Jharkhand Financial Alert: 1490 करोड़ रुपये बैंकों में बेवारिस, 38 लाख खातों का पैसा जल्द RBI को होगा हस्तांतरित
झारखंड में 1490 करोड़ रुपये 38 लाख से अधिक खातों में 10 साल से दावा रहित पड़े हैं! SBI और BOI में सबसे ज्यादा पैसा। भारतीय रिजर्व बैंक जल्द ही इन बेवारिस पैसों को अपने पास लेगा।
जमशेदपुर, 1 दिसंबर 2025 – झारखंड के बैंकों में जमा एक विशाल धनराशि को लेकर एक चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। राज्य के विभिन्न बैंकों में कुल 1,490 करोड़ रुपये पिछले दस वर्षों से बिना दावेदार पड़े हुए हैं। यह बड़ी रकम 38,14,579 से अधिक खातों से जुड़ी है, जिनमें एक दशक से कोई लेनदेन नहीं हुआ।
यह सिर्फ एक वित्तीय आंकड़ा नहीं है, बल्कि यह उन लाखों परिवारों के लिए एक महत्वपूर्ण संदेश है जिन्होंने किसी कारणवश अपने परिजनों के वित्तीय मामलों की जानकारी साझा नहीं की। यह स्थिति समाज में वित्तीय साक्षरता की कमी को भी दर्शाती है।
इन दो बैंकों में जमा है सबसे ज्यादा बेवारिस पैसा
बैंकिंग नियमों के तहत, 10 वर्षों से निष्क्रिय खातों को ‘दावा रहित’ घोषित कर दिया जाता है और इसकी सूचना भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) को भेजी जाती है। झारखंड में इस रकम का बड़ा हिस्सा कुछ प्रमुख बैंकों में जमा है:
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स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (एसबीआई): सबसे ज्यादा 530 करोड़ रुपये एसबीआई के निष्क्रिय खातों में जमा हैं।
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बैंक ऑफ इंडिया (बीओआई): दूसरे स्थान पर बैंक ऑफ इंडिया है, जिसके खातों में 408 करोड़ रुपये बिना दावेदार पड़े हुए हैं।
इनके अलावा, झारखंड राज्य ग्रामीण बैंक (105 करोड़), इंडियन बैंक (103 करोड़) और पंजाब एंड सिंध बैंक (122 करोड़) में भी बड़ी मात्रा में राशि जमा है। केनरा बैंक में 89 करोड़, बैंक ऑफ बड़ौदा में 50 करोड़, और इंडियन ओवरसीज बैंक में 25 करोड़ सहित अन्य बैंकों में भी करोड़ों की राशि जमा है।
क्यों बेवारिस पड़ी है इतनी बड़ी रकम?
विशेषज्ञों का मानना है कि इस समस्या का सबसे बड़ा कारण पारिवारिक वित्तीय जानकारी का अभाव है। कई खाताधारकों ने अपनी जमा राशि या सावधि जमा (फिक्स्ड डिपॉजिट) की जानकारी अपने परिजनों से साझा नहीं की। इसमें बचत खातों के साथ-साथ बड़ी संख्या में सावधि जमा भी शामिल हैं। खासकर बुजुर्गों के निधन के बाद, उनके परिवारों को इन खातों के बारे में पता नहीं चलता।
राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति (एसएलबीसी) झारखंड के उप महाप्रबंधक संतोष कुमार सिन्हा के अनुसार, पिछले 10 वर्षों से इन राशियों पर किसी ने दावा नहीं किया है। नियमानुसार बैंक जल्द ही यह राशि भारतीय रिजर्व बैंक को हस्तांतरित करेंगे।
आपका पैसा ढूंढने का तरीका
भारतीय रिजर्व बैंक के निर्देशानुसार, बैंक ऐसे असंचालित खातों की सूचना केंद्रीय बैंक को भेजते हैं, ताकि खाताधारकों या उनके कानूनी उत्तराधिकारियों तक पहुंचाने के लिए ‘उद्गम/उदयन’ जैसे पोर्टल का उपयोग किया जा सके। यह पोर्टल लोगों को दावा रहित जमा राशि का पता लगाने में मदद करता है।
विशेषज्ञों ने सलाह दी है कि प्रत्येक परिवार को अपनी बैंक खातों और वित्तीय जानकारियों की एक विस्तृत सूची बनाकर एक सुरक्षित स्थान पर रखनी चाहिए और इसे परिजनों के साथ साझा करना चाहिए, ताकि भविष्य में इस तरह की बड़ी रकम बेवारिस होने से बच सके।
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