Silvassa Sangam: सिलवासा में गूँजी जल संचय की पुकार, काव्य रसिक संस्थान के महाकुंभ में जुटे अंतरराष्ट्रीय साहित्यकार, दमन-दीव के तट पर बहा शब्दों का अमृत
सिलवासा के कला केंद्र में काव्य रसिक संस्थान द्वारा आयोजित भव्य अंतरराष्ट्रीय कवि सम्मेलन की पूरी रिपोर्ट यहाँ मौजूद है। जल संचय की थीम पर आधारित 22 राज्यों के कवियों के जमावड़े और डॉ. राम कुमार रसिक के नेतृत्व में लिए गए बड़े संकल्पों का पूरा विवरण विस्तार से पढ़िए वरना आप साहित्य और पर्यावरण के इस सबसे अनूठे संगम को जानने से चूक जाएंगे।
सिलवासा (दानह), 26 जनवरी 2026 – पश्चिमी घाट की हरी-भरी वादियों और सागर की लहरों के बीच बसे शहर सिलवासा में आज साहित्य का एक ऐसा सैलाब उमड़ा, जिसने पर्यावरण संरक्षण की नई इबारत लिख दी। काव्य रसिक संस्थान की दादरा एवं नगर हवेली इकाई के तत्वावधान में 25 जनवरी को सिलवासा के कला केंद्र ऑडिटोरियम में एक भव्य अंतरराष्ट्रीय कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। 'विला दे पाको छी एक्रोस' के नाम से मशहूर इस शहर की फिजाओं में जब जल संचय का आह्वान गूँजा, तो सभागार में मौजूद हर शख्स भावविभोर हो उठा। यह आयोजन केवल तुकबंदी का मंच नहीं, बल्कि समाज को 'जल है तो कल है' का मंत्र देने वाला एक जीवंत दर्पण बना।
साहित्यिक महाकुंभ: जल ही जीवन का संकल्प
कार्यक्रम की शुरुआत राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. राम कुमार रसिक की गरिमामयी उपस्थिति में हुई। इस साहित्यिक समागम की सबसे बड़ी विशेषता इसकी 'जल संचय' थीम रही।
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बड़ी अपील: कार्यक्रम संयोजिका डॉ. मीना सुरेश जैन 'सुमीता' ने जोर देते हुए कहा कि साहित्य का उद्देश्य केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि गंभीर सामाजिक समस्याओं का समाधान खोजना है। आज जल संकट विश्व की सबसे बड़ी चुनौती है, जिसे कवियों ने अपनी लेखनी के जरिए जनता तक पहुँचाया।
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वैश्विक पहुँच: डॉ. राम कुमार रसिक ने बताया कि यह संस्थान भारत के 22 राज्यों सहित विदेशों में भी अपनी जड़ें फैला चुका है, जिसमें दुनिया भर के 46 प्रखर कलमकार जुड़े हैं।
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विशेष अतिथि: छत्तीसगढ़ से आए संध्या जैन 'महक', अमृतांशु शुक्ला और राकेश कुमार 'अयोध्या' ने अपनी रचनाओं से सभागार में तालियों की गड़गड़ाहट पैदा कर दी।
दिग्गजों की हुंकार: "वायु प्राण है, तो जल भविष्य"
मुख्य अतिथि सागर ठक्कर (प्रशासनिक अधिकारी) ने संस्थान की अंतरराष्ट्रीय ख्याति पर गर्व जताते हुए कहा कि साहित्यकार समाज का वो प्रहरी है जो समय रहते हमें खतरों से आगाह करता है। वहीं, राष्ट्रीय महामंत्री डॉ. राम रतन श्रीवास 'राधे राधे' ने अपने उद्बोधन में पर्यावरण और जल संचय पर सामूहिक संकल्प लेने का आह्वान किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि जब तक हमारी वायु शुद्ध और जल सुरक्षित है, तभी तक मानवता का अस्तित्व है।
काव्य रसिक संस्थान समागम: मुख्य विवरण (Event Snapshot)
| विवरण | प्रमुख जानकारी (Highlights) |
| मुख्य थीम | जल संचय एवं पर्यावरण संरक्षण |
| अध्यक्षता | डॉ. राम कुमार रसिक (संस्थापक राष्ट्रीय अध्यक्ष) |
| संयोजक | डॉ. मीना सुरेश जैन 'सुमीता' |
| प्रमुख राज्य | छत्तीसगढ़, गुजरात, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश आदि |
| विशेष उपलब्धि | अंतरराष्ट्रीय स्तर के 46 कलमकारों का जुड़ाव |
इतिहास का पन्ना: सिलवासा की सांस्कृतिक विरासत और दमन-दीव का साहित्यिक जुड़ाव
सिलवासा और दमन-दीव का इतिहास पुर्तगाली प्रभाव और जनजातीय संस्कृति का एक अद्भुत मिश्रण रहा है। इतिहास गवाह है कि 1779 में मराठों और पुर्तगालियों के बीच हुई संधि के बाद से ही सिलवासा कला और व्यापार का संगम स्थल बन गया था। दमन के समुद्री तट और सिलवासा के घने जंगलों ने हमेशा से रचनाकारों को प्रेरित किया है। 'काव्य रसिक संस्थान' का यह आयोजन उस ऐतिहासिक कड़ी को आधुनिक काल से जोड़ता है। जिस तरह पुराने समय में 'विला दे पाको' कलात्मक चर्चाओं का केंद्र हुआ करता था, आज सिलवासा का कला केंद्र उसी परंपरा को पर्यावरण रक्षा के साथ आगे बढ़ा रहा है। 22 राज्यों के कवियों का यहाँ जुटना यह साबित करता है कि सिलवासा अब केवल एक औद्योगिक केंद्र नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक राजधानी बनने की ओर अग्रसर है।
अभिनव अंदाज और मंत्रमुग्ध श्रोता
कार्यक्रम का संचालन डॉ. राजेश कुमार पाण्डेय 'सहज', अभिनंदन अष्टगे और श्रीमती तोरल ने अपने बेहतरीन अंदाज में किया। मंच पर डॉ. अनिता कुमार, निवेदिता वर्मा 'मेघा', और राकेश कुमार अयोध्या जैसी हस्तियों ने अपनी प्रस्तुतियों से ऊर्जा का संचार किया। स्थानीय साहित्यकारों जैसे कल्पेश सोलंकी, मृदुला तिवारी, और डॉ. वीरेंद्र सोलंकी की कविताओं ने स्थानीय मिट्टी की खुशबू बिखेरी। अंत में डॉ. मीना सुरेश जैन 'सुमीता' ने सभी कलमकारों और श्रोताओं का आभार प्रकट करते हुए इस अभियान को घर-घर तक पहुँचाने का वादा किया।
शब्दों से सजेगा सुरक्षित कल
सिलवासा की धरती पर हुआ यह समागम इस बात का प्रमाण है कि जब कलम जल संरक्षण के लिए उठती है, तो वह पूरे समाज के लिए वरदान बन जाती है।
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