Jamshedpur Tribute: भाजपा ने श्रद्धापूर्वक मनाई जयपाल सिंह मुंडा की जयंती – जानिए उनके संघर्ष की कहानी
जमशेदपुर में भाजपा अनुसूचित जनजाति मोर्चा ने महान आदिवासी नेता जयपाल सिंह मुंडा की जयंती पर उन्हें श्रद्धांजलि दी। जानिए उनके जीवन की प्रेरणादायक कहानी और झारखंड आंदोलन में उनके योगदान के बारे में।
जमशेदपुर, 4 जनवरी 2025: जमशेदपुर के साकची स्थित भाजपा जिला कार्यालय में भाजपा अनुसूचित जनजाति मोर्चा द्वारा महान आदिवासी नेता मरंग गोमके जयपाल सिंह मुंडा की 67वीं जयंती श्रद्धापूर्वक मनाई गई। इस अवसर पर भाजपा कार्यकर्ताओं और नेताओं ने उनकी प्रतिमा पर माल्यार्पण कर श्रद्धांजलि अर्पित की और उनके संघर्षपूर्ण जीवन को प्रेरणास्त्रोत बताते हुए याद किया।
कौन थे जयपाल सिंह मुंडा?
जयपाल सिंह मुंडा झारखंड के महान आदिवासी नेता और झारखंड आंदोलन के प्रथम अगुवा माने जाते हैं।
- जन्म: 3 जनवरी 1903
- उपलब्धियां:
- भारतीय हॉकी टीम के कप्तान (1928 ओलंपिक)
- झारखंड आंदोलन के प्रणेता
- आदिवासी समाज के सशक्तिकरण के लिए संघर्ष
उन्होंने भारत की संविधान सभा में आदिवासी अधिकारों की पुरजोर वकालत की थी और आदिवासी समाज को मुख्यधारा में लाने के लिए जीवनभर संघर्ष किया।
कार्यक्रम का आयोजन और मुख्य वक्तव्य
इस विशेष अवसर पर भाजपा अनुसूचित जनजाति मोर्चा के जमशेदपुर महानगर अध्यक्ष रमेश बास्के के नेतृत्व में कार्यक्रम आयोजित किया गया।
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मुख्य वक्ता: भाजपा जिला अध्यक्ष सुधांशु ओझा ने जयपाल सिंह के संघर्षों को याद करते हुए कहा, "जयपाल सिंह मुंडा ने आदिवासी समाज के हक और सम्मान के लिए पूरी जिंदगी संघर्ष किया। उनकी जीवन गाथा आज भी प्रेरणा का स्रोत है।"
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राष्ट्रीय कार्यसमिति सदस्य रमेश हांसदा ने कहा, "उनकी दूरदर्शिता और संघर्षशीलता ने आदिवासी समुदाय को संगठित करने में अहम भूमिका निभाई।"
कार्यक्रम में शामिल प्रमुख नेता
इस आयोजन में कई प्रमुख भाजपा नेता और कार्यकर्ता उपस्थित रहे:
- रमेश बास्के (जमशेदपुर महानगर अध्यक्ष)
- सुधांशु ओझा (जिला अध्यक्ष)
- रमेश हांसदा (राष्ट्रीय कार्यसमिति सदस्य)
- काजू सांडिल, राजू सरदार, राम सिंह मुंडा, दीपक सुंडी, संजय मुंडा, मनोज सरदार, विजय सोय, पवन सोलंकी, गणेश भूमिज, सुशील हेस्सा, प्रकाश सडिल, चुन्नू भूमिज, गणेश मुंडा
सभी ने एक स्वर में जयपाल सिंह मुंडा के आदर्शों और उनके योगदान को नमन किया।
जयपाल सिंह मुंडा का झारखंड आंदोलन में योगदान
जयपाल सिंह मुंडा ने झारखंड को एक अलग राज्य के रूप में स्थापित करने के लिए 1940 के दशक से आंदोलन की शुरुआत की।
- उन्होंने आदिवासी महासभा की स्थापना की।
- उनके नेतृत्व में झारखंड पार्टी का गठन हुआ।
- आदिवासी समाज के अधिकारों के लिए संविधान सभा में उन्होंने आवाज उठाई।
इतिहास से सीख और प्रेरणा
झारखंड आंदोलन और जयपाल सिंह मुंडा की कहानी आज भी न्याय, समानता और अधिकारों के लिए संघर्ष की मिसाल है।
- आदिवासी समाज को शिक्षा और रोजगार में मुख्यधारा से जोड़ने का प्रयास।
- उनके आदर्शों को युवा पीढ़ी तक पहुंचाना आवश्यक है।
भविष्य की योजनाएं और संकल्प
इस अवसर पर भाजपा नेताओं ने आदिवासी समाज के विकास के लिए शिक्षा और स्वास्थ्य को प्राथमिकता देने का संकल्प लिया।
- आदिवासी युवाओं के लिए विशेष शिक्षण कार्यक्रम।
- आदिवासी क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाओं का विस्तार।
जयपाल सिंह मुंडा का जीवन आदिवासी समाज के सशक्तिकरण और समानता की मिसाल है। उनकी जयंती पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करना केवल एक परंपरा नहीं, बल्कि संघर्ष और समर्पण को याद करने का अवसर है।
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