Ghatshila Jail: अंडरवियर में गांजा छिपाकर जेल में घुस रहा था सुजल, गार्ड्स ने गेट पर दबोचा, घाटशिला जेल की सुरक्षा देख उड़े होश
घाटशिला जेल में कैदी को गांजा सप्लाई करने की कोशिश कर रहे युवक सुजल गोराई को पुलिस ने रंगे हाथों दबोच लिया है। अंडरवियर में नशीला पदार्थ छिपाकर ले जाने के इस शातिराना तरीके और जेल के भीतर फैले ड्रग्स नेटवर्क की पूरी रिपोर्ट यहाँ दी गई है वरना आप भी सुरक्षा में सेंध लगाने वाली इस बड़ी खबर को जानने से चूक जाएंगे।
जमशेदपुर/घाटशिला, 20 जनवरी 2026 – लौहनगरी के ग्रामीण क्षेत्र स्थित घाटशिला जेल की सुरक्षा व्यवस्था में सेंध लगाने का एक बेहद ही अजीबोगरीब और शातिराना मामला सामने आया है। एक युवक जेल में बंद कैदी को गांजा पहुंचाने की फिराक में था, लेकिन जेल के गेट पर तैनात मुस्तैद गार्डों ने उसकी चालाकी को नाकाम कर दिया। धालभूमगढ़ थाना पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपी युवक को गिरफ्तार कर लिया है। पकड़े गए युवक ने नशे की खेप को ऐसी जगह छिपाया था कि पहली नजर में पुलिस भी धोखा खा गई।
कैदी से मिलने का बहाना और अंडरवियर में 'नशा'
गिरफ्तार युवक की पहचान सुजल गोराई के रूप में हुई है, जो घाटशिला थाना क्षेत्र के खारिका शोल का निवासी है।
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शातिराना तरीका: सुजल ने गांजा जेल के भीतर ले जाने के लिए उसे अपनी अंडरवियर में बनी एक गुप्त जेब में छिपा रखा था।
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मुलाकाती बनकर आया: वह जेल में बंद एक कैदी से मिलने के बहाने गेट तक पहुँचा था। शुरुआत में सामान्य तलाशी के दौरान गार्ड्स उसे नहीं पकड़ पाए थे।
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रंगे हाथों पकड़ा गया: जैसे ही सुजल ने जेल परिसर के पास एक माध्यम (कैदी के गुर्गे) को वह गांजा सौंपने की कोशिश की, गेट पर तैनात सुरक्षाकर्मियों की नजर उस पर पड़ गई। उसे तुरंत हिरासत में लेकर पुलिस को सूचना दी गई।
पुलिस की रडार पर 'ड्रग्स नेटवर्क': मास्टरमाइंड की तलाश
धालभूमगढ़ थाना पुलिस ने सुजल को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है, लेकिन असली जांच अब शुरू हुई है।
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सप्लाई चेन की जांच: पुलिस यह पता लगा रही है कि सुजल को यह गांजा किसने उपलब्ध कराया था। वह इलाके के किसी बड़े ड्रग्स सिंडिकेट का हिस्सा हो सकता है।
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कैदी का कनेक्शन: पुलिस उस कैदी से भी पूछताछ कर रही है जिसके लिए यह नशीला पदार्थ मंगवाया गया था। जेल के भीतर नशा पहुंचाने के इस 'ऑर्डर' के पीछे कौन है, इसका खुलासा जल्द होने की उम्मीद है।
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सुरक्षा में सख्ती: इस घटना के बाद घाटशिला जेल की सुरक्षा व्यवस्था को और कड़ा कर दिया गया है। मुलाकातियों की गहन जांच के निर्देश दिए गए हैं।
घाटशिला जेल गांजा कांड: मुख्य विवरण (Crime Snapshot)
| विवरण | जानकारी (Details) |
| आरोपी का नाम | सुजल गोराई (खारिका शोल निवासी) |
| जेल का नाम | घाटशिला जेल, जमशेदपुर ग्रामीण |
| बरामदगी | गांजा (अंडरवियर में छिपाया गया था) |
| गिरफ्तारी टीम | धालभूमगढ़ थाना पुलिस और जेल सुरक्षा गार्ड |
| वर्तमान स्थिति | आरोपी न्यायिक हिरासत में जेल भेजा गया |
इतिहास का पन्ना: घाटशिला जेल और जेल के भीतर 'स्मगलिंग' का पुराना रिकॉर्ड
घाटशिला जेल का इतिहास झारखंड के ग्रामीण इलाकों की सुरक्षा व्यवस्था में एक महत्वपूर्ण स्थान रखता है। ब्रिटिश काल और उसके बाद के वर्षों में यह जेल मुख्य रूप से स्थानीय अपराधियों के लिए बनाई गई थी। इतिहास गवाह है कि 1980 और 90 के दशक में जेलों के भीतर बीड़ी, तंबाकू और गांजा पहुंचाने के लिए 'दीवार फांदने' या 'मुलाकाती खिड़की' का इस्तेमाल होता था। लेकिन 2010 के बाद जब सुरक्षा तकनीक और सीसीटीवी कैमरों का दौर आया, तो अपराधियों ने 'बॉडी कंसीलमैट' (शरीर में सामान छिपाना) जैसे नए तरीके अपनाए। सुजल गोराई का यह मामला इसी अपराधी मानसिकता के विकास को दर्शाता है। 2026 की यह घटना याद दिलाती है कि तकनीक चाहे कितनी भी बढ़ जाए, मानवीय चौकसी ही सुरक्षा की पहली दीवार है।
नेटवर्क को बेनकाब करने की चुनौती
घाटशिला और धालभूमगढ़ का इलाका नशीले पदार्थों की तस्करी के लिए संवेदनशील रहा है।
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ग्रामीण इलाकों में जाल: पुलिस का मानना है कि घाटशिला के खारिका शोल जैसे इलाकों में छोटे-छोटे गिरोह सक्रिय हैं जो युवाओं को मोहरा बनाकर जेलों तक नशा पहुंचाते हैं।
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सख्त कार्रवाई की चेतावनी: धालभूमगढ़ थाना प्रभारी ने स्पष्ट किया है कि केवल सुजल ही नहीं, बल्कि गांजा सप्लाई करने वाले मुख्य नेटवर्क के सदस्यों पर भी 'नारकोटिक्स एक्ट' के तहत कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
सुरक्षा की बड़ी जीत
सुजल गोराई की गिरफ्तारी यह संदेश देती है कि जेल की दीवारें अब नशा तस्करों के लिए अभेद्य होती जा रही हैं। अंडरवियर में गांजा छिपाकर ले जाने वाला यह शातिर अपराधी अब खुद उसी जेल की सलाखों के पीछे है जहाँ वह नशे की सप्लाई करने पहुँचा था।
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