Jamshedpur Accident : ऊंचाई से गिरा मजदूर, सुरक्षा दावों की खुली पोल
जमशेदपुर के टेल्को में टाटा मोटर्स के प्रोजेक्ट पर हुआ वो खौफनाक हादसा जिसे सुनकर आपका दिल दहल जाएगा। सुरक्षा मानकों की अनदेखी और टिनप्लेट अस्पताल ले जाने की वो जिद जिसने एक मजदूर की जान ले ली। इस लापरवाही की पूरी सच्चाई यहाँ जानें, कहीं अगली बारी आपकी न हो!
जमशेदपुर : लौहनगरी के टेल्को कॉलोनी क्षेत्र में एक ऐसी घटना घटी है जिसने औद्योगिक सुरक्षा के दावों पर कालिख पोत दी है। टाटा मोटर्स के लिए टाटा स्टील UISL (जुस्को) द्वारा कराए जा रहे निर्माण कार्य के दौरान एक मजदूर की ऊंचाई से गिरकर मौत हो गई। यह सिर्फ एक दुर्घटना नहीं, बल्कि उन हजारों ठेका मजदूरों की सुरक्षा पर बड़ा तमाचा है जो हर दिन अपनी जान हथेली पर रखकर काम करते हैं।
खरसावां का लाल, टेल्को में 'कत्ल'?
मृतक की पहचान सरायकेला-खरसावां जिले के खरसावां निवासी मानकी गोप के रूप में हुई है। जानकारी के मुताबिक, टेल्को कॉलोनी के N-49 स्थित एक निर्माणाधीन बिल्डिंग में मानकी गोप काम कर रहे थे। अचानक पैर फिसलने या संतुलन बिगड़ने के कारण वे सीधे जमीन पर आ गिरे। प्रत्यक्षदर्शियों की मानें तो मौके पर सुरक्षा के न्यूनतम इंतजाम भी गायब थे। न तो कोई सेफ्टी नेट था और न ही ऊंचाई पर काम करने के लिए जरूरी बेल्ट का सही इस्तेमाल सुनिश्चित किया गया था।
जमशेदपुर का औद्योगिक इतिहास और सुरक्षा की धुंधली होती तस्वीर
जमशेदपुर, जिसे देश की पहली नियोजित औद्योगिक नगरी होने का गौरव प्राप्त है, वहां की नींव में मजदूरों का पसीना और त्याग छिपा है। 1907 में जब टाटा स्टील की शुरुआत हुई थी, तब से लेकर आज तक 'Safety First' का नारा बुलंद किया जाता रहा है। टाटा मोटर्स (तत्कालीन टेलको) का इतिहास गवाह है कि यहाँ अनुशासन और सुरक्षा को धर्म माना जाता था। लेकिन हाल के वर्षों में ठेका प्रथा (Contractual System) के बढ़ते चलन ने इस सुनहरे इतिहास को धुंधला कर दिया है। टाटा स्टील UISL जैसी प्रतिष्ठित संस्था के प्रोजेक्ट में ऐसी लापरवाही होना पूरे सिस्टम पर सवाल खड़ा करती है।
अस्पताल के चक्कर में 'खेल'?
इस पूरे मामले में सबसे विवादित मोड़ तब आया जब घायल मानकी गोप को प्राथमिक उपचार के लिए टाटा मोटर्स अस्पताल ले जाने के बजाय टिनप्लेट अस्पताल ले जाया गया। स्थानीय लोगों और परिजनों में इस बात को लेकर भारी आक्रोश है।
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सवाल यह है कि: जब हादसा टाटा मोटर्स के प्रोजेक्ट पर हुआ, तो मजदूर को पास के सुसज्जित टाटा मोटर्स अस्पताल क्यों नहीं ले जाया गया?
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क्या कंपनी अपनी लायबिलिटी (जवाबदेही) से बचने के लिए मरीज को दूर के अस्पताल भेजकर समय बर्बाद कर रही थी?
टिनप्लेट अस्पताल से प्राथमिक उपचार के बाद उन्हें आनन-फानन में MGM अस्पताल रेफर किया गया, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। वहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।
परिजनों का फूटा गुस्सा, पुलिस की सुस्त जांच
हादसे की खबर जैसे ही खरसावां पहुँची, मानकी के परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह 'मौत' नहीं बल्कि 'लापरवाही' का नतीजा है। टाटा स्टील UISL और संबंधित ठेकेदार के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग उठ रही है। टेल्को थाना पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर जांच शुरू कर दी है, लेकिन सवाल वही है—क्या मानकी गोप को इंसाफ मिलेगा? या फिर फाइलों के ढेर में यह मामला भी दबकर रह जाएगा?
सावधानी ही एकमात्र बचाव
यह घटना हर उस मजदूर और साइट इंजीनियर के लिए चेतावनी है जो सुरक्षा मानकों को "बोझ" समझते हैं। जमशेदपुर जैसे शहर में, जहाँ सुरक्षा के बड़े-बड़े सेमिनार होते हैं, वहां जमीन पर एक मजदूर की जान की कीमत इतनी सस्ती नहीं होनी चाहिए।
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