Jamshedpur Dry Day : घाटशिला उपचुनाव से 48 घंटे पहले शराबबंदी लागू, शराब समेत ये तीन चीजें बैन, तुरंत जानें पूरा नियम
क्या आप घाटशिला उपचुनाव से पहले लागू होने वाले 'शुष्क दिवस' यानी ड्राइ डे के नियम जानते हैं? किस तारीख और समय से शराब की बिक्री पर पूरी तरह रोक लगने वाली है? डीसी कर्ण सत्यार्थी ने लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की किस धारा के तहत यह कड़ा निर्णय लिया है? अगर आपने होटल, दुकान या किसी निजी स्थान पर शराब बेची, वितरित की या रखी, तो क्या होगा? 2000 जुर्माना और 6 माह की जेल से कैसे बचें? पूरी जानकारी पढ़ें!
जमशेदपुर, 29 अक्टूबर 2025 – जमशेदपुर समेत पूरे घाटशिला विधानसभा क्षेत्र के लिए एक अत्यंत महत्वपूर्ण और कड़ा आदेश जारी किया गया है। 11 नवंबर को होने वाले उपचुनाव में स्वतंत्र और निष्पक्ष मतदान सुनिश्चित करने के मकसद से, जिला निर्वाचन पदाधिकारी सह उपायुक्त कर्ण सत्यार्थी ने इस पूरे मतदान क्षेत्र को 'शुष्क दिवस' यानी ड्राइ डे घोषित कर दिया है। यह फैसला शराब के अवैध प्रवाह को रोकने और चुनाव को प्रभावित करने की किसी भी साजिश को नाकाम करने के लिए लिया गया है।
कब से कब तक लागू रहेगा ड्राइ डे? नोट करें तारीख और समय!
उत्पाद अधिनियम की धारा 26 में निहित शक्तियों का प्रयोग करते हुए, उपायुक्त ने घाटशिला विधानसभा क्षेत्र में शराब की बिक्री और वितरण पर पूरी तरह से रोक लगा दी है।
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शुरुआत: 9 नवंबर को शाम 05 बजे से
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समाप्ति: 11 नवंबर को शाम 05 बजे तक
यह प्रतिबंध लगातार 48 घंटों तक प्रभावी रहेगा, जो लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 135 (ग) के प्रावधानों के अनुसार है। यह प्रावधान सुनिश्चित करता है कि मतदान समाप्त होने के समय से 48 घंटे पहले कोई भी मादक पदार्थ चुनाव को प्रभावित न कर सके।
होटल, दुकान या घर: इन नियमों को तोड़ना होगा महंगा!
इस अधिनियम के तहत केवल शराब की दुकानें ही नहीं, बल्कि सार्वजनिक और निजी दोनों स्थानों पर शराब से संबंधित गतिविधियों पर भी सख्त पाबंदी लगाई गई है।
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प्रतिबंधित गतिविधियाँ: इस अवधि के दौरान, मतदान क्षेत्र के भीतर किसी होटल, भोजन, पाठशाला दुकान या किसी अन्य लोक या प्राइवेट स्थान में कोई भी स्पिरिटयुक्त, किण्वित या मादक लिकर न तो बेचा जाएगा, न दिया जाएगा और न ही वितरित किया जाएगा।
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सख्त इतिहास: झारखंड के चुनावों का इतिहास गवाह है कि शराब और पैसा अक्सर मतदाताओं को लुभाने के लिए इस्तेमाल होता रहा है। 1951 के अधिनियम की धारा 135(ग) इसी खतरे को खत्म करने के लिए बनाई गई थी।
कानून तोड़ा तो 6 माह की जेल और कब्जा हुआ माल जब्त
जिला प्रशासन ने स्पष्ट कर दिया है कि इन प्रावधानों का उल्लंघन करने वाले किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा। सजा काफी कड़ी और तात्कालिक हो सकती है:
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सजा: उपबंधों का उल्लंघन करने वाले किसी भी व्यक्ति को छह माह तक के कारावास या दो हजार रुपये तक के जुर्माने, या दोनों से दंडित किया जाएगा।
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जब्ती: यदि कोई व्यक्ति इस धारा के अधीन किसी अपराध के लिए दोषी पाया जाता है, तो उसके कब्जे में पाए गए सभी प्रकार के मादक या स्पिरिटयुक्त पदार्थ जब्ती के दायी होंगे और उन्हें नष्ट कर दिया जाएगा।
उपायुक्त कर्ण सत्यार्थी के इस कदम को स्वच्छ और भयमुक्त मतदान की दिशा में एक अहम प्रयास माना जा रहा है। लोगों को सलाह दी गई है कि वे इन 48 घंटों के दौरान किसी भी तरह की अवैध गतिविधि में शामिल न हों और कानून का पूरी तरह से पालन करें।
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