Manoharpur Attack: दंतेला खत्म, सूंड़ में लपेटकर बाहर खींचा और पटककर मार डाला, कोयना जंगल में भारी तबाही रेडदिरी

पश्चिमी सिंहभूम के मनोहरपुर में एक दंतेले हाथी ने आधी रात को लक्ष्मण बिंरगम को उसके घर के बाहर ही पटक-पटक कर मार डाला है। जब पत्नी मायके गई थी, तब अकेले खाना बना रहे ग्रामीण पर हुए इस खौफनाक हमले और सारंडा के जंगलों में छिपे इस मौत के साये की पूरी हकीकत यहाँ दी गई है वरना आप भी जंगली हाथियों के इस बदले हुए मिजाज से अनजान रह जाएंगे।

Dec 20, 2025 - 14:07
 0
Manoharpur Attack: दंतेला खत्म, सूंड़ में लपेटकर बाहर खींचा और पटककर मार डाला, कोयना जंगल में भारी तबाही रेडदिरी
Manoharpur Attack: दंतेला खत्म, सूंड़ में लपेटकर बाहर खींचा और पटककर मार डाला, कोयना जंगल में भारी तबाही रेडदिरी

मनोहरपुर (पश्चिमी सिंहभूम), 20 दिसंबर 2025 – झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम जिले के मनोहरपुर प्रखंड से एक ऐसी विचलित कर देने वाली खबर सामने आई है, जिसने इंसान और जंगली जानवरों के बीच बढ़ते खूनी संघर्ष को एक बार फिर उजागर कर दिया है। कोयना वन क्षेत्र के गिंडुग रेडादिरी टोला में शुक्रवार की रात एक अकेले 'दंतेले' हाथी ने जो तांडव मचाया, उसने पूरे गांव की रूह कंपा दी। खाना बना रहे एक बेगुनाह ग्रामीण को मौत ने उस वक्त अपनी आगोश में ले लिया जब उसे भागने तक का मौका नहीं मिला। फिलहाल पूरे इलाके में दहशत का सन्नाटा है और लोग अपने ही घरों के बाहर निकलने से कतरा रहे हैं।

इतिहास: सारंडा-कोयना के जंगलों में हाथियों का साम्राज्य

पश्चिमी सिंहभूम का यह इलाका एशिया के सबसे बड़े साल (Sal) वनों के लिए जाना जाता है। ऐतिहासिक रूप से सारंडा और कोयना के जंगल हाथियों का सबसे सुरक्षित प्राकृतिक आवास रहे हैं। 1900 के दशक के शुरुआती सरकारी दस्तावेजों में भी यहाँ के हाथियों के अनुशासन और उनके निश्चित रास्तों का जिक्र मिलता है। हालांकि, पिछले कुछ सालों में जंगलों के भीतर मानवीय हस्तक्षेप और संसाधनों की कमी ने यहाँ के हाथियों को 'आदमखोर' न सही लेकिन बेहद हिंसक और आक्रामक बना दिया है। पहले हाथी केवल फसलें बर्बाद करते थे, लेकिन अब वे सीधे रिहायशी इलाकों में घुसकर इंसानों को निशाना बना रहे हैं।

खाना बना रहे लक्ष्मण पर मौत का प्रहार

घटना शुक्रवार रात करीब 10:30 बजे की है। गिंडुग निवासी लक्ष्मण बिंरगम (48 वर्ष) अपने घर के बाहर चूल्हे पर खाना बना रहे थे।

  • अकेला था शिकार: लक्ष्मण की पत्नी उन दिनों अपने मायके गई हुई थी और वह घर में बिल्कुल अकेले थे।

  • अचानक हमला: घने अंधेरे को चीरते हुए एक विशालकाय दंतेला हाथी अचानक उनके आंगन में आ धमका। हाथी को सामने देख लक्ष्मण अपनी जान बचाने के लिए घर के पीछे की ओर भागे और मदद के लिए चिल्लाए।

  • खौफनाक अंत: दंतेला हाथी इतना आक्रामक था कि उसने लक्ष्मण को भागने नहीं दिया। हाथी ने उन्हें अपनी शक्तिशाली सूंड़ में लपेटा, घर से बाहर खींच लाया और जमीन पर पटक-पटक कर कुचलते हुए मौत के घाट उतार दिया।

सुबह खुला खूनी खेल का राज

हाथी के जाने के बाद सुबह जब लक्ष्मण का छोटा भाई सुखराम बिंरगम उनके घर पहुँचा, तो वहां का नजारा देखकर उसकी चीख निकल गई। भाई का क्षत-विक्षत शव आंगन में पड़ा था।

  1. प्रशासनिक सक्रियता: आजसू नेता शंकर मुंडारी के माध्यम से वन विभाग को सूचना दी गई।

  2. पुलिसिया कार्रवाई: मनोहरपुर पुलिस ने मौके पर पहुँचकर शव को कब्जे में लिया और पोस्टमार्टम के लिए चक्रधरपुर अनुमंडल अस्पताल भेज दिया है।

  3. मुआवजे का भरोसा: वनरक्षी अभय कुमार ने घटनास्थल का जायजा लिया और पीड़ित परिवार को सरकारी प्रावधानों के तहत हर संभव सहायता और मुआवजा दिलाने का आश्वासन दिया।

घटना का घटनाक्रम (Case Summary)

विवरण जानकारी
मृतक का नाम लक्ष्मण बिंरगम (48 वर्ष)
घटना स्थल गिंडुग रेडादिरी टोला, मनोहरपुर
हमलावर एक दंतेला हाथी (Single Tusker)
वक्त शुक्रवार रात, लगभग 10:30 बजे
वन क्षेत्र कोयना वन क्षेत्र (पश्चिमी सिंहभूम)

दहशत में ग्रामीण, प्रशासन से सुरक्षा की मांग

गिंडुग और आसपास के गांवों में इस घटना के बाद चूल्हे नहीं जले हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि वन विभाग हाथियों की निगरानी में विफल रहा है। दंतेले हाथी अक्सर झुंड से बिछड़कर ज्यादा हिंसक हो जाते हैं और अब वे गांव के बीचों-बीच पहुँच रहे हैं। ग्रामीणों ने मांग की है कि हाथियों को घने जंगलों की ओर खदेड़ने के लिए हाथियों के दस्ते (Elephant Squard) की तैनाती की जाए और गांव की सीमाओं पर सोलर फेंसिंग या रोशनी की उचित व्यवस्था की जाए।

जंगल और बस्ती के बीच खिंची खून की लकीर

लक्ष्मण बिंरगम की मौत केवल एक व्यक्ति की जान जाना नहीं है, बल्कि यह एक चेतावनी है। जैसे-जैसे जंगलों का दायरा सिमट रहा है, ये विशाल जीव बस्तियों का रुख कर रहे हैं। अगर समय रहते सुरक्षा के ठोस उपाय नहीं किए गए, तो मनोहरपुर जैसे शांत इलाके हाथियों के 'कब्रगाह' बनते रहेंगे।

What's Your Reaction?

like

dislike

love

funny

angry

sad

wow

Manish Tamsoy मनीष तामसोय कॉमर्स में मास्टर डिग्री कर रहे हैं और खेलों के प्रति गहरी रुचि रखते हैं। क्रिकेट, फुटबॉल और शतरंज जैसे खेलों में उनकी गहरी समझ और विश्लेषणात्मक क्षमता उन्हें एक कुशल खेल विश्लेषक बनाती है। इसके अलावा, मनीष वीडियो एडिटिंग में भी एक्सपर्ट हैं। उनका क्रिएटिव अप्रोच और टेक्निकल नॉलेज उन्हें खेल विश्लेषण से जुड़े वीडियो कंटेंट को आकर्षक और प्रभावी बनाने में मदद करता है। खेलों की दुनिया में हो रहे नए बदलावों और रोमांचक मुकाबलों पर उनकी गहरी पकड़ उन्हें एक बेहतरीन कंटेंट क्रिएटर और पत्रकार के रूप में स्थापित करती है।