Ghatshila Raid: जंगल में गुप्त ठिकाने पर चल रही थी अवैध शराब फैक्ट्री, पुलिस ने किया ध्वस्त!
गालूडीह पुलिस ने जंगल में चल रही अवैध शराब भट्टी को ध्वस्त कर दिया। शराब माफिया मौके से फरार हो गए, लेकिन पुलिस ने बड़ी मात्रा में शराब बनाने की सामग्री जब्त कर उसे नष्ट कर दिया। जानिए पूरी खबर!

झारखंड में अवैध शराब कारोबार पर नकेल कसने के लिए पुलिस लगातार कार्रवाई कर रही है। इसी कड़ी में गालूडीह पुलिस ने मंगलवार को बाघुड़िया पंचायत के गुड़ाझोर गांव के पास जंगल में छिपी एक अवैध शराब भट्टी को ध्वस्त किया।
पुलिस के पहुंचते ही शराब माफिया मौके से फरार हो गए, लेकिन पुलिस ने भारी मात्रा में शराब बनाने की सामग्री जब्त कर उसे नष्ट कर दिया।
करीब 100 किलो जावा महुआ बरामद कर जंगल में ही विनष्ट कर दिया गया।
पुलिस ने भट्टी तोड़ने के साथ ही शराब बनाने के लिए इस्तेमाल किए जा रहे बर्तनों और चूल्हों को भी नष्ट कर दिया।
गालूडीह थाना प्रभारी कुमार इंद्रेश के नेतृत्व में यह विशेष अभियान चलाया गया। उन्होंने कहा कि अवैध शराब कारोबारियों के खिलाफ पुलिस लगातार गुप्त सूचना के आधार पर अभियान चला रही है और आगे भी यह कार्रवाई जारी रहेगी।
झारखंड में अवैध शराब का बढ़ता जाल!
झारखंड में अवैध शराब का धंधा लंबे समय से फल-फूल रहा है। खासकर जंगलों और दूरदराज के गांवों में महुआ से तैयार की जाने वाली देसी शराब का कारोबार तेजी से बढ़ा है।
महुआ से शराब बनाने की परंपरा:
झारखंड के कई ग्रामीण इलाकों में महुआ से शराब बनाने की परंपरा सदियों पुरानी है। महुआ के फूलों को किण्वित कर शराब तैयार की जाती है, जिसे स्थानीय भाषा में 'हड़िया' और 'दारू' कहा जाता है।
क्यों बढ़ा अवैध शराब का कारोबार?
झारखंड सरकार ने कई जिलों में शराब की बिक्री पर प्रतिबंध लगाया हुआ है, जिससे अवैध शराब माफिया को फलने-फूलने का मौका मिला।
सरकारी शराब दुकानों पर शराब महंगी होने के कारण लोग सस्ती देसी शराब की ओर रुख कर रहे हैं।
ग्रामीण इलाकों में पुलिस की पकड़ से दूर जंगलों में गुप्त ठिकानों पर शराब तैयार की जाती है और चोरी-छिपे इसकी बिक्री होती है।
गालूडीह का यह मामला भी इसी तरह के अवैध शराब कारोबार का हिस्सा था, जहां पुलिस ने छापा मारकर इस गोरखधंधे का भंडाफोड़ किया।
पुलिस ने क्यों की यह बड़ी कार्रवाई?
गालूडीह थाना प्रभारी कुमार इंद्रेश ने बताया कि अवैध शराब माफिया के खिलाफ यह विशेष अभियान चलाया जा रहा है।
"अवैध शराब का कारोबार राज्य में अपराध को बढ़ावा दे रहा है। इसे रोकने के लिए पुलिस लगातार गुप्त सूचना के आधार पर कार्रवाई कर रही है।"
"हमारा मकसद शराब माफियाओं की जड़ें उखाड़ना है। जो भी इस अवैध धंधे में लिप्त होगा, उसके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।"
क्या पुलिस की यह कार्रवाई अपराधियों पर लगेगी लगाम?
हालांकि, शराब भट्टी ध्वस्त होने के बाद भी शराब माफिया फरार हो गए, जिससे यह सवाल खड़ा होता है कि क्या पुलिस की यह कार्रवाई सिर्फ दिखावा थी या वाकई इससे अवैध शराब के कारोबार पर रोक लगेगी?
झारखंड में पहले भी कई बार पुलिस ने अवैध शराब के ठिकानों पर छापेमारी की है, लेकिन शराब माफिया हर बार नए ठिकानों से अपना धंधा जारी रखते हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर सरकार सच में अवैध शराब के खिलाफ सख्त कदम उठाना चाहती है, तो सिर्फ छापेमारी काफी नहीं है।
अवैध शराब माफिया के नेटवर्क को तोड़ना होगा।
शराब उत्पादन से लेकर बिक्री तक की पूरी सप्लाई चेन को खत्म करना जरूरी है।
स्थानीय प्रशासन को सतर्क रहकर नियमित कार्रवाई करनी होगी।
क्या झारखंड में पूर्ण शराबबंदी होनी चाहिए?
पुलिस ने इस छापेमारी के दौरान यह भी कहा कि झारखंड सरकार पूर्ण शराबबंदी की दिशा में काम कर रही है।
लेकिन क्या बिहार की तरह झारखंड में भी पूरी तरह शराबबंदी लागू होनी चाहिए?
शराबबंदी से अवैध शराब माफिया पर लगाम लग सकती है।
शराब के कारण होने वाले अपराधों में कमी आ सकती है।
राज्य के युवा नशे की लत से बच सकते हैं।
लेकिन दूसरी ओर, बिहार की तरह झारखंड में भी अवैध शराब का कारोबार और बढ़ सकता है।
शराबबंदी लागू करने के बाद भी लोग चोरी-छिपे शराब बेचते रहेंगे।
सरकार को शराब बिक्री से मिलने वाले राजस्व का नुकसान होगा।
आगे क्या होगा?
गालूडीह पुलिस की इस कार्रवाई के बाद अब देखना होगा कि क्या प्रशासन अवैध शराब माफियाओं पर पूरी तरह शिकंजा कस पाता है या फिर ये माफिया नए ठिकानों से अपना कारोबार जारी रखेंगे?
क्या सरकार अवैध शराब को पूरी तरह खत्म करने के लिए कड़े कदम उठाएगी?
क्या झारखंड में पूर्ण शराबबंदी लागू होगी?
या फिर यह छापेमारी सिर्फ कुछ दिनों की कार्रवाई बनकर रह जाएगी?
इन सभी सवालों के जवाब आने वाले समय में मिलेंगे, लेकिन फिलहाल पुलिस की यह कार्रवाई झारखंड के अवैध शराब कारोबारियों के लिए एक बड़ा झटका जरूर है।
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