Nepal Curfew Chaos : काठमांडू में सोशल मीडिया बैन के खिलाफ भड़की हिंसा, क्या अब अभिव्यक्ति की आजादी खतरे में?
काठमांडू में सोशल मीडिया बैन और भ्रष्टाचार के विरोध में युवाओं का प्रदर्शन हिंसा में बदल गया। जानिए कब, कहाँ और क्यों लागू हुआ कर्फ्यू और नेपाल सरकार का नया नियम किस पर पड़ेगा असर।
नेपाल की राजधानी काठमांडू के न्यू बानेश्वर इलाके में सोमवार को हालात बेकाबू हो गए। भ्रष्टाचार और सोशल मीडिया बैन के खिलाफ युवाओं ने प्रदर्शन किया, जो पुलिस से भिड़ंत में बदल गया। स्थिति इतनी बिगड़ी कि जिला प्रशासन ने धारा 144 लागू कर कर्फ्यू का आदेश दिया। यह कर्फ्यू सोमवार दोपहर 12:30 बजे से रात 10 बजे तक लागू रहेगा। काठमांडू के मुख्य जिला अधिकारी छबिलाल रिजाल ने इसे स्थानीय प्रशासन अधिनियम की धारा 6 के तहत लागू किया।
हिंसक झड़प में 21 प्रदर्शनकारियों की मौत हो गई। कई लोग घायल हैं। प्रदर्शनकारियों ने प्रतिबंधित क्षेत्र को तोड़ते हुए संसद परिसर में प्रवेश कर दिया। पुलिस ने उन्हें रोकने के लिए पानी की तोप, आंसू गैस और गोलियों का इस्तेमाल किया। फिर भी प्रदर्शनकारी पीछे नहीं हटे। उन्होंने पुलिस पर बोतलें और टहनियां फेंकी।
कर्फ्यू न्यू बानेश्वर चौक से एवरेस्ट होटल, बिजुली बाजार, मिन भवन, शांतिनगर, टिंकुने चौक, आईप्लेक्स मॉल और शंखमूल तक लागू किया गया है। इन इलाकों में आवागमन और सभा पूरी तरह प्रतिबंधित है।
यह विरोध नेपाल सरकार के उस फैसले के खिलाफ है जिसमें फेसबुक, इंस्टाग्राम, एक्स, यूट्यूब समेत 26 सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को बैन कर दिया गया। यह फैसला उन कंपनियों के खिलाफ लिया गया जिन्होंने नेपाल में पंजीकरण नहीं कराया। युवाओं का आरोप है कि सरकार भ्रष्टाचार में लिप्त है और अब अभिव्यक्ति की आजादी पर भी हमला कर रही है।
सरकार का कहना है कि केवल वही प्लेटफॉर्म काम करेंगे जिन्होंने पंजीकरण कराया है। अन्य सभी बंद कर दिए जाएंगे। मंत्रालय ने नेपाल दूरसंचार प्राधिकरण को आदेश दिया है कि अपंजीकृत साइट्स बंद की जाएं।
नेपाल पत्रकार महासंघ ने इस कदम का विरोध किया। महासंघ के महासचिव राम प्रसाद दहाल ने कहा कि यह प्रेस की आजादी और संविधान द्वारा गारंटीकृत सूचना के अधिकार पर हमला है।
यह पहली बार नहीं है जब नेपाल सरकार ने सोशल मीडिया पर कार्रवाई की हो। नवंबर 2023 में टिकटॉक पर बैन लगाया गया था। बाद में पंजीकरण के बाद उसे दोबारा चालू कर दिया गया।
इस घटना ने पूरे नेपाल में अभिव्यक्ति की आजादी और नागरिक अधिकारों पर बहस छेड़ दी है। प्रशासन ने सुरक्षा बढ़ा दी है, लेकिन लोगों में असंतोष फैलता जा रहा है। आगे की जांच और बातचीत से ही तय होगा कि यह संकट कैसे सुलझेगा।
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