Murshidabad Protest : उग्र प्रदर्शन! पलामू में मजदूर की मौत पर बेलडांगा में हाईवे जाम
पलामू में मुर्शिदाबाद के मजदूर अलाउद्दीन शेख की संदिग्ध मौत के बाद बेलडांगा में भारी बवाल शुरू हो गया है। नेशनल हाईवे 12 पर टायर जलाकर हो रहे इस उग्र प्रदर्शन और हत्या के आरोपों के पीछे की पूरी सच्चाई यहाँ जानिए।
मुर्शिदाबाद: सुलगता आक्रोश। झारखंड के पलामू जिले से आई एक दुखद खबर ने पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद में आग लगा दी है। बिश्रामपुर में फेरी लगाने वाले 30 वर्षीय मोहम्मद अलाउद्दीन शेख का शव संदिग्ध परिस्थितियों में फंदे से लटका मिलने के बाद बेलडांगा इलाका रणक्षेत्र बन गया है। परिजनों का दावा है कि यह आत्महत्या नहीं बल्कि सोची-समझी हत्या है।
पलामू: बंद कमरे का वो खौफनाक सच
घटना पलामू जिले के बिश्रामपुर थाना क्षेत्र की है। अलाउद्दीन यहाँ लंबे समय से किराए के मकान में रहकर फेरी लगाता था। गुरुवार को जब वह घंटों कमरे से बाहर नहीं निकला, तो मकान मालिक के शोर मचाने पर पुलिस बुलाई गई। पुलिस ने दरवाजा तोड़ा तो अलाउद्दीन की लाश फंदे पर झूल रही थी। पुलिस इसे शुरुआती तौर पर सुसाइड मान रही है, लेकिन मौके की नजाकत ने पूरे राज्य की सियासत और सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
बेलडांगा में हाईवे 12 ठप और टायरों का धुआं
जैसे ही अलाउद्दीन का शव उसके पैतृक गांव महेशपुर (मुर्शिदाबाद) पहुँचा, ग्रामीणों का सब्र जवाब दे गया। आक्रोशित लोगों ने नेशनल हाईवे 12 (NH-12) को पूरी तरह ब्लॉक कर दिया। सड़क के बीचों-बीच टायर जलाए गए और घंटों नारेबाजी की गई। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि अलाउद्दीन एक मेहनती युवक था और उसके पास आत्महत्या करने की कोई वजह नहीं थी।
बंगाली भाषी होने का 'खामियाजा'?
इस घटना ने प्रवासी मजदूरों की सुरक्षा के मुद्दे को फिर से हवा दे दी है। प्रदर्शनकारियों और स्थानीय लोगों का गंभीर आरोप है कि बंगाली भाषी होने के कारण अक्सर दूसरे राज्यों में मजदूरों को प्रताड़ित किया जाता है। उनका दावा है कि अलाउद्दीन को किसी विवाद के चलते मारा गया और फिर मामले को दबाने के लिए उसे फंदे से लटका दिया गया।
पुलिसिया कार्रवाई: पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार
पलामू की SP रिष्मा रमेशन ने मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए बयान जारी किया है। उन्होंने कहा कि मेदिनी राय मेडिकल कॉलेज में पोस्टमार्टम कराया गया है और वीडियोग्राफी भी की गई है। रिपोर्ट आने के बाद ही दूध का दूध और पानी का पानी हो पाएगा। फिलहाल, पलामू से लेकर बेलडांगा तक पुलिस की टीमें अलर्ट पर हैं।
प्रवासी मजदूरों का दर्द और इतिहास
अगर इतिहास उठाकर देखें तो मुर्शिदाबाद, मालदा और उत्तर दिनाजपुर जैसे जिलों से लाखों मजदूर झारखंड, बिहार और दक्षिण भारत के राज्यों में फेरी लगाने या मजदूरी करने जाते हैं। अक्सर इन मजदूरों को स्थानीय विवादों या भाषाई भेदभाव का सामना करना पड़ता है। अलाउद्दीन की मौत ने उन हजारों परिवारों की चिंता बढ़ा दी है जिनके बेटे घर से दूर रोटी की तलाश में निकले हैं।
संपादकीय राय: जब तक इस मामले की उच्च स्तरीय जांच नहीं होती और पोस्टमार्टम रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं की जाती, तब तक बेलडांगा का यह गुस्सा शांत होना मुश्किल है। प्रशासन को प्रवासी मजदूरों के मन में सुरक्षा का भाव पैदा करने के लिए ठोस कदम उठाने होंगे।
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