MGM Chaos: जमशेदपुर के एमजीएम अस्पताल में खूनी संघर्ष के बाद भारी हंगामा, सिर पर आए 15 टांके, समर्थकों की भीड़ ने इमरजेंसी वार्ड में मचाया बवाल
जमशेदपुर के एमजीएम अस्पताल में विधायक प्रतिनिधि के बेटे और विपक्षी गुट के बीच हुई हिंसक झड़प और उसके बाद हुए भारी हंगामे की पूरी रिपोर्ट यहाँ मौजूद है। इमरजेंसी वार्ड में मची भगदड़ और पत्रकार के साथ हुई बदसलूकी का पूरा विवरण विस्तार से पढ़िए वरना आप शहर की इस सबसे बड़ी आपराधिक हलचल से चूक जाएंगे।
जमशेदपुर, 2 फरवरी 2026 – लौहनगरी के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल, एमजीएम (MGM) में सोमवार को उस वक्त युद्ध का मैदान जैसा नजारा बन गया जब दो गुटों के बीच शुरू हुआ विवाद अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड तक पहुँच गया। राजनीतिक रसूख और आपसी रंजिश के इस मेल ने अस्पताल परिसर को छावनी में तब्दील कर दिया। जदयू समर्थकों के हंगामे के कारण इलाज करा रहे मरीजों और उनके तीमारदारों के बीच भगदड़ मच गई। स्थिति इतनी गंभीर थी कि कुछ समय के लिए डॉक्टरों को इलाज रोकना पड़ा, जिससे इमरजेंसी में भर्ती गंभीर मरीजों की जान पर बन आई।
15 टांके और रसूख की जंग: क्या है पूरा मामला?
विवाद की जड़ में दो रसूखदार परिवारों के युवाओं के बीच हुई मारपीट है:
-
विवाद की शुरुआत: आरोप है कि विधायक प्रतिनिधि पप्पू सिंह के बेटे अभिजीत सिंह और अंबिका पांडेय के भतीजे देव पांडेय के बीच किसी बात को लेकर तीखी बहस हुई, जो देखते ही देखते खूनी संघर्ष में बदल गई।
-
गंभीर चोटें: इस मारपीट में देव पांडेय बुरी तरह घायल हो गया। उसे आनन-फानन में एमजीएम अस्पताल लाया गया, जहाँ डॉक्टरों ने उसके सिर पर 15 टांके लगाए।
-
जवाबी हमला: दूसरी ओर, अभिजीत सिंह को भी चोटें आने की खबर है, जिसके बाद दोनों पक्षों के समर्थक अस्पताल में जुटने लगे।
अस्पताल में तांडव: पत्रकार से बदसलूकी और मोबाइल छीना
जैसे ही विधायक प्रतिनिधि पप्पू सिंह अपने समर्थकों के साथ अस्पताल पहुँचे, माहौल और अधिक तनावपूर्ण हो गया। समर्थकों ने इमरजेंसी वार्ड के सामने जमकर नारेबाजी और हंगामा किया।
-
भगदड़ की स्थिति: हंगामे के दौरान मरीजों के परिजनों में दहशत फैल गई। लोग अपने बीमार रिश्तेदारों को सुरक्षित स्थानों पर ले जाने के लिए इधर-उधर भागने लगे।
-
मीडिया पर हमला: घटना को कवर कर रहे एक स्थानीय पत्रकार के साथ भी समर्थकों ने धक्का-मुक्की की। आरोप है कि सच दबाने की कोशिश में पत्रकार का मोबाइल फोन जबरन छीन लिया गया, जिससे शहर के मीडिया जगत में भारी आक्रोश है।
-
सुरक्षा पर सवाल: अस्पताल प्रशासन ने इस घटना पर गहरी चिंता जताते हुए कहा है कि इस तरह के हंगामे से गंभीर मरीजों की जान को खतरा हो सकता है।
एमजीएम अस्पताल हंगामा: मुख्य बिंदु (Incident Highlights)
| विवरण | प्रमुख जानकारी (Key Details) |
| मुख्य पक्ष | अभिजीत सिंह (पुत्र पप्पू सिंह) vs देव पांडेय |
| चोट की स्थिति | देव पांडेय के सिर पर 15 टांके |
| हंगामे की जगह | इमरजेंसी वार्ड, एमजीएम अस्पताल |
| मीडिया का मामला | पत्रकार के साथ मारपीट और मोबाइल की लूट |
| प्रशासनिक स्थिति | सुरक्षा व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल |
मरीजों की सुरक्षा भगवान भरोसे?
अस्पताल के भीतर इस तरह की हाथापाई और मोबाइल छीनने जैसी घटनाएं सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोलती हैं। प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि अगर पुलिस समय रहते सख्ती नहीं दिखाती, तो यह विवाद और बड़ा रूप ले सकता था। फिलहाल, पुलिस सीसीटीवी फुटेज खंगाल रही है और पत्रकार के साथ हुई बदसलूकी के मामले में अलग से जांच की जा रही है।
कानून के राज पर रसूख का प्रहार
एमजीएम अस्पताल में हुआ यह हंगामा शहर के सभ्य समाज के लिए एक काला धब्बा है। जहाँ लोगों को इलाज की उम्मीद होती है, वहां खूनी संघर्ष और भगदड़ होना प्रशासन की विफलता को दर्शाता है। क्या आरोपी राजनीतिक रसूख के कारण बच निकलेंगे या पुलिस सख्त कार्रवाई करेगी?
What's Your Reaction?


