Addiction Prevention: अंजना बहन का नशामुक्त भारत मंत्र: 80 लाख जानें बचाने वाला राजयोग रहस्य जानिए आज ही!
पटमदा सेवा केंद्र की अंजना बहन ने नुक्कड़ नाटक के जरिए नशामुक्त भारत अभियान में बताया कि नशा को केवल नशा ही काट सकता है। जानिए कैसे राजयोग मेडिटेशन मस्तिष्क में डोपामीन केमिकल को प्राकृतिक रूप से रिलीज कर नशे की लत से छुटकारा दिलाता है।
पटमदा – पटमदा सेवा केंद्र में प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय की अंजना बहन ने नशामुक्त भारत अभियान के तहत नुक्कड़ नाटक का आयोजन करके समाज के युवाओं और नागरिकों को नशे के दुष्प्रभावों से अवगत कराया। उनका यह सशक्त प्रयास जागरूकता फैलाने के साथ-साथ समाधान भी पेश करता है।
अंजना बहन ने अपने संवाद में स्पष्ट शब्दों में कहा कि नशा को अगर जड़ से खत्म करना है तो उसे उसी की शक्ति से काटना होगा, जैसे लोहा लोहे को काटता है। नशे की समस्या दिनोंदिन गंभीर रूप लेती जा रही है। आंकड़ों के अनुसार, दुनिया के लगभग 195 देशों में से 180 देशों में तंबाकू या अन्य प्रकार के नशे का सेवन किसी-न-किसी रूप में प्रचलित है। हर साल लगभग 80 लाख लोग नशे की वजह से अपनी जान गंवा रहे हैं। भारत खास तौर पर इस समस्या से जूझ रहा है, जहां हर साल करीब 12 लाख लोग तंबाकू जैसे नशे के चलते अपनी जान गवां देते हैं।
तंबाकू के उपयोग में पाए जाने वाले 7,000 केमिकल्स में से करीब 250 रसायन शरीर के लिए बेहद नुकसानदेह हैं और इनमें से 69 ऐसे तत्व हैं जो कैंसर जैसी घातक बीमारियां उत्पन्न करते हैं। निकोटिन जैसे तत्व एक बार शरीर में पहुंचने के बाद इतना प्रभावशाली असर डालते हैं कि व्यक्ति को बार-बार नशे का मन होने लगता है। यह दुनिया में दूसरे नंबर का सबसे खतरनाक जहर माना जाता है। तंबाकू, बीड़ी, सिगरेट जैसे उत्पादों के साथ-साथ कई लोग शराब से भी शुरुआत करते हैं, जो बाद में ज़िंदगी पर भारी पड़ती है।
अंजना बहन ने नुक्कड़ नाटक के माध्यम से बताया कि युवाओं को अक्सर छोटी शुरुआत से नशे की ओर आकर्षित किया जाता है। परिवार और समाज का दायित्व है कि वे समय रहते बच्चों और युवाओं को इस दलदल में फंसने से बचाएं। भारत सरकार, सामाजिक संगठन और ब्रह्माकुमारी जैसे संस्थान मिलकर नशामुक्त भारत की दिशा में कार्यरत हैं, जिसमें इस तरह के जागरूकता अभियान अहम भूमिका निभाते हैं।
उन्होंने यह भी साझा किया कि तंबाकू और अन्य नशे पर नियंत्रण पाना कठिन जरूर है, लेकिन नामुमकिन नहीं। शुरुआत हमेशा कठिन दिखती है, लेकिन अगर व्यक्ति मानसिक रूप से मजबूत हो और सही मार्गदर्शन मिले तो वह निश्चित रूप से नशे की लत से छुटकारा पा सकता है। इस स्थिति में राजयोग मेडिटेशन फायदेमंद सिद्ध हो सकता है, क्योंकि यह मस्तिष्क में डोपामीन केमिकल को स्वाभाविक रूप से रिलीज करता है।
राजयोग मेडिटेशन के माध्यम से शरीर और मन में सकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है, जिससे व्यक्ति को स्थायी खुशी और आत्मविश्वास मिलता है। ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय के अनुसार, ज्ञान, मुरली की बातें और योग एक प्रकार की प्राकृतिक थेरेपी का कार्य करते हैं। ये न केवल मन को मजबूत बनाते हैं बल्कि शरीर के रासायनों के संतुलन को भी बनाए रखते हैं, जिससे नशे की तलब धीरे-धीरे खत्म होने लगती है।
अंजना बहन ने अपने संदेश में कहा कि नशा छोड़ने के लिए आवश्यक है कि व्यक्ति सकारात्मक सोच अपनाए तथा अच्छे वातावरण, योग और ध्यान का सहारा ले। परिवार, समाज और संस्थानों का सहयोग भी जरूरी है। अगर कोई व्यक्ति ठान ले कि उसे नशा छोड़ना है, और यदि उसे सकारात्मक मार्गदर्शन एवं राजयोग की शक्ति मिल जाए, तो वह किसी भी लत से आज़ादी पा सकता है।
संस्था की ओर से समय-समय पर ऐसे कार्यक्रम और शिविरों का आयोजन किया जाता है, जिसमें विशेषज्ञों और अनुभवी बीके सदस्यों द्वारा लोगों को नशा मुक्ति के उपाय बताए जाते हैं. इसके साथ ही, समाज में अच्छे विचार और जीवनशैली को अपनाने का भी संदेश दिया जाता है।
नशामुक्त भारत अभियान एक जनआंदोलन बन चुका है। हर व्यक्ति, हर परिवार और हर संस्थान की जिम्मेदारी है कि वे खुद को और अपने आसपास के लोगों को जागरूक करें और नशा मुक्त समाज की स्थापना में योगदान दें।
अंजना बहन का यह संदेश न केवल प्रेरक है, बल्कि हर किसी को सोचने पर मजबूर करता है कि आज नहीं तो कब? नशा छोड़िए, स्वस्थ समाज और उज्जवल भारत के निर्माण में सहभागी बनिए।
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