Jamshedpur Medical: ऑपरेशन के बाद बुजुर्ग की मौत पर कोहराम, पैसे लेने और लापरवाही का गंभीर आरोप

जमशेदपुर के टीएमएच अस्पताल में 78 वर्षीय बुजुर्ग की मौत के बाद परिजनों ने इलाज में लापरवाही का आरोप लगाते हुए जमकर हंगामा किया। ऑपरेशन के नाम पर दबाव और मौत के रहस्यमयी कारणों की पूरी इनसाइड रिपोर्ट यहाँ देखें।

May 8, 2026 - 13:42
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Jamshedpur Medical: ऑपरेशन के बाद बुजुर्ग की मौत पर कोहराम, पैसे लेने और लापरवाही का गंभीर आरोप
Jamshedpur Medical: ऑपरेशन के बाद बुजुर्ग की मौत पर कोहराम, पैसे लेने और लापरवाही का गंभीर आरोप

जमशेदपुर/झारखंड, 08 मई 2026 – लौहनगरी जमशेदपुर के प्रतिष्ठित टाटा मुख्य अस्पताल (TMH) में गुरुवार की शाम उस वक्त चीख-पुकार मच गई, जब बारीडीह निवासी 78 वर्षीय तारकनाथ शर्मा की इलाज के दौरान मौत हो गई। परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन पर केवल पैसे ऐंठने और इलाज में घोर लापरवाही बरतने का आरोप लगाया है। घटना के बाद अस्पताल परिसर में घंटों तक हाई-वोल्टेज ड्रामा चला, जिसे शांत कराने के लिए अंततः पुलिस को हस्तक्षेप करना पड़ा।

हादसे की दास्तां: "ऑपरेशन का दबाव और फिर खामोशी"

मृतक के पुत्र वीरेंद्र शर्मा ने अस्पताल की कार्यशैली पर कई कड़े सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने बताया कि उनके पिता को 4 मई को सीने में दर्द की शिकायत के बाद भर्ती कराया गया था।

  • मजबूरी का फायदा: वीरेंद्र का आरोप है कि परिवार आर्थिक रूप से कमजोर था और वे दवाओं से इलाज चाहते थे, लेकिन अस्पताल ने बेहतर स्वास्थ्य का झांसा देकर ऑपरेशन के लिए दबाव बनाया।

  • 41 हजार का खेल: परिजनों के अनुसार, अस्पताल ने कहा कि 41 हजार रुपये जमा करने के बाद मरीज पूरी तरह स्वस्थ होकर घर जाएगा। कर्ज और मजबूरी के बीच परिवार ने गुरुवार सुबह पैसे जमा किए।

  • ऑपरेशन और अचानक मौत: शाम को ऑपरेशन थिएटर से निकलने के कुछ ही देर बाद जैसे ही उन्हें सामान्य वार्ड में शिफ्ट किया गया, तारकनाथ शर्मा की तबीयत बिगड़ने लगी और उनकी मौत हो गई।

अस्पताल में हंगामा: पुलिस के साये में शव

मौत की खबर मिलते ही परिजनों का धैर्य जवाब दे गया। डॉक्टरों द्वारा मौत का स्पष्ट कारण न बताए जाने पर लोगों ने अस्पताल में हंगामा शुरू कर दिया।

  1. मैनेजमेंट का बचाव: टीएमएच प्रबंधन ने सभी आरोपों को सिरे से खारिज किया है। उनका कहना है कि ऑपरेशन सफल था, लेकिन अचानक आए गंभीर हार्ट अटैक के कारण मरीज को बचाया नहीं जा सका।

  2. खाकी का पहरा: स्थिति बिगड़ती देख बिष्टुपुर पुलिस मौके पर पहुँची और आक्रोशित भीड़ को समझा-बुझाकर मामला शांत कराया।

सवालों के घेरे में 'सफेद कोट'

तारकनाथ शर्मा की मौत ने एक बार फिर निजी अस्पतालों की 'काउंसलिंग' प्रक्रिया पर सवाल उठा दिए हैं।

  • पारदर्शिता की कमी: परिजनों का सबसे बड़ा दर्द यह है कि अगर स्थिति नाजुक थी, तो उन्हें स्वस्थ होने की गारंटी क्यों दी गई?

  • जिम्मेदारी कौन लेगा: क्या 41 हजार रुपये की रसीद के साथ मरीज की जान की कीमत भी तय होती है? प्रशासन अब मेडिकल बोर्ड से जांच की मांग पर विचार कर रहा है।

 जमशेदपुर के टीएमएच में हुई यह घटना एक परिवार के मुखिया के खोने का गम ही नहीं, बल्कि सिस्टम के प्रति उनके टूटते विश्वास की कहानी है। अस्पताल भले ही इसे 'नेचुरल डेथ' कह रहा हो, लेकिन वीरेंद्र शर्मा के आंसू कुछ और ही बयां कर रहे हैं। इस मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए ताकि यह स्पष्ट हो सके कि यह वाकई कुदरत का फैसला था या फिर 'मेडिकल माफिया' की साजिश। फिलहाल, शहर के सबसे बड़े अस्पताल के बाहर छाई खामोशी कई अनसुलझे सवालों को जन्म दे रही है।

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Manish Tamsoy मनीष तामसोय कॉमर्स में मास्टर डिग्री कर रहे हैं और खेलों के प्रति गहरी रुचि रखते हैं। क्रिकेट, फुटबॉल और शतरंज जैसे खेलों में उनकी गहरी समझ और विश्लेषणात्मक क्षमता उन्हें एक कुशल खेल विश्लेषक बनाती है। इसके अलावा, मनीष वीडियो एडिटिंग में भी एक्सपर्ट हैं। उनका क्रिएटिव अप्रोच और टेक्निकल नॉलेज उन्हें खेल विश्लेषण से जुड़े वीडियो कंटेंट को आकर्षक और प्रभावी बनाने में मदद करता है। खेलों की दुनिया में हो रहे नए बदलावों और रोमांचक मुकाबलों पर उनकी गहरी पकड़ उन्हें एक बेहतरीन कंटेंट क्रिएटर और पत्रकार के रूप में स्थापित करती है।