Potka Inspection Alert: 10 करोड़ के अस्पताल में मिली खामियां, विधायक ने ठेकेदार को दी सख्त चेतावनी!
पोटका में 10 करोड़ की लागत से बन रहे सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र का विधायक संजीव सरदार ने औचक निरीक्षण किया। निर्माण कार्य में खामियां मिलने पर ठेकेदार को फटकार लगाई गई। जानिए पूरी रिपोर्ट।
झारखंड के पोटका में स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर एक बड़ी पहल करते हुए विधायक संजीव सरदार ने शनिवार को वहां निर्माणाधीन सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) का औचक निरीक्षण किया। यह वही भवन है, जिसकी लगभग 10 करोड़ रुपये की लागत से राज्य सरकार द्वारा निर्माण कराया जा रहा है। इस केंद्र में 30 बेड की सुविधा होगी।
लेकिन जब विधायक ने भवन का जायजा लिया, तो सामने आई कुछ ऐसी खामियां जिन्हें नजरअंदाज नहीं किया जा सकता था। और यहीं से शुरू हुआ सवालों और चेतावनियों का सिलसिला।
विधायक ने क्यों किया औचक निरीक्षण?
पोटका विधानसभा क्षेत्र के लिए यह स्वास्थ्य केंद्र बहुप्रतीक्षित परियोजना रही है। स्थानीय लोग लंबे समय से एक पूर्ण विकसित अस्पताल की मांग कर रहे थे क्योंकि पहले का अस्पताल जर्जर हालात में था। बारिश में छत टपकती थी, मरीजों के लिए बेड की संख्या कम थी और बिजली-पानी जैसी बुनियादी सुविधाएं तक नहीं थीं।
विधायक संजीव सरदार की सिफारिश पर ही इस नए भवन को मंजूरी मिली थी। ऐसे में उन्होंने खुद यह तय किया कि काम की गुणवत्ता और प्रगति की हकीकत परखने के लिए मौके पर पहुंचा जाए।
कहां-कहां मिली खामियां?
निरीक्षण के दौरान विधायक ने ऑपरेशन थियेटर, लेबर रूम, महिला-पुरुष वार्ड, डॉक्टर और ANM क्वार्टर, स्ट्रीट लाइट, शवगृह समेत हर पहलू को बारीकी से देखा।
लेकिन निरीक्षण करते ही खुल गईं निर्माण की परतें — कुछ कमरों में प्लास्टर अधूरा, कहीं इलेक्ट्रिकल फिटिंग अधूरी, तो कहीं पानी की निकासी व्यवस्था लचर। यह सब देख विधायक ने मौके पर मौजूद संवेदक (ठेकेदार) को सख्त लहजे में फटकार लगाई और एक महीने के अंदर सभी खामियों को दुरुस्त कर कार्य पूर्ण करने का निर्देश दिया।
इतिहास से सीख: क्यों जरूरी था नया अस्पताल?
पोटका का पुराना अस्पताल लगभग दो दशक पुराना था। कई बार स्थानीय जनता ने इसके जीर्णोद्धार की मांग की थी लेकिन हर बार फाइलें धूल फांकती रहीं। हाल के वर्षों में जब ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर सरकार की प्राथमिकता बदली, तभी पोटका को यह अवसर मिला।
विधायक संजीव सरदार ने स्वास्थ्य मंत्री और विभाग के अधिकारियों से लगातार संपर्क में रहते हुए इस परियोजना को मूर्त रूप दिलाया।
क्या बोले विधायक?
निरीक्षण के बाद विधायक ने कहा –
"यह अस्पताल पोटका के हर नागरिक का हक है। कुछ तकनीकी खामियां मिली हैं जिन्हें जल्द सुधारने का निर्देश दिया गया है। मेरा लक्ष्य है कि इस अस्पताल का उद्घाटन जल्द हो और मरीजों को राहत मिले।"
उन्होंने यह भी कहा कि काम गुणवत्ता के साथ हो, सिर्फ जल्दीबाजी में नहीं।
जल्द शुरू होगा इलाज, लेकिन सवाल बाकी हैं
भवन निर्माण अपने अंतिम चरण में है, और यदि निर्देशों के अनुसार खामियां सुधारी जाती हैं, तो अगले एक महीने में यह स्वास्थ्य केंद्र जनता के लिए खोल दिया जाएगा।
मगर यह सवाल अब भी बना हुआ है —
क्या अस्पताल शुरू होने के बाद भी डॉक्टरों की नियमित उपस्थिति, दवाओं की आपूर्ति, और मरीजों की देखभाल में कोई कोताही नहीं होगी? या यह भवन भी भविष्य में महज एक ढांचा बनकर रह जाएगा?
ग्रामीणों की उम्मीदें अब इस अस्पताल से जुड़ी
इस अस्पताल के शुरू होने से पोटका और आस-पास के गांवों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है। अब तक ग्रामीणों को गंभीर बीमारियों में जमशेदपुर या रांची का रुख करना पड़ता था।
अब सभी की नजरें इस बात पर हैं कि क्या सरकार और प्रशासन इस पहल को सही अंजाम तक पहुंचा पाएंगे?
आपका क्या मानना है? क्या सरकार को निर्माण कार्यों की निगरानी के लिए एक स्थायी स्वतंत्र एजेंसी बनानी चाहिए? क्या ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं में राजनीतिक इच्छाशक्ति ही काफी है? अपनी राय हमें ज़रूर बताएं।
क्योंकि जब सवाल जनहित का हो, तो आपकी आवाज़ ही असली ताकत है।
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