Ranchi Kavi Sammelan: वसंत की बहार में प्रेम और भक्ति का संगम, गूंजे शानदार काव्य-पाठ
रांची में "सृजन संसार" की वासंती काव्य-गोष्ठी में बही प्रेम, भक्ति और हास्य की रसधार। वरिष्ठ कवियों और शायरों ने अपनी रचनाओं से मन मोहा। पढ़ें पूरी खबर।

रांची: हरमू स्थित विद्यापति दलान में जब कवियों और शायरों की महफिल सजी, तो वसंत ऋतु के रंग और साहित्यिक उल्लास ने सबको मंत्रमुग्ध कर दिया। रांची की प्रमुख साहित्यिक संस्था "सृजन संसार" द्वारा आयोजित वासंती काव्य-गोष्ठी में प्रेम, भक्ति और हास्य रस की धाराएं एक साथ बही। इस दौरान नामचीन कवियों और शायरों ने अपनी बेहतरीन रचनाओं से समां बांध दिया।
कार्यक्रम का शुभारंभ बाबा विद्यापति के आशीर्वाद के साथ हुआ, जहां डॉ. रजनी शर्मा 'चंदा' ने सरस्वती वंदना प्रस्तुत की। कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रसिद्ध शायर नेहाल हुसैन 'सरैयावी' ने की, जबकि मंच संचालन की जिम्मेदारी भी डॉ. रजनी शर्मा 'चंदा' ने संभाली।
काव्य की रंगीन शाम: जब प्रेम और भक्ति का संगम हुआ
इस अनूठी काव्य-गोष्ठी की शुरुआत सदानंद सिंह यादव के भावनात्मक गीत "इस पतझड़ जैसे जीवन में तुम फागुन बनकर आ जाओ" से हुई, जिसने श्रोताओं को वसंत की खूबसूरती और प्रेम की अनिवार्यता का एहसास कराया। वहीं, समापन भी रजनी शर्मा की प्रभावशाली कविता "जीवन महाकुंभ है" से हुआ, जिसने दर्शकों को गहरे चिंतन में डाल दिया।
इस दौरान प्रसिद्ध पत्रिका "सत्य की मशाल" के फरवरी अंक का लोकार्पण भी झारखंड ब्यूरो प्रमुख संगीता यादव और मंच के अन्य सदस्यों द्वारा किया गया, जिससे यह आयोजन और भी यादगार बन गया।
जब प्रेम और होली के रंग मिले साहित्य में
गोष्ठी में संगीता यादव ने अपनी कविता में वर्तमान सामाजिक परिवेश में बसंत के आगमन को लेकर विचार प्रकट किए, वहीं इटकी के शायर जिशान अल्तमस ने इश्क की गज़लों से रोमांटिक माहौल बना दिया।
प्रसिद्ध कवयित्री संगीता सहाय अनुभूति ने अपनी क्षणिकाओं में स्त्री के त्याग और प्रेम की गहराई को उकेरा, जिससे हर कोई भावुक हो उठा।
हास्य रस की बात करें तो नरेश बंका ने अपनी हास्य फुलझड़ियों से ऐसा रंग जमाया कि पूरा सभागार ठहाकों से गूंज उठा।
समाज, साहित्य और संवेदनाओं का अनूठा मिश्रण
मंच के संरक्षक और वरिष्ठ पत्रकार सुनील सिंह बादल ने समाज में बदलते मूल्यों और कुंभ स्नान की होड़ पर कटाक्ष करते हुए प्रतिनिधि चरित्र 'मंगरु' की व्यथा सुनाई, जिससे श्रोता सोचने पर मजबूर हो गए।
वहीं, प्रसिद्ध शायर नेहाल हुसैन 'सरैयावी' की ग़ज़लों ने गोष्ठी को ऊंचाई दी, तो दूसरी ओर सुकुमार नाथ झा की कविता "आया होली रंग बिरंगा" ने माहौल को पूरी तरह होलियाना कर दिया।
कार्यक्रम के अंत में अरुण कुमार झा ने सभी का धन्यवाद ज्ञापन किया। कार्यक्रम में डॉ. मीरा सोनी, गिरजा कोमल, डॉ. निराला पाठक और सुभाष सहाय जैसी प्रतिष्ठित हस्तियां भी उपस्थित रहीं।
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