Koderma Mystery: कोडरमा में लापता महिला का शव कुएं से बरामद, महुआ चुनने निकली थी गीता, 3 दिन बाद तैरती मिली लाश
कोडरमा के तिलैया डैम ओपी क्षेत्र में लापता महिला गीता देवी का शव कुएं से मिला है। 5 अप्रैल से लापता महिला, पुलिस की जांच और महुआ चुनने के दौरान हुए हादसे की पूरी इनसाइड रिपोर्ट यहाँ देखें।
कोडरमा/तिलैया, 7 अप्रैल 2026 – झारखंड के कोडरमा जिले से एक हृदयविदारक घटना सामने आई है, जिसने पूरे तिलैया डैम क्षेत्र को झकझोर कर रख दिया है। पिछले तीन दिनों से लापता 35 वर्षीय गीता देवी का शव मंगलवार सुबह एक कुएं से बरामद किया गया। महुआ चुनने के लिए घर से निकली गीता का इस तरह अंत होना न केवल परिवार के लिए एक बड़ा आघात है, बल्कि पूरे इलाके में सनसनी का विषय बना हुआ है। पुलिस इस मामले को पहली नजर में एक दुर्घटना मान रही है, लेकिन मौत के पीछे के असल कारणों को लेकर गांव की गलियों में सस्पेंस गहरा गया है।
महुआ की तलाश और वो 'खूनी' मोड़: जब वापस नहीं लौटी गीता
घटनाक्रम की शुरुआत 5 अप्रैल की सुबह हुई, जब झारखंड के ग्रामीण अंचलों में महुआ चुनने का सीजन चरम पर है।
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अंतिम बार देखा जाना: परिजनों के अनुसार, गीता देवी 5 अप्रैल की सुबह करीब 11 बजे महुआ चुनने के लिए निकली थीं।
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लापता होने का डर: जब सूरज ढलने के बाद भी वह घर नहीं लौटीं, तो परिजनों के हाथ-पांव फूल गए। रिश्तेदारों और गांव के हर संभावित कोने में तलाश की गई, लेकिन गीता का कहीं सुराग नहीं मिला।
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पुलिस में रिपोर्ट: अंततः हार मानकर उनकी सास मोहिनी देवी ने तिलैया डैम ओपी में गुमशुदगी की आधिकारिक रिपोर्ट दर्ज कराई।
तैरती लाश और चीख-पुकार: मंगलवार की वो मनहूस सुबह
मंगलवार सुबह जब गांव के लोग अपने दैनिक कार्यों के लिए निकले, तो ओपी क्षेत्र के समीप स्थित एक पुराने कुएं के पास से गुजरते हुए एक ग्रामीण की नजर अंदर पड़ी।
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शव की पहचान: कुएं के पानी में एक महिला का शव तैर रहा था। देखते ही देखते वहां ग्रामीणों का हुजूम उमड़ पड़ा। मृतका के कपड़ों और हुलिए से उसकी पहचान लापता गीता देवी के रूप में की गई।
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पुलिस का एक्शन: सूचना मिलते ही ओपी प्रभारी प्रेम कुमार पुलिस बल के साथ मौके पर पहुँचे। शव को कड़ी मशक्कत के बाद बाहर निकाला गया।
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प्रारंभिक आशंका: ओपी प्रभारी ने बताया कि मुमकिन है कि महुआ चुनने के दौरान गीता का पैर फिसल गया हो और वह गहरे कुएं में जा गिरी हों।
महुआ सीजन और प्राकृतिक हादसों का जोखिम
कोडरमा का यह इलाका अपने जंगलों और महुआ के पेड़ों के लिए जाना जाता है, लेकिन यहाँ की भौगोलिक स्थिति अक्सर हादसों का सबब बनती है।
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महुआ का महत्व: झारखंड की ग्रामीण अर्थव्यवस्था में महुआ का बड़ा योगदान है। मार्च-अप्रैल के महीने में महिलाएं और बच्चे सुबह-सुबह सुनसान इलाकों में महुआ चुनने जाते हैं।
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खुले कुओं का खतरा: इस क्षेत्र के खेतों और जंगलों के पास कई ऐसे पुराने कुएं हैं जिनकी बाउंड्री वॉल (मुंडेर) या तो टूटी हुई है या फिर वे झाड़ियों से ढके हुए हैं। गीता देवी के साथ हुआ हादसा इसी प्रशासनिक और स्थानीय अनदेखी का नतीजा हो सकता है।
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पलायन का दर्द: मृतका के पति कारू साव घर से हजारों किलोमीटर दूर विजयवाड़ा में मजदूरी करते हैं। यह घटना झारखंड के उन हजारों परिवारों की कहानी बयां करती है जहाँ पुरुष पलायन कर चुके हैं और पीछे महिलाएं अकेले संघर्ष करते हुए ऐसे हादसों का शिकार हो जाती हैं।
अगली कार्रवाई: पोस्टमार्टम और फॉरेंसिक रिपोर्ट का इंतजार
पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर कानूनी औपचारिकताएं पूरी कीं और उसे पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है।
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गहन जांच: प्रेम कुमार ने स्पष्ट किया है कि हालांकि यह मामला दुर्घटना लग रहा है, लेकिन पुलिस हर पहलू की जांच कर रही है। क्या यह वास्तव में पैर फिसलने की घटना थी या इसके पीछे कोई रंजिश? पोस्टमार्टम रिपोर्ट से ही मौत के सटीक समय और कारणों का पता चलेगा।
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परिवार का हाल: गीता अपने पीछे दो पुत्र और एक पुत्री को छोड़ गई हैं। माँ के अचानक चले जाने से बच्चों का रो-रोकर बुरा हाल है। गांव में मातम पसरा हुआ है और हर कोई कारू साव के विजयवाड़ा से लौटने का इंतजार कर रहा है।
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