Jamshedpur Firing: पोपो मुंडा पर गोलियों की बौछार, आखिर क्यों चली दुश्मनी की आग?
जमशेदपुर में पोपो मुंडा पर हुई फायरिंग का पुलिस ने किया खुलासा। दो अपराधी गिरफ्तार, देशी पिस्तौल बरामद। जानें पूरी कहानी और रंजिश का इतिहास।
जमशेदपुर शहर, जिसे औद्योगिक नगरी और टाटा स्टील के लिए जाना जाता है, एक बार फिर अपराध की चपेट में आया है। 17 सितंबर की रात बागबेड़ा थाना क्षेत्र के गांधीनगर इलाके में गोलियों की गूंज सुनाई दी। निशाना थे पोपो मुंडा, जिन पर जानलेवा हमला किया गया। अब पुलिस ने इस सनसनीखेज मामले का खुलासा कर दिया है और दो अपराधियों को सलाखों के पीछे पहुंचा दिया है।
कौन हैं आरोपी और क्या मिला उनके पास से?
बागबेड़ा थाना पुलिस ने इस मामले में बादल समासी और कारण पत्र नामक दो युवकों को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने उनके पास से एक देशी पिस्तौल और एक मैगजीन बरामद किया है। सिटी एसपी कुमार शिवाशीष ने शुक्रवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर बताया कि यह हमला किसी आकस्मिक घटना का हिस्सा नहीं था, बल्कि लंबे समय से चल रही पुरानी रंजिश का नतीजा था।
कैसे सुलझी पुलिस की गुत्थी?
इस फायरिंग कांड की गंभीरता को देखते हुए जमशेदपुर एसएसपी ने तुरंत एक विशेष टीम गठित की। टीम का नेतृत्व डीएसपी लॉ एंड ऑर्डर को सौंपा गया। पुलिस ने तकनीकी जांच और मानवीय खुफिया इनपुट के आधार पर दोनों अपराधियों को पकड़ लिया। पूछताछ के बाद दोनों को न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया है।
पोपो मुंडा पर हमला क्यों?
पुलिस की मानें तो पोपो मुंडा और हमलावरों के बीच काफी पुराना विवाद चल रहा था। यह रंजिश इतनी गहरी हो चुकी थी कि आखिरकार इसे खत्म करने के लिए गोलियों का सहारा लिया गया। हालांकि पोपो मुंडा इस हमले में बच गए, लेकिन सवाल यह है कि क्या शहर में आपसी दुश्मनी इतनी खतरनाक शक्ल ले चुकी है कि इंसान की जान तक दांव पर लगाई जा रही है?
इतिहास गवाह है – जमशेदपुर में अपराध और रंजिश का खेल
जमशेदपुर का इतिहास केवल उद्योग और विकास की कहानियों तक सीमित नहीं है। यह शहर कई बार अपराध और गैंगवार की खबरों के लिए भी सुर्खियों में रहा है।
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90 के दशक में यहां गैंगस्टर गिरोहों का दबदबा हुआ करता था, जिनके बीच खून-खराबा आम था।
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कई बार छोटे विवादों ने बड़े हत्याकांड का रूप लिया।
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रंजिशी वारदातें आज भी पूरी तरह खत्म नहीं हो पाई हैं, बल्कि समय-समय पर सिर उठाती रहती हैं।
पोपो मुंडा पर हुआ हमला इसी लंबी कड़ी की ताजा मिसाल है।
लोगों की राय और माहौल
घटना के बाद इलाके के लोग दहशत में हैं। उनका कहना है कि गोलियों की आवाज ने उन्हें पुराने दिनों की याद दिला दी, जब जमशेदपुर में अपराध का बोलबाला था। लोग अब प्रशासन से सख्त कार्रवाई और इलाके में सुरक्षा बढ़ाने की मांग कर रहे हैं।
पुलिस की चुनौती
हालांकि पुलिस ने इस मामले में त्वरित कार्रवाई कर अपराधियों को पकड़ लिया है, लेकिन बड़ी चुनौती यह है कि इस तरह की रंजिश-आधारित वारदातों पर स्थायी रोक कैसे लगाई जाए? हर बार अपराधियों को पकड़ लेने से समस्या खत्म नहीं होती। जब तक जड़ों में छिपी दुश्मनी और अवैध हथियारों का धंधा खत्म नहीं होगा, तब तक ऐसी घटनाएं दोहराई जाती रहेंगी।
जमशेदपुर का यह फायरिंग कांड सिर्फ एक आपसी दुश्मनी का मामला नहीं, बल्कि शहर की पुरानी अपराध संस्कृति की याद दिलाता है। पुलिस की सख्त कार्रवाई सराहनीय है, लेकिन जरूरत इस बात की है कि समाज और प्रशासन मिलकर ऐसा माहौल बनाएं जहां बंदूक की गोलियों की जगह बातचीत और कानून का रास्ता अपनाया जाए।
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