Bose Blood-Donation: नेताजी की जयंती पर ईया फाउंडेशन का महा-अभियान, 166 यूनिट रक्त से मनेगा 'पराक्रम दिवस', टाटा स्टील के जांबाजों ने दान की अपनी नस-नस की शक्ति
जमशेदपुर में ईया फाउंडेशन द्वारा आयोजित 6वें रक्तदान शिविर और टाटा स्टील कर्मचारियों के अदम्य जज्बे की पूरी रिपोर्ट यहाँ दी गई है। 166 यूनिट रक्त संग्रह और दो रक्तदाताओं द्वारा लगाए गए 'रक्तदान के शतक' की इस प्रेरणादायक दास्तां को विस्तार से पढ़िए वरना आप भी समाजसेवा के इस सबसे बड़े महाकुंभ की इनसाइड स्टोरी जानने से चूक जाएंगे।
जमशेदपुर, 23 जनवरी 2026 – लौहनगरी में आज 'पराक्रम दिवस' का रंग न केवल नारों में दिखा, बल्कि लोगों की नसों में बहते उस जज्बे में भी नजर आया जो दूसरों का जीवन बचाने के लिए आगे बढ़ा। महान क्रांतिकारी नेताजी सुभाष चंद्र बोस की जयंती के पावन अवसर पर ईया फाउंडेशन, जमशेदपुर द्वारा जमशेदपुर ब्लड बैंक परिसर में संस्था का 6वां भव्य रक्तदान शिविर आयोजित किया गया। टाटा स्टील के कर्मचारियों द्वारा संचालित इस संस्था ने आज फिर साबित कर दिया कि वे केवल कारखाने में लोहा ही नहीं गलाते, बल्कि उनके दिल में समाज के लिए ममता और सेवा का दरिया भी बहता है। इस शिविर में युवाओं और कर्मचारियों की ऐसी भीड़ उमड़ी कि शाम तक 166 यूनिट रक्त का बड़ा आंकड़ा संग्रहित किया जा चुका था।
दिग्गजों का जमावड़ा: जब 'यूनियन' और 'मैनेजमेंट' एक साथ आए
शिविर का शुभारंभ किसी उत्सव से कम नहीं था। शहर के प्रमुख श्रमिक नेताओं और टाटा स्टील के वरीय अधिकारियों ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर इस पुण्य कार्य का आगाज किया।
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प्रमुख अतिथि: टाटा वर्कर्स यूनियन के अध्यक्ष टुन्नू चौधरी, जुस्को श्रमिक यूनियन के अध्यक्ष रघुनाथ पांडेय, इक्विपमेंट मेंटेनेंस हेड सतीश गणपति और शेयर्ड सर्विसेज प्रमुख कल्याण प्रसाद ने रक्तदाताओं का उत्साहवर्धन किया।
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विधायक की उपस्थिति: जुगसलाई विधायक मंगल कालिंदी ने भी शिविर में शिरकत की और ईया फाउंडेशन के प्रयासों को जमशेदपुर के लिए एक मिसाल बताया।
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संस्थापक का नेतृत्व: संस्था के संस्थापक दीपक मिश्रा, जो स्वयं टाटा स्टील के इक्विपमेंट सर्विसेज विभाग में कार्यरत हैं, ने बताया कि उनकी टीम का हर सदस्य राष्ट्र निर्माण के साथ-साथ 'जीवन दान' के मिशन में जुटा हुआ है।
इतिहास का पन्ना: जमशेदपुर में 'रक्तदान' की ऐतिहासिक विरासत और टाटा स्टील का नाता
जमशेदपुर का इतिहास केवल इस्पात से नहीं, बल्कि 'इन्सानियत' से भी लिखा गया है। साल 1907 में जब साक्षी की धरती पर टाटा स्टील की नींव रखी गई, तभी से यहाँ 'सामुदायिक सेवा' (Community Service) को व्यापार का अभिन्न अंग माना गया। इतिहास गवाह है कि जमशेदपुर ब्लड बैंक, जो 1960 के दशक में अपनी स्थापना के बाद से भारत के सबसे सक्रिय ब्लड बैंकों में से एक रहा है, हमेशा से टाटा स्टील के कर्मचारियों के योगदान पर टिका है। नेताजी सुभाष चंद्र बोस का जमशेदपुर से पुराना नाता रहा है; वे यहाँ की श्रमिक यूनियनों के अध्यक्ष भी रहे थे। आज ईया फाउंडेशन द्वारा उनकी जयंती पर रक्तदान शिविर लगाना उसी ऐतिहासिक 'बोस विरासत' का सम्मान है, जिसमें उन्होंने कहा था— "तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आजादी दूंगा।" आज के दौर में यह नारा बदलकर "तुम रक्त दान दो, मैं तुम्हें जीवन दूंगा" में तब्दील हो चुका है।
ईया फाउंडेशन रक्तदान शिविर: एक नजर में (Success Statistics)
| विवरण | प्रमुख आंकड़े (Key Statistics) |
| आयोजन संस्था | ईया फाउंडेशन, जमशेदपुर |
| कुल संग्रहित रक्त | 166 यूनिट (166 Units) |
| मुख्य उपलब्धि | 02 रक्तदाताओं ने पूरा किया 25वां रक्तदान |
| प्रमुख सहभागी | टाटा स्टील कर्मचारी एवं टाटा वर्कर्स यूनियन |
| उद्देश्य | नेताजी की जयंती पर 'जीवन दान' |
25वीं बार रक्तदान: इन 'असली हीरो' को सलाम
इस शिविर की सबसे बड़ी और भावुक कर देने वाली उपलब्धि यह रही कि दो ऐसे रक्तदाता सामने आए जिन्होंने अपनी 'सिल्वर जुबली' (25वां रक्तदान) पूरी की।
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प्रेरणा: इन दाताओं ने संदेश दिया कि रक्तदान से कोई कमजोरी नहीं आती, बल्कि यह शरीर और आत्मा दोनों को नई ऊर्जा देता है।
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टाटा वर्कर्स यूनियन की भागीदारी: यूनियन के पदाधिकारियों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया और यह संदेश दिया कि श्रमिकों का हक केवल काम तक नहीं, बल्कि समाज के प्रति उनकी जिम्मेदारी तक भी फैला हुआ है।
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सहयोग: ईया फाउंडेशन ने सभी रक्तदाताओं, डॉक्टरों और सहयोगी टीम का आभार व्यक्त किया, जिनके कारण 166 परिवारों को नई उम्मीद मिली है।
नेताजी को सच्ची श्रद्धांजलि
ईया फाउंडेशन का यह 6वां रक्तदान शिविर केवल एक आयोजन नहीं था, बल्कि नेताजी सुभाष चंद्र बोस के उस 'पराक्रम' को याद करने का तरीका था जो हमें दूसरों के लिए मर मिटना सिखाता है। जमशेदपुर ब्लड बैंक में आज जो खून जमा हुआ है, वह किसी एक्सीडेंट पीड़ित या थैलेसीमिया से जूझ रहे बच्चे के लिए 'संजीवनी' बनेगा।
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