Bodam Tragedy: खूनी खेल, बोड़ाम में काड़ा लड़ाई के दौरान भैंसे का तांडव, पिता की मौत, बेटा अस्पताल में भर्ती
बोड़ाम के जोबा गांव में अवैध रूप से आयोजित काड़ा लड़ाई के दौरान एक उग्र भैंसे ने पिता-पुत्र को रौंद दिया है। पाबंदी के बावजूद छिपकर कराए जा रहे इस खूनी खेल और प्रशासन की नाक के नीचे चल रहे इस मौत के मेले की पूरी रोंगटे खड़े कर देने वाली रिपोर्ट यहाँ दी गई है वरना आप भी मनोरंजन के नाम पर चल रहे इस जानलेवा सच से बेखबर रह जाएंगे।
जमशेदपुर/बोड़ाम, 12 जनवरी 2026 – लौहनगरी के ग्रामीण क्षेत्र बोड़ाम में सोमवार को मनोरंजन का एक पारंपरिक खेल मातम में बदल गया। बेलडीह पंचायत के जोबा गांव में आयोजित 'काड़ा (भैंसा) लड़ाई' के दौरान एक उग्र भैंसे ने दर्शकों की भीड़ पर हमला कर दिया। इस खौफनाक मंजर में भैंसे ने 55 वर्षीय सुभाष कर्मकार को सींगों से उठाकर पटक दिया, जिससे उनकी मौत हो गई, जबकि उनका 15 वर्षीय बेटा सागर कर्मकार गंभीर रूप से घायल हो गया। चौंकाने वाली बात यह है कि एक व्यक्ति की मौत के बाद भी मेला कमेटी ने खेल बंद नहीं किया और खूनी खेल जारी रहा।
मैदान में मौत का तांडव: जब भैंसा हुआ बेकाबू
जोबा गांव के फुटबॉल मैदान में युवा कमेटी की ओर से भैंसों की लड़ाई का आयोजन किया गया था। दोपहर करीब 1 बजे चार जोड़े भैंसों की लड़ाई पूरी हो चुकी थी।
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अचानक हमला: दो भैंसों की भिड़ंत के दौरान एक भैंसा हारकर भागने लगा। उसे खदेड़ते हुए दूसरा उग्र भैंसा मैदान के बाहर दर्शकों की भीड़ में घुस गया।
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पिता-पुत्र पर प्रहार: भागने के क्रम में भैंसे ने सामने खड़े सुभाष कर्मकार को अपनी सींगों पर उठा लिया और जमीन पर पटक दिया। जब उनका बेटा सागर अपने पिता को बचाने आया, तो भैंसे ने उसे भी रौंद दिया, जिससे उसके पैर की हड्डी टूट गई।
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अस्पताल में दम तोड़ा: ग्रामीणों ने दोनों को एमजीएम अस्पताल पहुँचाया, जहाँ इलाज के दौरान सुभाष कर्मकार ने दम तोड़ दिया।
प्रतिबंध को ठेंगा: मौत के बाद भी होता रहा 'काड़ा युद्ध'
इस घटना ने इंसानियत और कानून दोनों पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
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जारी रहा मेला: सूत्रों के मुताबिक, सुभाष के लहूलुहान होकर गिरने के बाद भी आयोजन समिति ने खेल नहीं रोका। इसके बाद भी दो जोड़े भैंसों की लड़ाई कराई गई।
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पुलिस की कार्रवाई: दोपहर करीब ढाई बजे जब बोड़ाम पुलिस को भनक लगी, तो उन्होंने मौके पर पहुँचकर लाठियां चटकाकर भीड़ को खदेड़ा और मेले को बंद करवाया।
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गुप्त आयोजन: थाना प्रभारी मनोरंजन कुमार ने बताया कि इस आयोजन के लिए कोई अनुमति नहीं ली गई थी और इसे पूरी तरह गुप्त तरीके से आयोजित किया गया था।
बोड़ाम काड़ा लड़ाई कांड: मुख्य विवरण (Event Snapshot)
| विवरण | जानकारी (Details) |
| मृतक का नाम | सुभाष कर्मकार (55 वर्ष), जोबा गांव |
| घायल | सागर कर्मकार (15 वर्ष), एमजीएम में भर्ती |
| घटनास्थल | जोबा गांव फुटबॉल मैदान, बोड़ाम |
| आयोजन का तरीका | सोशल मीडिया और यूट्यूब के जरिए गुप्त प्रचार |
| पुलिस एक्शन | मेला बंद कराया, कमेटी की तलाश जारी |
सोशल मीडिया का जाल: कैसे जुटती है हजारों की भीड़?
पुलिस के लिए सबसे बड़ी चुनौती यह है कि इन अवैध मेलों की सूचना आम जनता तक तो पहुँचती है लेकिन प्रशासन तक नहीं।
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डिजिटल इनविटेशन: यूट्यूब चैनलों पर 'काड़ा फाइट' के नाम से वीडियो डालकर तारीख और जगह गुप्त कोड में बताई जाती है।
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प्रशासन बेखबर: बोड़ाम थाना प्रभारी ने स्वीकार किया कि उन्हें इस बड़े आयोजन की जरा भी भनक नहीं थी। अब पुलिस उन यूट्यूब चैनलों और सोशल मीडिया प्रोफाइल्स की जांच कर रही है जिन्होंने इस मेले का प्रचार किया था।
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परिजनों का कोहराम: सुभाष के निधन के बाद उनके परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। घर का मुखिया चला गया और बेटा अस्पताल में जिंदगी की जंग लड़ रहा है।
मनोरंजन या जानलेवा परंपरा?
काड़ा लड़ाई जैसे प्रतिबंधित खेल न केवल पशु क्रूरता हैं बल्कि इंसानी जान के लिए भी बड़ा खतरा बन चुके हैं। बोड़ाम की इस घटना ने साबित कर दिया है कि जब तक इन अवैध आयोजनों पर कड़ी कार्रवाई नहीं होगी, तब तक मासूम लोग अपनी जान गंवाते रहेंगे।
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