Ranchi Attack: बैटरी चोरी करने पहुंचे चोरों पर फूटा गांववालों का गुस्सा, जला दी बाइक और पिकअप!
रांची के पतरातू गांव में बीएसएनएल टावर से बैटरी चोरी करने आए चोरों को ग्रामीणों ने रंगे हाथ पकड़ा। चोर भाग निकले लेकिन गांववालों ने उनकी बाइक और पिकअप को आग के हवाले कर दिया। जानिए कैसे गांववालों ने दिखाई हिम्मत।
रांची जिले के बुढ़मू थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले पतरातू गांव में मंगलवार की देर रात एक हैरान कर देने वाला घटनाक्रम सामने आया। बीएसएनएल के मोबाइल टावर से बैटरी चोरी करने आए छह बदमाशों को गांववालों ने रंगे हाथ पकड़ लिया। हालांकि, चोर मौके से भाग निकले लेकिन उनकी मोटरसाइकिलें और पिकअप वैन ग्रामीणों के गुस्से का शिकार हो गईं।
यह घटना सिर्फ एक चोरी की कोशिश नहीं थी, बल्कि यह गांव की एकता, सजगता और तात्कालिक न्याय की मिसाल बन गई।
घटना की शुरुआत: महुआ चुनते वक्त मिला सुराग
मंगलवार, 8 अप्रैल की रात लगभग 2 बजे कुछ ग्रामीण महुआ चुनने के लिए घरों से निकले थे। तभी उनकी नजर बीएसएनएल टावर के पास खड़ी एक संदिग्ध पिकअप और दो मोटरसाइकिलों पर पड़ी। जब उन्होंने गौर किया तो देखा कि 6 लोग टावर से बैटरी निकालने में लगे हुए हैं।
उनकी चुप्पी ज्यादा देर नहीं रही। जैसे ही उन्होंने शोर मचाया, पूरा गांव जाग उठा। कुछ ही मिनटों में 200 से अधिक ग्रामीण वहां पहुंच गए।
चोरों की भागदौड़ और जलती गाड़ियां
गांववालों को देख चोर घबरा गए और अपनी गाड़ियां वहीं छोड़कर अंधेरे में भाग निकले। लेकिन ग्रामीणों का गुस्सा सातवें आसमान पर था। उन्होंने दो मोटरसाइकिल और एक मालवाहक पिकअप को आग के हवाले कर दिया।
जलती गाड़ियों से उठती लपटें और धुआं इस बात की गवाही दे रहे थे कि गांव अब चुप नहीं बैठते।
पुलिस पहुंची, जांच शुरू
घटना की सूचना मिलते ही ठाकुरगांव थाना प्रभारी विनीत कुमार पुलिस टीम के साथ मौके पर पहुंचे। प्रारंभिक जांच में पता चला कि जली हुई पिकअप डोरंडा थाना क्षेत्र से है और मोटरसाइकिलें रामगढ़ जिले की हैं।
इससे यह आशंका जताई जा रही है कि चोरी की यह वारदात अंतर-जिला गिरोह का हिस्सा हो सकती है।
अब तक गिरफ्तारी नहीं, लेकिन गांव में सतर्कता बढ़ी
खबर लिखे जाने तक किसी भी चोर की गिरफ्तारी नहीं हुई है, लेकिन पुलिस कई सुरागों पर काम कर रही है। उधर, गांव के लोग अब और सतर्क हो गए हैं और रात को निगरानी बढ़ा दी गई है।
इतिहास से सबक: जब गांव खुद करता था 'न्याय'
भारतीय गांवों में 'जन न्याय' की परंपरा पुरानी रही है। राजा-महाराजाओं के समय में जब कोई अपराध होता था तो पंचायत में तुरंत फैसले लिए जाते थे। पतरातू की घटना उसी परंपरा की एक आधुनिक झलक है, जहां कानून के पहुंचने से पहले ग्रामीणों ने बदमाशों को सबक सिखा दिया।
क्या यह कानून हाथ में लेना था या आत्मरक्षा?
यह एक बड़ा सवाल है। गांववालों ने जो किया वो शायद भावनात्मक और सुरक्षा की दृष्टि से उचित लगा हो, लेकिन कानून को हाथ में लेना भारतीय संविधान के मुताबिक अपराध की श्रेणी में आता है।
फिर भी, इस घटना ने यह जरूर साबित कर दिया कि ग्रामीण अब चुप नहीं हैं, और अपने संसाधनों व संपत्ति की रक्षा के लिए किसी भी हद तक जा सकते हैं।
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