Ringroad Scam: महाधमाका, रिंग रोड घोटाले में 17 सफेदपोश गिरफ्तार, 150 करोड़ की लूट और अफसरों की काली करतूत उजागर
झारखंड के बहुचर्चित 237 करोड़ के रिंग रोड मुआवजा घोटाले में एसीबी ने धनबाद से रांची तक सर्जिकल स्ट्राइक कर तत्कालीन डीएलओ और सीओ समेत 17 आरोपियों को दबोच लिया है। बैक डेट में साइन और फर्जी दस्तावेजों के जरिए करोड़ों डकारने वाले इन अफसरों के काले साम्राज्य की पूरी रोंगटे खड़े कर देने वाली रिपोर्ट यहाँ दी गई है वरना आप भी इस बड़े सच से बेखबर रह जाएंगे।
धनबाद/रांची, 9 जनवरी 2026 – भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाते हुए भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) ने झारखंड के प्रशासनिक गलियारों में अब तक का सबसे बड़ा विस्फोट किया है। राज्य के बहुचर्चित 'रिंग रोड मुआवजा घोटाले' की कलई खोलते हुए एसीबी की 10 विशेष टीमों ने एक साथ पांच जिलों—धनबाद, रांची, दुमका, गिरिडीह और देवघर में छापेमारी कर 17 रसूखदार आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। इस कार्रवाई ने उन सफेदपोशों के चेहरों से नकाब उतार दिया है जिन्होंने जनता के विकास के लिए आए करोड़ों रुपयों को अपनी तिजोरी में भर लिया था।
150 करोड़ की 'महा लूट': अफसरों और बिचौलियों का नेक्सस
यह घोटाला धनबाद के धनसार, दुहाटांड, मनईटांड और घोघरा मौजा की जमीनों के अधिग्रहण से जुड़ा है।
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घोटाले का पैमाना: रिंग रोड निर्माण के लिए अधिग्रहित जमीन के बदले करीब 237 करोड़ रुपये का मुआवजा दिया जाना था।
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बंदरबाँट: एसीबी की जांच में सामने आया है कि इस राशि में से करीब 100 से 150 करोड़ रुपये अधिकारियों और बिचौलियों ने फर्जीवाड़े के जरिए आपस में बांट लिए।
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एक ही नाम, 6 करोड़: सबसे चौंकाने वाला खुलासा यह है कि एक ही व्यक्ति ने फर्जी दस्तावेजों के सहारे अकेले 6 करोड़ रुपये डकार लिए।
गिरफ्तार 'सफेदपोश': कलम की ताकत का खौफनाक दुरुपयोग
एसीबी ने उन अधिकारियों को सलाखों के पीछे भेजा है, जिनके हस्ताक्षरों पर जनता का भरोसा था।
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उदयकांत पाठक: तत्कालीन बर्खास्त जिला भूमि अर्जन पदाधिकारी (DLO)।
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विशाल कुमार: तत्कालीन अंचल अधिकारी (CO)।
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नीलम सिन्हा: तत्कालीन सर्किल इंस्पेक्टर (CI)।
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कुमारी रत्नाकर: अंचल कार्यालय कर्मी।
इसके अलावा भू-अर्जन विभाग और अंचल कार्यालय के कई अन्य कर्मचारियों को भी हिरासत में लिया गया है।
रिंग रोड घोटाला: एसीबी की बड़ी कार्रवाई (Action Snapshot)
| विवरण | जानकारी (Details) |
| कुल गिरफ्तारियां | 17 आरोपी (अफसर और बिचौलिए) |
| घोटाले की राशि | ₹237 करोड़ (करीब ₹150 करोड़ का गबन) |
| प्रमुख जिले | धनबाद, रांची, दुमका, गिरिडीह, देवघर |
| फर्जीवाड़ा का तरीका | बैक डेट हस्ताक्षर और सरकारी दस्तावेज हेराफेरी |
| मुख्य शिकायतकर्ता | समाजसेवी रमेश राही (लड़ाई 2013 से जारी) |
बैक डेट सिग्नेचर और गायब फाइलें: ऐसे हुआ फर्जीवाड़ा
एसीबी की जांच में यह खौफनाक सच सामने आया है कि सरकारी फाइलों के साथ किस कदर छेड़छाड़ की गई।
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पिछली तारीखों का खेल: अधिकारियों ने मिलीभगत कर बैक डेट (पिछली तारीखों) में दस्तावेजों पर हस्ताक्षर किए ताकि मुआवजे की राशि को वैध दिखाया जा सके।
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समन्वय की कमी का फायदा: निबंधन कार्यालय और जिला प्रशासन के बीच तालमेल न होने का फायदा उठाकर फर्जी रैयत (भूमिधारक) खड़े किए गए।
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संपत्ति जब्ती की मांग: रमेश राही ने सरकार से मांग की है कि इन घोटालेबाजों की चल-अचल संपत्ति तत्काल जब्त कर असली भूमिधारकों को उनका हक वापस दिलाया जाए।
अभी तो सिर्फ शुरुआत है!
एसीबी सूत्रों का मानना है कि 17 गिरफ्तारियां केवल 'आइसबर्ग की टिप' हैं। जब्त किए गए डिजिटल साक्ष्यों और फाइलों की छानबीन से संकेत मिल रहे हैं कि इस घोटाले के तार सचिवालय और बड़े राजनेताओं तक जुड़े हो सकते हैं। आने वाले दिनों में कुछ और बड़े चेहरों का बेनकाब होना तय है।
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