Jamshedpur Accident Shock : मोहरदा स्कूल के पास हाइवा ने युवक को कुचला, नो-एंट्री उल्लंघन पर बवाल
जमशेदपुर बिरसानगर के मोहरदा ओररिया स्कूल के पास हाइवा की चपेट में आने से कृष्णा प्रधान गंभीर रूप से घायल हो गए। स्थानीय लोगों ने नो-एंट्री नियम तोड़ने पर पुलिस और प्रशासन पर गंभीर सवाल उठाए।
सोमवार सुबह शहर में एक दर्दनाक सड़क हादसे ने सभी को झकझोर दिया। मोहरदा ओररिया स्कूल के पास जब बच्चे और लोग अपने-अपने काम में व्यस्त थे, तभी अचानक एक तेज़ रफ्तार लेडिंग कंस्ट्रक्शन कंपनी का हाइवा ट्रक वहां से गुज़रा और सड़क पार कर रहे कृष्णा प्रधान को अपनी चपेट में ले लिया।
भारी टक्कर से कृष्णा ज़मीन पर गिर पड़े और ट्रक का पहिया उनके पैर पर चढ़ गया। कुछ ही सेकंड में वहां अफरा-तफरी मच गई। लोग दौड़कर कृष्णा को उठाए और तुरंत एमजीएम अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां डॉक्टरों ने उनका इलाज शुरू किया। उनकी हालत गंभीर बनी हुई है।
स्थानीयों का आक्रोश – “नो-एंट्री की अनदेखी”
हादसे के बाद स्थानीय लोग गुस्से से भर उठे। उनका आरोप है कि थाना की मिलीभगत से इलाके में नो-एंट्री समय के बावजूद भारी वाहनों का परिचालन जारी रहता है। यही लापरवाही हादसों का सबसे बड़ा कारण है।
लोगों का कहना है कि मोहरदा स्कूल क्षेत्र में हर वक्त बच्चों और राहगीरों की आवाजाही रहती है। इसके बावजूद प्रशासन आंख मूंदकर भारी वाहनों को आवासीय और शैक्षणिक इलाकों से गुजरने देता है।
इतिहास गवाह है – बार-बार दोहराई जा रही लापरवाही
यह कोई पहली घटना नहीं है। इससे पहले भी जमशेदपुर और आसपास के इलाकों में नो-एंट्री उल्लंघन के कारण कई जानें जा चुकी हैं। पिछले वर्षों में बिरसानगर, मानगो और साकची क्षेत्रों में ऐसे हादसे बार-बार सामने आते रहे हैं।
स्थानीय लोगों को कहना है कि प्रशासन केवल हादसे के बाद थोड़े दिन सक्रिय होता है, लेकिन जैसे ही मामला शांत होता है, फिर से भारी वाहन बेखौफ होकर गलियों और स्कूल इलाकों से दौड़ने लगते हैं।
स्कूल के बाहर क्यों मंडरा रहा खतरा?
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब नो-एंट्री नियम लागू है, तो स्कूल और भीड़भाड़ वाले इलाकों में हाइवा और ट्रेलर जैसे वाहन कैसे आ रहे हैं? क्या यह पुलिस-प्रशासन की लापरवाही है या मिलीभगत?
स्थानीय नागरिकों ने चेतावनी दी है कि यदि नियमों का सख्ती से पालन नहीं कराया गया, तो वे सड़क पर उतरकर आंदोलन करने को मजबूर होंगे।
प्रशासन से मांग – कड़ी कार्रवाई हो
हादसे के बाद लोगों ने दोषी चालक और संबंधित कंपनी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की। उनका कहना है कि जब तक भारी वाहनों पर रोक और चालकों पर कठोर दंड नहीं होगा, तब तक ऐसे हादसों की पुनरावृत्ति होती रहेगी।
लोगों ने यह भी मांग की कि स्कूल और आवासीय क्षेत्रों में स्पीड ब्रेकर और पुलिस पिकेट की व्यवस्था की जाए, ताकि बच्चों और राहगीरों की जान सुरक्षित रहे।
क्या सख्ती दिखाएगा प्रशासन?
अब देखना यह होगा कि पुलिस और जिला प्रशासन इस घटना को कितनी गंभीरता से लेता है। क्या वाकई दोषी चालक और कंपनी पर कार्रवाई होगी या फिर यह मामला भी धीरे-धीरे ठंडे बस्ते में चला जाएगा?
कुल मिलाकर, मोहरदा स्कूल के पास हुआ यह हादसा सिर्फ एक सड़क दुर्घटना नहीं, बल्कि प्रशासनिक लापरवाही और नो-एंट्री नियम की अनदेखी का नतीजा है। जब तक सख्त कदम नहीं उठाए जाएंगे, तब तक सड़कें बच्चों और राहगीरों के लिए खतरे का मैदान बनी रहेंगी।
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