Giridih Rescue: मौत से जंग, गिरिडीह में पलटे ट्रैक्टर के नीचे 3 घंटे दबा रहा चालक, जेसीबी से मिली नई जिंदगी
गिरिडीह के लोकाय में रात के सन्नाटे में एक ट्रैक्टर काल बनकर पलट गया और उसका चालक भारी इंजन के नीचे जिंदा दफन होने की कगार पर था। ग्रामीणों के अटूट साहस और जेसीबी के जरिए चलाए गए इस रोंगटे खड़े कर देने वाले रेस्क्यू ऑपरेशन की पूरी रिपोर्ट यहाँ दी गई है वरना आप भी मौत के मुंह से वापसी की इस कहानी को कभी नहीं जान पाएंगे।
गिरिडीह/तिसरी, 8 जनवरी 2026 – झारखंड के गिरिडीह जिले से रोंगटे खड़े कर देने वाली एक ऐसी खबर सामने आई है, जो मानवीय जज्बे और किस्मत के करिश्मे की मिसाल है। बुधवार की रात तिसरी प्रखंड के लोकाय थाना क्षेत्र अंतर्गत करमाटांड पुल के पास एक अनियंत्रित ट्रैक्टर बीच सड़क पर पलट गया। हादसा इतना भयानक था कि ट्रैक्टर चला रहा युवक भारी-भरकम इंजन के नीचे इस कदर दब गया कि उसका शरीर लोहे के मलबे में फंस गया। अंधेरी रात, संसाधनों की कमी और रिसते हुए खून के बीच करीब तीन घंटे तक मौत और जिंदगी के बीच लुका-छिपी का खेल चलता रहा। आखिरकार, ग्रामीणों और पुलिस के साझा रेस्क्यू ने काल के गाल से उस युवक को सुरक्षित बाहर निकाल लिया।
आधी रात का कोहराम: जब चीखों से गूंज उठा करमाटांड
घटना बुधवार रात की है, जब सड़कों पर सन्नाटा पसरा था और कड़ाके की ठंड पड़ रही थी।
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अचानक हुआ हादसा: ट्रैक्टर पुल के पास असंतुलित होकर पलट गया। चालक को संभलने का मौका तक नहीं मिला और वह सीधे इंजन के नीचे दब गया।
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चीख-पुकार और ग्रामीण: सुनसान इलाके में जब चालक की दर्दनाक चीखें गूंजी, तो पास के ग्रामीण लाठी-डंडे और टॉर्च लेकर मौके पर दौड़ पड़े। दृश्य देखकर सबकी रूह कांप गई—युवक का आधा शरीर भारी मशीनरी के नीचे था।
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हौसलों की जंग: ग्रामीण उसे लगातार आवाज देकर जगाए रखते रहे ताकि वह बेहोश न हो जाए, जबकि एक दूसरी टीम जेसीबी (JCB) मशीन की तलाश में गांव की ओर भागी।
3 घंटे का 'ऑपरेशन लाइफ': जेसीबी ने टाली अनहोनी
लोकाय थाना पुलिस और ग्रामीणों ने मिलकर जो रेस्क्यू चलाया, वह किसी फिल्म के क्लाइमेक्स जैसा था।
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जेसीबी की एंट्री: करीब एक घंटे की मशक्कत के बाद जेसीबी मशीन पहुंची। अंधेरे में ट्रैक्टर को उठाना बेहद चुनौतीपूर्ण था, क्योंकि एक भी गलत हरकत चालक की जान ले सकती थी।
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सावधानी की पराकाष्ठा: पुलिस की निगरानी में जेसीबी ने धीरे-धीरे ट्रैक्टर के हिस्से को ऊपर उठाया। वहां मौजूद दर्जनों लोगों की सांसें अटकी हुई थीं। हर इंच के साथ युवक को मलबे से खींचने की कोशिश की जा रही थी।
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सुरक्षित बाहर: करीब 180 मिनट के लंबे संघर्ष के बाद, आधी रात को युवक को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। जैसे ही वह बाहर आया, मौके पर मौजूद लोगों की आंखों में आंसू आ गए।
गिरिडीह ट्रैक्टर रेस्क्यू: घटनाक्रम का ब्योरा (Rescue Snapshot)
| विवरण | जानकारी (Details) |
| घटना का स्थान | करमाटांड पुल के पास, लोकाय (गिरिडीह) |
| रेस्क्यू का समय | लगभग 03 घंटे |
| सहायक उपकरण | जेसीबी (JCB) मशीन और स्थानीय ग्रामीण |
| घायल की स्थिति | स्थिर (जमुई रेफर) |
| प्रमुख भूमिका | लोकाय पुलिस और जांबाज ग्रामीण |
इतिहास और रसूख: गिरिडीह के दुर्गम रास्तों पर 'इंसानी जज्बे' का इतिहास
गिरिडीह का तिसरी और लोकाय इलाका भौगोलिक रूप से पहाड़ियों और संकरी सड़कों के लिए जाना जाता है। ऐतिहासिक रूप से, इन क्षेत्रों में रात के समय होने वाले हादसों में जीवित बचना नामुमकिन माना जाता था क्योंकि यहाँ स्वास्थ्य सुविधाएं और राहत एजेंसियां काफी दूर हैं। लेकिन 2024 के बाद से ग्रामीण समुदायों में 'क्विक रिस्पांस' का जज्बा बढ़ा है। इससे पहले 2022 में भी तिसरी के जंगलों में एक ट्रक पलटने पर ग्रामीणों ने पूरी रात पहरा देकर चालक को बचाया था। यह घटना साबित करती है कि संसाधनों के अभाव में भी सामूहिक एकता किसी भी तकनीक से बड़ी साबित हो सकती है।
जिंदगी की नई पारी: जमुई में चल रहा है इलाज
ट्रैक्टर के नीचे से निकलने के बाद युवक को तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया।
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बेहतर इलाज: युवक की चोटों की गंभीरता को देखते हुए उसे बेहतर उपचार के लिए जमुई (बिहार) रेफर कर दिया गया है।
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स्थिर हालत: डॉक्टरों का कहना है कि युवक की हड्डियां टूटी हैं, लेकिन समय पर रेस्क्यू होने की वजह से वह खतरे से बाहर है।
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पुलिस की जांच: लोकाय पुलिस अब इस बात की जांच कर रही है कि ट्रैक्टर पलटने का असली कारण क्या था—अंधेरा, ओवरस्पीडिंग या फिर पुल के पास की खराब सड़क?
ईश्वर की कृपा और ग्रामीणों का साहस
यह घटना केवल एक हादसा नहीं, बल्कि एक सबक है। अगर ग्रामीण और पुलिस मुस्तैदी नहीं दिखाते, तो सुबह तक इंजन के नीचे दबे युवक का बचना नामुमकिन था। गिरिडीह की इस अंधेरी रात ने मानवता की एक उजली कहानी लिखी है।
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