Sahitya Pehchan: छत्तीसगढ़ की बेटी का भोपाल में डंका, लतेलिन 'लता' प्रधान की 'कलम की मुस्कान' ने जीता दिल, संघर्ष से सफलता तक की अनकही कहानी

छत्तीसगढ़ के पिसौद की पहली कवयित्री लतेलिन 'लता' प्रधान की नई कृति 'कलम की मुस्कान' का भोपाल में भव्य विमोचन हुआ है। साहित्य के कठिन संघर्षों और सफलता के शिखर तक पहुँचने की उनकी इस प्रेरणादायक यात्रा की पूरी रिपोर्ट यहाँ दी गई है वरना आप भी कलम की शक्ति और एक महिला रचनाकार के अटूट जज्बे की कहानी जानने से चूक जाएंगे।

Jan 19, 2026 - 15:53
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Sahitya Pehchan: छत्तीसगढ़ की बेटी का भोपाल में डंका, लतेलिन 'लता' प्रधान की 'कलम की मुस्कान' ने जीता दिल, संघर्ष से सफलता तक की अनकही कहानी
Sahitya Pehchan: छत्तीसगढ़ की बेटी का भोपाल में डंका, लतेलिन 'लता' प्रधान की 'कलम की मुस्कान' ने जीता दिल, संघर्ष से सफलता तक की अनकही कहानी

भोपाल/जांजगीर-चांपा, 19 जनवरी 2026 – साहित्य की दुनिया में जब कोई रचनाकार अपनी भावनाओं को शब्दों में पिरोता है, तो वह केवल कविता नहीं, बल्कि एक युग का दस्तावेज बन जाता है। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में आयोजित एक भव्य समारोह में छत्तीसगढ़ की माटी की बेटी और जांजगीर-चांपा जिले के पिसौद ग्राम की पहली कवयित्री लतेलिन 'लता' प्रधान ने अपनी कृति 'कलम की मुस्कान' के जरिए साहित्य जगत में अपना परचम लहरा दिया है। भेल (BHEL) के 67वें वर्ष के गौरवशाली अवसर पर आयोजित इस कार्यक्रम ने यह साबित कर दिया कि संघर्ष कितना भी कठिन क्यों न हो, अगर लगन सच्ची हो तो सफलता कदम चूमती है।

बाधाओं को चीरकर निकली 'कलम की मुस्कान'

लतेलिन प्रधान की यह साहित्यिक यात्रा फूलों की सेज नहीं थी। उनके जीवन में कई ऐसे मोड़ आए जब उन्होंने इस सफर को विराम देने का मन बना लिया था।

  • संघर्ष और त्याग: साहित्यिक जगत में अपनी पहचान बनाने के लिए उन्होंने अनगिनत उतार-चढ़ाव देखे। पारिवारिक जिम्मेदारियों और सामाजिक बाधाओं के बीच उन्होंने अपनी लेखनी को कभी झुकने नहीं दिया।

  • अटूट विश्वास: कहा जाता है कि शुद्ध भावनाएं और कठिन परिश्रम कभी निष्फल नहीं जाते। लतेलिन 'लता' प्रधान के संघर्ष को करीब से देखने वालों का मानना है कि उनकी शुद्धता और त्याग ने ही आज उन्हें इस मुकाम पर पहुँचाया है।

  • कृति की विशेषता: 'कलम की मुस्कान' केवल एक पुस्तक नहीं है, बल्कि लता प्रधान के जीवन के खट्टे-मीठे अनुभवों का निचोड़ है, जिसे हमरूह प्रकाशन की टीम ने बड़ी खूबसूरती से संजोया है।

भोपाल में भव्य विमोचन: दिग्गजों का लगा जमावड़ा

11 जनवरी 2026 को भोपाल के पिपलानी स्थित छत्तीसगढ़ सांस्कृतिक मंडल में आयोजित यह समारोह ऐतिहासिक रहा। कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ी संस्कृति और साहित्य का अनूठा संगम देखने को मिला।

  1. मुख्य अतिथि और संरक्षक: कार्यक्रम में यू.आर. सिदार, जी.पी. बघेल, एच.आर. पटेल और एम.के. भगत जैसे गणमान्य व्यक्तियों की उपस्थिति ने गरिमा बढ़ाई।

  2. साहित्यिक सहयोग: इस कृति को निखारने में डॉ. राधे राधे (राष्ट्रीय महामंत्री- काव्य रसिक संस्थान), समीक्षक नोबेल भाई, वरिष्ठ कवि ठाकुर व्यास सिंह 'गुमसुम' और सुधीर श्रीवास्तव 'यमराज मित्र' का विशेष योगदान रहा।

  3. मंडल की भूमिका: अध्यक्ष राजेश कुमार कर्ष और सचिव बुदेश्वर सिंह गौड़ के नेतृत्व में पूरी टीम ने लतेलिन 'लता' प्रधान की इस उपलब्धि को समाज के सामने रखा।

लतेलिन 'लता' प्रधान: एक नजर में (Author Snapshot)

विवरण जानकारी (Details)
जन्म स्थान ग्राम पिसौद, जिला जांजगीर-चांपा (छत्तीसगढ़)
उपाधि क्षेत्र की पहली महिला कवयित्री
प्रमुख कृति कलम की मुस्कान (Kalam Ki Muskan)
समारोह का अवसर BHEL का 67वां स्थापना वर्ष
विमोचन स्थल छत्तीसगढ़ सांस्कृतिक मंडल, भोपाल

इतिहास का पन्ना: जांजगीर-चांपा की साहित्यिक विरासत और महिलाओं का योगदान

छत्तीसगढ़ का जांजगीर-चांपा जिला ऐतिहासिक रूप से हसदेव नदी के किनारे बसा एक सांस्कृतिक गढ़ रहा है। 12वीं शताब्दी में कलचुरी राजवंश के शासनकाल से ही यह क्षेत्र कला और विद्वत्ता का केंद्र रहा है। इतिहास गवाह है कि जांजगीर की माटी ने हमेशा से योद्धाओं और कवियों को जन्म दिया है। हालांकि, ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं के लिए साहित्य को करियर के रूप में चुनना हमेशा से एक बड़ी सामाजिक चुनौती रही है। 20वीं शताब्दी के अंत तक पिसौद जैसे गांवों से महिला कवयित्रियों का राष्ट्रीय स्तर पर उभरना दुर्लभ था। लतेलिन 'लता' प्रधान की सफलता 2026 के इस नए भारत की तस्वीर है, जहाँ ग्रामीण परिवेश की प्रतिभाएं भोपाल जैसे महानगरों में अपनी लेखनी का लोहा मनवा रही हैं। उनकी सफलता उस ऐतिहासिक संघर्ष का हिस्सा है जिसने स्त्री विमर्श को छत्तीसगढ़ की संकुचित सीमाओं से बाहर निकालकर विश्व पटल पर रखा है।

साहित्यिक प्रेमियों की बधाई: उज्ज्वल भविष्य की कामना

होमन लाल साहू द्वारा संचालित इस गरिमामय कार्यक्रम में भारी संख्या में साहित्य प्रेमी उपस्थित रहे।

  • सामाजिक संदेश: लतेलिन 'लता' प्रधान ने अपनी सफलता का श्रेय अपने परिवार, समाज और उन सभी वरिष्ठ साहित्यकारों को दिया जिन्होंने उनके कठिन समय में हाथ थामा।

  • निरंतरता का संकल्प: लता प्रधान का मानना है कि साहित्य समाज का आइना है और वे अपनी कलम के माध्यम से समाज की बुराइयों को दूर करने और मुस्कान फैलाने का कार्य जारी रखेंगी।

  • प्रसार: कार्यक्रम में उपस्थित अमृत लाल चंद्रा, सी.पी. भारद्वाज और मनीष साहू समेत अन्य सदस्यों ने उनके उज्ज्वल भविष्य की मंगल कामना की।

पिसौद की 'लता' अब पूरे देश में महकेगी

लतेलिन 'लता' प्रधान की कहानी हर उस उभरते रचनाकार के लिए प्रेरणा है जो बाधाओं से डरकर पीछे हट जाते हैं। 'कलम की मुस्कान' का विमोचन केवल एक पुस्तक का आना नहीं है, बल्कि एक हार न मानने वाली महिला की जीत का उत्सव है।

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Manish Tamsoy मनीष तामसोय कॉमर्स में मास्टर डिग्री कर रहे हैं और खेलों के प्रति गहरी रुचि रखते हैं। क्रिकेट, फुटबॉल और शतरंज जैसे खेलों में उनकी गहरी समझ और विश्लेषणात्मक क्षमता उन्हें एक कुशल खेल विश्लेषक बनाती है। इसके अलावा, मनीष वीडियो एडिटिंग में भी एक्सपर्ट हैं। उनका क्रिएटिव अप्रोच और टेक्निकल नॉलेज उन्हें खेल विश्लेषण से जुड़े वीडियो कंटेंट को आकर्षक और प्रभावी बनाने में मदद करता है। खेलों की दुनिया में हो रहे नए बदलावों और रोमांचक मुकाबलों पर उनकी गहरी पकड़ उन्हें एक बेहतरीन कंटेंट क्रिएटर और पत्रकार के रूप में स्थापित करती है।