Cyber Raid : रांची में 20 लाख की साइबर डकैती का खुलासा, गूगल पर फर्जी नंबर डाल उड़ाए पैसे, सीआईडी ने हजारीबाग से दबोचा

रांची सीआईडी ने गूगल सर्च इंजन पर फर्जी कस्टमर केयर नंबर के जरिए 19.85 लाख रुपये की ठगी करने वाले गिरोह का भंडाफोड़ किया है। गेल इंडिया के नाम पर झांसा देकर बैंक खाता साफ करने वाले हजारीबाग के तीन शातिर अपराधी अब पुलिस की गिरफ्त में हैं। इस डिजिटल लूट और सीआईडी की कार्रवाई की पूरी रिपोर्ट यहाँ देखें।

Mar 20, 2026 - 18:25
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Cyber Raid : रांची में 20 लाख की साइबर डकैती का खुलासा, गूगल पर फर्जी नंबर डाल उड़ाए पैसे, सीआईडी ने हजारीबाग से दबोचा
Cyber Raid : रांची में 20 लाख की साइबर डकैती का खुलासा, गूगल पर फर्जी नंबर डाल उड़ाए पैसे, सीआईडी ने हजारीबाग से दबोचा

रांची/झारखंड, 20 मार्च 2026 – झारखंड की राजधानी रांची में साइबर अपराधियों ने ठगी का एक ऐसा जाल बुना, जिसने सुरक्षा एजेंसियों के भी कान खड़े कर दिए हैं। सीआईडी (CID) झारखंड ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए उस गिरोह को दबोच लिया है, जिसने गूगल सर्च इंजन का सहारा लेकर एक व्यक्ति की गाढ़ी कमाई के 19.85 लाख रुपये पलक झपकते ही उड़ा लिए थे। ठगी का यह तरीका इतना शातिर था कि आम आदमी इसे पहचान ही नहीं पाया। सीआईडी की डीएसपी नेहा बाला के नेतृत्व में चली इस मुहिम ने हजारीबाग में छिपे तीन मास्टरमाइंड्स को बेनकाब कर दिया है।

गूगल सर्च बना 'हथियार': ऐसे हुई 20 लाख की ठगी

साइबर अपराधियों ने इस वारदात को बेहद सुनियोजित तरीके से अंजाम दिया था। ठगी की स्क्रिप्ट कुछ इस तरह तैयार की गई थी:

  • फर्जी कस्टमर केयर: अपराधियों ने गेल इंडिया (GAIL India) के नाम पर गूगल पर अपना फर्जी मोबाइल नंबर डाल रखा था।

  • गैस कनेक्शन का झांसा: जब पीड़ित ने गैस कनेक्शन के लिए नंबर सर्च किया, तो वह सीधे ठगों के संपर्क में आ गया।

  • व्हाट्सएप लिंक का जाल: बातचीत के दौरान ठगों ने पीड़ित को भरोसा दिलाया और औपचारिकता के नाम पर व्हाट्सएप पर एक 'फर्जी लिंक' भेजा।

  • क्लिक और डकैती: जैसे ही पीड़ित ने उस लिंक पर क्लिक किया, उनके बैंक खाते का एक्सेस ठगों के पास पहुँच गया और देखते ही देखते 19,85,073 रुपये अवैध रूप से ट्रांसफर कर लिए गए।

सीआईडी का एक्शन: हजारीबाग में छापेमारी और गिरफ्तारी

पीड़ित ने 3 नवंबर 2025 को साइबर क्राइम थाना, रांची में अपनी शिकायत दर्ज कराई थी। महीनों तक डिजिटल फुटप्रिंट्स का पीछा करने के बाद पुलिस आरोपियों तक पहुँचने में सफल रही।

  1. गिरफ्तार अपराधी: पकड़े गए ठगों की पहचान रवि कुमार साव, सूरज कुमार ठाकुर और सागर कुमार यादव के रूप में हुई है। ये तीनों ही झारखंड के हजारीबाग जिले के रहने वाले हैं।

  2. हजारीबाग कनेक्शन: सीआईडी की टीम ने हजारीबाग पुलिस के साथ मिलकर संयुक्त छापेमारी की और तीनों को उनके ठिकाने से उठा लिया।

  3. बरामदगी: पुलिस ने इनके पास से कई फर्जी सिम कार्ड, महंगे मोबाइल फोन और आपत्तिजनक डिजिटल साक्ष्य बरामद किए हैं, जो इस बड़े सिंडिकेट की पोल खोलते हैं।

सावधान: गूगल पर नंबर सर्च करना पड़ सकता है भारी

यह मामला झारखंड में बढ़ते साइबर अपराध के एक नए ट्रेंड 'सर्च इंजन मैनिपुलेशन' को दर्शाता है।

  • भरोसे का कत्ल: लोग आमतौर पर किसी भी कंपनी का नंबर गूगल पर ढूंढते हैं और उसे 'वेरिफाइड' मान लेते हैं। ठग इसी भरोसे का फायदा उठाकर वहां अपने नंबर प्लांट कर देते हैं।

  • लिंक पर क्लिक मतलब खतरा: डीएसपी नेहा बाला ने नागरिकों से अपील की है कि किसी भी अज्ञात व्यक्ति द्वारा भेजे गए लिंक पर क्लिक न करें, चाहे वह कितना भी आधिकारिक क्यों न लगे।

  • साइबर थाना अलर्ट: रांची साइबर क्राइम थाना अब इन अपराधियों के बैंक खातों की जांच कर रहा है ताकि यह पता चल सके कि इन्होंने अब तक और कितने लोगों को अपना शिकार बनाया है।

अगला कदम: रिमांड और पूछताछ

सीआईडी अब इन तीनों आरोपियों को रिमांड पर लेकर पूछताछ करने की तैयारी में है। पुलिस को अंदेशा है कि इस गिरोह के तार जामताड़ा या अन्य साइबर हब से जुड़े हो सकते हैं।

  • नेटवर्क का विस्तार: यह गिरोह केवल रांची ही नहीं, बल्कि पड़ोसी राज्यों में भी सक्रिय था।

  • डिजिटल फोरेंसिक: बरामद मोबाइल फोनों को फोरेंसिक लैब भेजा गया है ताकि इनके डिलीट किए गए डेटा और पुराने ट्रांजेक्शन का पता लगाया जा सके।

रांची में हुई यह 19.85 लाख की ठगी एक चेतावनी है कि डिजिटल दुनिया में आपका एक गलत 'क्लिक' आपको सड़क पर ला सकता है। सीआईडी की इस कामयाबी ने हजारीबाग के ठगों को सलाखों के पीछे पहुँचा दिया है, लेकिन खतरा अभी टला नहीं है। क्या आप भी किसी कंपनी का नंबर गूगल पर सर्च करते हैं? अगर हाँ, तो अगली बार कॉल करने से पहले उस नंबर की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर पुष्टि जरूर कर लें।

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Manish Tamsoy मनीष तामसोय कॉमर्स में मास्टर डिग्री कर रहे हैं और खेलों के प्रति गहरी रुचि रखते हैं। क्रिकेट, फुटबॉल और शतरंज जैसे खेलों में उनकी गहरी समझ और विश्लेषणात्मक क्षमता उन्हें एक कुशल खेल विश्लेषक बनाती है। इसके अलावा, मनीष वीडियो एडिटिंग में भी एक्सपर्ट हैं। उनका क्रिएटिव अप्रोच और टेक्निकल नॉलेज उन्हें खेल विश्लेषण से जुड़े वीडियो कंटेंट को आकर्षक और प्रभावी बनाने में मदद करता है। खेलों की दुनिया में हो रहे नए बदलावों और रोमांचक मुकाबलों पर उनकी गहरी पकड़ उन्हें एक बेहतरीन कंटेंट क्रिएटर और पत्रकार के रूप में स्थापित करती है।