Jharkhand Encounter: पश्चिमी सिंहभूम में सुरक्षाबलों की बड़ी कार्रवाई, माओवादी ढेर – भारी हथियार बरामद
झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम में सुरक्षाबलों और माओवादियों के बीच मुठभेड़ में एक माओवादी मारा गया। भारी मात्रा में हथियार बरामद, इलाके में सर्च ऑपरेशन और नाकेबंदी जारी।
झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम जिले में बुधवार सुबह हुई मुठभेड़ ने एक बार फिर साबित कर दिया कि सुरक्षाबलों का नक्सलियों के खिलाफ ऑपरेशन पूरी मजबूती से जारी है। गोइलकोरा थाना क्षेत्र के सौता इलाका में हुई इस भिड़ंत में सीपीआई (माओवादी) संगठन का एक सक्रिय सदस्य ढेर हो गया। मौके से भारी मात्रा में हथियार बरामद किए गए हैं और इलाके में सर्च ऑपरेशन अभी भी जारी है।
ऑपरेशन की शुरुआत कैसे हुई?
पुलिस और कोबरा 209 बटालियन को खुफिया सूचना मिली थी कि इलाके में माओवादी छिपे हुए हैं और उन्होंने गोला-बारूद व हथियार जंगल में छिपा रखे हैं। 7 अगस्त से ही यहां विशेष सर्च अभियान चलाया जा रहा था। स्वतंत्रता दिवस के दौरान किसी बड़ी घटना को अंजाम देने की माओवादियों की योजना की आशंका ने सुरक्षाबलों को पहले से ही अलर्ट कर रखा था।
सुबह-सुबह जंगल में गूंजे गोलियों के स्वर
बुधवार की सुबह तलाशी अभियान के दौरान सुरक्षाबलों और माओवादियों का आमना-सामना हो गया। कोल्हान के आईजीपी मनोज कौशिक के मुताबिक, मुठभेड़ के दौरान दोनों ओर से गोलियां चलीं। इसमें माओवादी संगठन का एक सदस्य मारा गया।
मारे गए माओवादी की पहचान
पुलिस ने पुष्टि की है कि मारा गया माओवादी सीपीआई (माओवादी) संगठन से जुड़ा हुआ था और इलाके में सक्रिय रूप से नक्सली गतिविधियों को अंजाम दे रहा था। फिलहाल उसकी पूरी पहचान और आपराधिक इतिहास खंगाला जा रहा है।
बरामद हुए हथियार
मुठभेड़ के बाद तलाशी में सुरक्षाबलों को आधुनिक हथियार, गोला-बारूद और अन्य नक्सली सामग्री मिली। पुलिस का मानना है कि ये हथियार स्वतंत्रता दिवस से पहले किसी बड़ी वारदात के लिए इकट्ठा किए गए थे।
नाकेबंदी और सुरक्षा कड़ी
मुठभेड़ के तुरंत बाद सुरक्षाबलों ने पूरे इलाके में नाकेबंदी कर दी और जंगलों में छिपे अन्य माओवादियों की तलाश तेज कर दी। आसपास के गांवों में भी पुलिस की गतिविधि बढ़ा दी गई है ताकि माओवादी भागने में सफल न हो सकें।
झारखंड में माओवाद विरोधी अभियान का इतिहास
पश्चिमी सिंहभूम, सरायकेला-खरसावां और खूंटी जैसे जिलों में नक्सलियों और सुरक्षाबलों के बीच लंबे समय से संघर्ष चलता आ रहा है। यह इलाका घने जंगलों और पहाड़ी भूभाग के कारण नक्सलियों के लिए सुरक्षित पनाहगाह माना जाता है। पिछले एक दशक में यहां कई बड़े एनकाउंटर हुए हैं, जिनमें दर्जनों माओवादी मारे गए और भारी मात्रा में हथियार बरामद किए गए।
स्थानीय लोगों में राहत की सांस
मुठभेड़ की खबर फैलते ही स्थानीय ग्रामीणों ने राहत की सांस ली। उनका कहना है कि लंबे समय से इलाके में नक्सली गतिविधियों के कारण वे भय के साये में जी रहे थे। अब उम्मीद है कि सुरक्षा बलों की सख्ती से स्थिति में सुधार होगा।
माओवाद पर वार जारी
पश्चिमी सिंहभूम का यह ऑपरेशन इस बात का सबूत है कि झारखंड पुलिस और केंद्रीय बल माओवादियों को खत्म करने के अपने अभियान में पीछे नहीं हटने वाले। सवाल सिर्फ इतना है कि क्या आने वाले दिनों में यह इलाका पूरी तरह नक्सलमुक्त हो पाएगा, या फिर माओवादी किसी नए षड्यंत्र के साथ लौटेंगे?
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