Gas Supply: किल्लत अफवाह, जमशेदपुर में रसोई गैस की भारी कमी का सच आया सामने, पैनिक बुकिंग से बिगड़ी व्यवस्था
जमशेदपुर में रसोई गैस की किल्लत की खबरें महज अफवाह हैं। परसुडीह नरेश गैस एजेंसी ने साफ किया है कि स्टॉक की कोई कमी नहीं है, बल्कि अचानक बढ़ी बुकिंग से सर्वर पर दबाव बढ़ा है। बुकिंग 300 से बढ़कर 900 तक पहुँच गई है। पूरी सच्चाई और बुकिंग के आसान तरीके यहाँ देखें।
जमशेदपुर/परसुडीह, 12 मार्च 2026 – लौहनगरी जमशेदपुर के कुछ इलाकों में पिछले कुछ दिनों से रसोई गैस की किल्लत को लेकर उड़ रही अफवाहों ने आम जनता के बीच खलबली मचा दी है। स्थिति यह है कि लोग डर के मारे खाली और आधे भरे सिलेंडरों को भी रिफिल कराने के लिए दौड़ रहे हैं। हालांकि, जमीनी हकीकत इन खबरों के बिल्कुल उलट है। गैस एजेंसियों ने स्पष्ट कर दिया है कि शहर में एलपीजी (LPG) की कोई कमी नहीं है, बल्कि अफवाहों के कारण उपजी 'पैनिक बुकिंग' ने पूरी सप्लाई चेन और बुकिंग सिस्टम पर अनावश्यक बोझ डाल दिया है।
300 से सीधा 900: बुकिंग में आया सुनामी जैसा उछाल
परसुडीह स्थित नरेश गैस एजेंसी के पदाधिकारी मनोज अग्रवाल ने इस संकट की असली वजह का खुलासा किया है। उनके अनुसार, समस्या गैस के स्टॉक में नहीं, बल्कि लोगों के व्यवहार में है।
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असामान्य डिमांड: सामान्य दिनों में जहाँ इस एजेंसी में प्रतिदिन औसतन 300 सिलेंडर की बुकिंग होती थी, वहीं अफवाहों के चलते अब यह आंकड़ा 900 के पार पहुँच गया है।
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जरूरत से ज्यादा स्टॉक: लोग डर के मारे उन सिलेंडरों की भी एडवांस बुकिंग कर रहे हैं जिनकी उन्हें अगले 15 दिनों तक जरूरत नहीं है। इसी 'होर्डिंग' (जमाखोरी) की प्रवृत्ति ने वितरण व्यवस्था को धीमा कर दिया है।
सर्वर 'बिजी' होने का असली कारण
अचानक से बढ़ी 30 गुना बुकिंग के कारण गैस कंपनियों के डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर दबाव बढ़ गया है। उपभोक्ताओं को बुकिंग करते समय रूट 'बिजी' मिलने या तकनीकी समस्या का सामना करना पड़ रहा है।
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24x7 सुविधा: एजेंसी का कहना है कि बुकिंग सिस्टम में कोई बदलाव नहीं हुआ है। उपभोक्ता आईवीआरएस (IVRS), मिस कॉल, एसएमएस, व्हाट्सएप और मोबाइल ऐप का उपयोग कर सकते हैं।
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स्मार्ट तरीका: यदि दिन में ट्रैफिक ज्यादा होने के कारण कॉल कनेक्ट नहीं हो रही है, तो उपभोक्ता रात के समय बुकिंग का प्रयास करें। सिस्टम 24 घंटे काम कर रहा है।
जब अफवाहों ने पहले भी बिगाड़ा है खेल
भारत में गैस सिलेंडर की किल्लत की अफवाहें नई नहीं हैं।
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अतीत की सीख: पहले भी कई बार ट्रांसपोर्ट स्ट्राइक या प्लांट में तकनीकी खराबी की झूठी खबरों ने बाजार में अफरा-तफरी पैदा की है। हर बार नतीजा यही निकला कि स्टॉक पर्याप्त था, लेकिन लोगों की घबराहट ने कृत्रिम कमी (Artificial Scarcity) पैदा कर दी।
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सुरक्षा जोखिम: घर में जरूरत से ज्यादा सिलेंडर भरकर रखना न केवल दूसरों का हक मारना है, बल्कि यह सुरक्षा के लिहाज से भी एक बड़ा खतरा (Fire Hazard) बन सकता है।
एजेंसी की अपील: ऑफिस में भीड़ न लगाएं
गैस एजेंसी के पदाधिकारियों ने उपभोक्ताओं से हाथ जोड़कर धैर्य बनाए रखने की अपील की है।
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होम डिलीवरी का भरोसा: पदाधिकारियों ने आश्वस्त किया है कि गैस का पर्याप्त स्टॉक मौजूद है और हर वैध बुकिंग की डिलीवरी उनके घर तक सुनिश्चित की जाएगी।
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अफवाहों से बचें: उपभोक्ताओं से अनुरोध है कि वे गोदाम या गैस दफ्तर में आकर भीड़ न बढ़ाएं। दफ्तर में भीड़ जुटने से स्टाफ का काम प्रभावित हो रहा है, जिससे डिलीवरी में और देरी हो रही है।
जमशेदपुर में गैस का संकट 'सप्लाई' का नहीं, बल्कि 'अफवाह' का है। प्रशासन और गैस एजेंसियां मिलकर स्थिति को सामान्य करने में जुटी हैं। यदि उपभोक्ता पैनिक बुकिंग बंद कर दें, तो 48 घंटों के भीतर वितरण व्यवस्था फिर से पटरी पर लौट आएगी। याद रखें, आपकी एक अनावश्यक बुकिंग किसी जरूरतमंद के घर का चूल्हा ठंडा कर सकती है।
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