसके यकृत (लीवर) तक फैल चुका था, जिसके कारण अंगों ने काम करना बंद कर दिया।
इस घटना ने एक बार फिर जेल में साफ-सफाई और कैदियों के लिए पीने के स्वच्छ पानी की उपलब्धता पर सवालिया निशान लगा दिया है, क्योंकि पीलिया अक्सर दूषित जल से होने वाला रोग है।
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