Ulidih Tragedy: जमशेदपुर के मानगो में 20 वर्षीय हिमांसी ने लगाया मौत को गले, पंजाब से आई थी चचेरी बहन की शादी में, पसरा मातम
जमशेदपुर के उलीडीह आदर्शनगर में पंजाब से आई 20 वर्षीय युवती हिमांसी कौर ने फांसी लगाकर अपनी जान दे दी है। माता-पिता को पहले ही खो चुकी हिमांसी के इस आत्मघाती कदम ने पूरे मानगो इलाके को झकझोर कर रख दिया है। इस दुखद घटना के पीछे छिपे अनसुलझे कारणों की पूरी रिपोर्ट यहाँ देखें।
जमशेदपुर/मानगो, 23 मार्च 2026 – लौहनगरी के उलीडीह थाना क्षेत्र अंतर्गत आदर्शनगर इलाके में रविवार की शाम एक ऐसी खबर आई जिसने हर किसी की आंखें नम कर दीं। पंजाब से अपने भाई के साथ जमशेदपुर आई 20 वर्षीय हिमांसी कौर ने अज्ञात कारणों से फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। खुशियों के माहौल में आई यह मौत किसी गहरे राज की ओर इशारा कर रही है, क्योंकि हिमांसी अपनी चचेरी बहन की शादी में शामिल होने आई थी और फिलहाल मानगो में ही रह रही थी। घटना के बाद से परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है और पूरे आदर्शनगर में सन्नाटा पसरा हुआ है। पुलिस ने शव को कब्जे में ले लिया है, लेकिन सवाल अभी भी बरकरार है कि आखिर इतनी कम उम्र में उसने यह कदम क्यों उठाया?
सूने घर में खौफनाक अंत: चचेरी बहन के घर मिली लाश
हादसे के वक्त हिमांसी घर में बिल्कुल अकेली थी, जिसका फायदा उठाकर उसने मौत को गले लगा लिया।
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परिजनों का सदमा: जब घर के लोग वापस लौटे, तो हिमांसी को फंदे से झूलता देख उनके पैरों तले जमीन खिसक गई। आनन-फानन में पुलिस को सूचना दी गई।
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अस्पताल में जवाब: उलीडीह पुलिस की मदद से युवती को नीचे उतारा गया और तुरंत एमजीएम (MGM) अस्पताल ले जाया गया। हालांकि, डॉक्टरों ने जांच के बाद उसे मृत घोषित कर दिया।
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पंजाब से जमशेदपुर का सफर: हिमांसी और उसका भाई हाल ही में पंजाब से जमशेदपुर आए थे। अपनी चचेरी बहन की शादी की रस्मों के बाद वे यहीं रुक गए थे, पर किसी ने नहीं सोचा था कि यह सफर आखिरी साबित होगा।
अनाथ भाई-बहन और संघर्ष की दास्तां: क्या था मानसिक तनाव?
इस घटना के पीछे एक दर्दनाक पारिवारिक पृष्ठभूमि सामने आई है जो हिमांसी के मानसिक संघर्ष की गवाही दे रही है।
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माता-पिता का साया नहीं: पुलिस जांच में पता चला है कि हिमांसी और उसके भाई के माता-पिता का पहले ही निधन हो चुका है। अनाथ होने के बाद दोनों भाई-बहन अपने रिश्तेदारों के सहारे जीवन व्यतीत कर रहे थे।
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शादी की खुशियां और गम: बहन की शादी के बाद मानगो में चचेरी बहन के साथ रहना हिमांसी के लिए एक नई शुरुआत जैसा था, लेकिन माता-पिता को खोने का दुख और भविष्य की चिंता शायद उसके मन पर भारी पड़ रही थी।
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खामोश मौत: पड़ोसियों के अनुसार, हिमांसी स्वभाव से काफी शांत थी और किसी को अंदेशा नहीं था कि उसके भीतर कोई तूफान चल रहा है।
मानगो-उलीडीह का इतिहास और बढ़ते सुसाइड केस
जमशेदपुर का मानगो और उलीडीह इलाका पिछले कुछ समय से युवाओं में बढ़ती 'सुसाइडल टेंडेंसी' (आत्मघाती प्रवृत्ति) को लेकर चर्चा में रहा है।
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अकेलापन और तनाव: मनोवैज्ञानिकों का मानना है कि जो बच्चे छोटी उम्र में माता-पिता को खो देते हैं, वे अक्सर 'पोस्ट-ट्रॉमेटिक स्ट्रेस' (PTSD) का शिकार होते हैं। हिमांसी के मामले में भी पुलिस इसी पहलू पर गौर कर रही है।
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पुलिस की तफ्तीश: उलीडीह थाना पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि वे परिवार की लिखित शिकायत का इंतजार कर रहे हैं ताकि जांच की दिशा तय की जा सके।
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मोबाइल और डायरी की जांच: पुलिस हिमांसी के मोबाइल कॉल डिटेल्स और उसकी डायरी खंगालने की योजना बना रही है ताकि यह पता चल सके कि क्या वह किसी निजी परेशानी या किसी के दबाव में थी।
अगला कदम: पोस्टमार्टम रिपोर्ट और परिजनों से पूछताछ
फिलहाल पुलिस ने 'यूडी केस' (अस्वाभाविक मौत) दर्ज कर लिया है और कानूनी प्रक्रिया को आगे बढ़ा रही है।
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भाई का बयान: हिमांसी के भाई से पूछताछ की जा रही है ताकि घर के भीतर के माहौल और हिमांसी के व्यवहार में आए हालिया बदलावों को समझा जा सके।
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कानूनी कार्रवाई: पुलिस को आशंका है कि माता-पिता के निधन के बाद संपत्ति या भविष्य को लेकर कोई पारिवारिक विवाद भी तनाव का कारण हो सकता है, हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
जमशेदपुर में हिमांसी कौर की मौत केवल एक पुलिस केस नहीं है, बल्कि यह उन युवाओं की कहानी है जो बिना माता-पिता के सहारे समाज में संघर्ष कर रहे हैं। 20 साल की उम्र, जिसमें सपने देखे जाते हैं, वहां हिमांसी ने मौत को चुन लिया। उलीडीह पुलिस के लिए अब यह गुत्थी सुलझाना चुनौतीपूर्ण है कि क्या यह केवल मानसिक तनाव था या इसके पीछे कोई और बड़ी वजह छिपी है। फिलहाल, एमजीएम अस्पताल के मुर्दाघर में पड़ी हिमांसी की लाश व्यवस्था और समाज से कई अनुत्तरित सवाल पूछ रही है।
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