Road Accident: जमशेदपुर-डोबो मार्ग पर हाईवा और ट्रक की आमने-सामने भिड़ंत, सिदगोड़ा के चालक की मौके पर मौत, केबिन काट कर निकाला गया शव
सरायकेला के कांदरबेड़ा-डोबो मार्ग पर बुधवार सुबह हुए एक दर्दनाक सड़क हादसे में हाईवा चालक रोशन सिंह की मौत हो गई। केबिन में फंसे शव को निकालने और घायल ट्रक चालक के एमजीएम अस्पताल में इलाज की पूरी ग्राउंड रिपोर्ट यहाँ देखें।
जमशेदपुर/सरायकेला, 1 अप्रैल 2026 – लौहनगरी जमशेदपुर से सटे सरायकेला-खरसावां जिले के कपाली ओपी अंतर्गत कांदरबेड़ा-डोबो मार्ग पर आज सुबह मौत का तांडव देखने को मिला। बुधवार तड़के करीब 5:30 बजे एक हाईवा और ट्रक के बीच हुई आमने-सामने की भीषण टक्कर में एक चालक की मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई। हादसा इतना भयावह था कि हाईवा का अगला हिस्सा पूरी तरह पिचक गया और चालक का शव लोहे के केबिन में बुरी तरह फंस गया। इस घटना के बाद पूरे इलाके में सनसनी फैल गई और देखते ही देखते घटनास्थल पर स्थानीय लोगों की भारी भीड़ जमा हो गई। पुलिस और स्थानीय लोगों ने कड़ी मशक्कत के बाद शव को बाहर निकाला।
भोर का कोहरा और रफ्तार का कहर: केबिन बना काल
हादसा उस वक्त हुआ जब सड़कों पर आवाजाही शुरू ही हुई थी। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार रफ्तार इतनी तेज थी कि टकराने की आवाज दूर तक सुनाई दी।
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मृतक की पहचान: हादसे में जान गंवाने वाले चालक की पहचान रोशन सिंह के रूप में हुई है। वह जमशेदपुर के सिदगोड़ा थाना क्षेत्र स्थित सुखिया बस्ती का निवासी था।
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टक्कर की तीव्रता: रोशन सिंह हाईवा लेकर जमशेदपुर से चांडिल की ओर जा रहा था, तभी विपरीत दिशा से आ रहे एक अनियंत्रित ट्रक ने उसे जोरदार टक्कर मार दी। टक्कर के बाद हाईवा का केबिन मलबे में तब्दील हो गया और रोशन को संभलने का मौका तक नहीं मिला।
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रेस्क्यू ऑपरेशन: सूचना मिलते ही कपाली ओपी पुलिस मौके पर पहुँची। गैस कटर और क्रेन की मदद से घंटों की मशक्कत के बाद केबिन को काटकर रोशन के शव को बाहर निकाला जा सका।
घायल चालक की हालत नाजुक: एमजीएम अस्पताल में भर्ती
हादसे के दूसरे पक्ष यानी ट्रक का चालक भी इस घटना में गंभीर रूप से जख्मी हुआ है।
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अमित यादव घायल: ट्रक चला रहे अमित यादव को शरीर के कई हिस्सों में गंभीर चोटें आई हैं।
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इलाज जारी: स्थानीय लोगों की मदद से अमित को तुरंत जमशेदपुर के एमजीएम अस्पताल भेजा गया। डॉक्टरों के अनुसार उसकी स्थिति चिंताजनक बनी हुई है और उसे ऑब्जर्वेशन में रखा गया है।
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ट्रैफिक जाम: दुर्घटना के बाद कांदरबेड़ा-डोबो मार्ग पर कुछ घंटों के लिए वाहनों के पहिए थम गए। पुलिस ने क्रेन बुलाकर दुर्घटनाग्रस्त वाहनों को सड़क से हटवाया, जिसके बाद यातायात सामान्य हो सका।
कांदरबेड़ा-डोबो मार्ग: क्यों बनता जा रहा है 'डेथ जोन'?
जमशेदपुर को कांड्रा और चांडिल से जोड़ने वाला यह मार्ग पिछले कुछ वर्षों में दुर्घटनाओं का केंद्र बन गया है।
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भारी वाहनों का दबाव: डोबो पुल बनने के बाद से इस मार्ग पर हाईवा, ट्रक और टेलर जैसे भारी वाहनों की संख्या कई गुना बढ़ गई है। अक्सर चालक समय बचाने के लिए यहाँ तय सीमा से अधिक रफ्तार में वाहन चलाते हैं।
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अंधेरे का फायदा: इस मार्ग के कई हिस्सों में स्ट्रीट लाइट की समुचित व्यवस्था नहीं है, जिससे भोर और रात के समय दृश्यता (Visibility) कम हो जाती है।
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इतिहास: पिछले एक साल में इस मार्ग पर एक दर्जन से अधिक बड़ी सड़क दुर्घटनाएं दर्ज की गई हैं, जिनमें ज्यादातर मामले आमने-सामने की टक्कर के ही रहे हैं। स्थानीय ग्रामीण लंबे समय से यहाँ 'स्पीड ब्रेकर' और पुलिस गश्त बढ़ाने की मांग कर रहे हैं।
पुलिसिया जांच: लापरवाही या तकनीकी खराबी?
कपाली ओपी पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए सरायकेला भेज दिया है और मामले की कानूनी तफ्तीश शुरू कर दी है।
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प्रारंभिक रिपोर्ट: पुलिस के अनुसार, शुरुआती जांच में तेज रफ्तार और लापरवाही को ही हादसे का मुख्य कारण माना जा रहा है। हालांकि, यह भी जांचा जा रहा है कि क्या किसी वाहन की हेडलाइट या ब्रेक में कोई तकनीकी खराबी तो नहीं थी।
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परिजनों में कोहराम: जैसे ही सिदगोड़ा की सुखिया बस्ती में रोशन सिंह की मौत की खबर पहुँची, वहाँ मातम पसर गया। रोशन अपने परिवार का इकलौता सहारा था।
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सावधानी की अपील: पुलिस ने वाहन चालकों से अपील की है कि वे सुबह के समय गति सीमा का पालन करें और विशेष रूप से मोड़ वाले इलाकों में ओवरटेक करने से बचें।
कांदरबेड़ा-डोबो मार्ग पर हुई यह दुर्घटना एक बार फिर सड़कों पर दौड़ती 'बेकाबू रफ्तार' पर सवाल खड़े करती है। रोशन सिंह जैसे युवा चालक का असमय जाना व्यवस्था और व्यक्तिगत लापरवाही दोनों का नतीजा है। जब तक भारी वाहनों के लिए सख्त गति नियंत्रण और सड़कों पर बेहतर लाइटिंग की व्यवस्था नहीं होगी, तब तक ऐसे 'डेथ जोन' मासूमों की जान लेते रहेंगे। फिलहाल, पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है और दोनों वाहनों को जब्त कर लिया गया है। क्या प्रशासन इस हादसे से सबक लेकर इस खूनी सड़क पर कोई ठोस सुरक्षा इंतजाम करेगा? यह सवाल अब भी बरकरार है।
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