Potka Crash : 17 अप्रैल को होने वाली थी शादी, पर पोटका में तेज रफ्तार ट्रक बना काल, टेंपो ड्राइवर चंडी की दर्दनाक मौत
पूर्वी सिंहभूम के पोटका में हाता-चाईबासा मार्ग पर भीषण सड़क हादसे में टेंपो ड्राइवर चंडी नंदी की मौत हो गई है। अगले महीने सोनारी में उसकी शादी होने वाली थी, लेकिन रितिका होटल के पास हुए इस एक्सीडेंट ने खुशियों को मातम में बदल दिया। टीएमएच में दम तोड़ने वाले युवक की इस पूरी रिपोर्ट यहाँ देखें।
पोटका/हाता, 23 मार्च 2026 – पूर्वी सिंहभूम जिले के पोटका थाना क्षेत्र में खुशियां मातम में बदल गई हैं। हाता-चाईबासा मुख्य मार्ग पर सोमवार को एक बेकाबू ट्रक ने मालवाहक टेंपो को इतनी जोरदार टक्कर मारी कि पूरे इलाके में सनसनी फैल गई। इस भीषण हादसे में टेंपो चालक चंडी नंदी उर्फ डोमा की इलाज के दौरान टीएमएच (TMH) में मौत हो गई। यह घटना महज एक सड़क दुर्घटना नहीं, बल्कि एक उजड़ते हुए परिवार की दास्तां है। चंडी के घर में शादी की तैयारियां चल रही थीं और 17 अप्रैल को उसे सेहरा सजाना था, लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था। इस खबर के बाद न केवल चंडी के घर बल्कि जमशेदपुर के सोनारी स्थित उसके ससुराल में भी मातम पसरा हुआ है।
हाता-चाईबासा रोड पर तबाही: रितिका होटल के पास भिड़ंत
हादसा उस वक्त हुआ जब चंडी नंदी अपना मालवाहक टेंपो लेकर तिरिंग इलाके से गुजर रहा था।
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भीषण टक्कर: रितिका होटल के समीप एक तेज रफ्तार ट्रक ने सामने से आ रहे टेंपो को अपनी चपेट में ले लिया। टक्कर इतनी भयानक थी कि टेंपो के परखच्चे उड़ गए और लोहे का ढांचा पूरी तरह पिचक गया।
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खून से सनी सड़क: चंडी नंदी टेंपो के भीतर ही बुरी तरह फंस गया था। स्थानीय लोगों और पुलिस की मदद से उसे कड़ी मशक्कत के बाद बाहर निकाला गया।
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अस्पताल की दौड़: सूचना मिलते ही पोटका पुलिस मौके पर पहुँची और गंभीर रूप से घायल चंडी को तुरंत जमशेदपुर सदर अस्पताल (करनडीह) ले जाया गया। वहां प्राथमिक उपचार के बाद डॉक्टरों ने उसकी नाजुक हालत देखते हुए उसे टीएमएच (TMH) रेफर कर दिया, लेकिन उसे बचाया नहीं जा सका।
17 अप्रैल को आनी थी बारात: सोनारी में सन्नाटा
चंडी नंदी की मौत ने दो परिवारों के सपनों को एक पल में चकनाचूर कर दिया।
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शादी की रस्में: चंडी की शादी जमशेदपुर के सोनारी में तय हुई थी। घर में कार्ड बंटने शुरू हो चुके थे और खरीदारी की तैयारी चल रही थी।
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ससुराल में शोक: होने वाली पत्नी और ससुराल पक्ष के लोग इस खबर को सुनकर स्तब्ध हैं। जिस घर में बारात के स्वागत की बात हो रही थी, वहां अब केवल सिसकियां सुनाई दे रही हैं।
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इकलौता सहारा: चंडी अपने परिवार का मेहनती बेटा था जो टेंपो चलाकर आजीविका कमाता था। उसकी मौत ने पूरे गांव को झकझोर कर रख दिया है।
हाता-चाईबासा मार्ग का काला इतिहास और बेलगाम ट्रक
हाता-चाईबासा मुख्य मार्ग पिछले कई सालों से 'डेथ जोन' के रूप में अपनी पहचान बना चुका है।
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अंधाधुंध रफ्तार: इस रूट पर माइंस और औद्योगिक सामानों की ढुलाई करने वाले भारी ट्रक अक्सर तय गति सीमा का उल्लंघन करते हैं। रात के समय तिरिंग और हाता के बीच अंधेरा होने के कारण हादसे की संभावना दोगुनी हो जाती है।
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सड़क की बनावट: रितिका होटल के पास का यह मोड़ काफी खतरनाक माना जाता है, जहाँ पहले भी कई छोटे वाहन भारी ट्रकों की चपेट में आ चुके हैं।
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पुलिस की कार्रवाई: पोटका पुलिस ने दुर्घटनाग्रस्त ट्रक और टेंपो को जब्त कर लिया है। फरार ट्रक चालक की तलाश में छापेमारी की जा रही है। पुलिस अब ट्रक के मालिक का पता लगा रही है ताकि कानूनी प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जा सके।
अगला कदम: पोस्टमार्टम और मुआवजे की मांग
चंडी नंदी की मौत के बाद ग्रामीणों में आक्रोश है।
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मुआवजे की गुहार: चंडी के परिजनों और स्थानीय लोगों ने प्रशासन से उचित मुआवजे और ट्रक मालिक पर कड़ी कार्रवाई की मांग की है।
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सुरक्षा ऑडिट: स्थानीय निवासियों ने मांग की है कि हाता-चाईबासा रोड पर रितिका होटल जैसे डेंजर जोन में 'स्पीड ब्रेकर' और लाइटिंग की व्यवस्था की जाए।
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पोस्टमार्टम रिपोर्ट: टीएमएच में कानूनी कागजी कार्रवाई के बाद शव को पोस्टमार्टम के लिए एमजीएम भेजा जा रहा है।
पोटका में हुई यह घटना एक चेतावनी है कि हमारी सड़कों पर दौड़ते 'यमदूत' (ट्रक) किस तरह मासूम जिंदगियों और उनके सपनों को कुचल रहे हैं। चंडी नंदी की मौत केवल एक सड़क दुर्घटना नहीं, बल्कि एक ऐसी क्षति है जिसकी भरपाई कभी नहीं की जा सकती। सोनारी से लेकर पोटका तक आज हर कोई उस 17 अप्रैल को याद कर रहा है जो अब कभी नहीं आएगी। क्या प्रशासन इन बेलगाम ट्रकों पर लगाम लगाएगा या फिर किसी और 'चंडी' की बलि का इंतजार करेगा? फिलहाल, पूरे क्षेत्र में गमगीन माहौल है।
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