Flight Chaos: इंडिगो के लाखों यात्रियों को बड़ी राहत, 827 करोड़ रुपये वापस
देशभर में 9.5 लाख टिकट रद्द होने के बाद इंडिगो ने दिया बड़ा अपडेट। अब टिकट बदलने या रद्द करने पर कोई शुल्क नहीं। 827 करोड़ रुपये का रिफंड क्यों दिया गया। पायलटों की कमी और सुरक्षा नियमों में सख्ती से कंपनी क्यों फंसी। सरकार की सख्ती और द्वैत अधिकार का बड़ा मुद्दा।
नई दिल्ली, 8 दिसंबर 2025 – लगातार अव्यवस्था और हजारों यात्रियों की परेशानी के बाद देश की सबसे बड़ी विमानन कंपनी इंडिगो ने सोमवार शाम एक बड़ा अपडेट जारी किया है। कंपनी ने कहा है कि 3 से 15 दिसंबर के बीच रद्द हुई उड़ानों का पैसा वापस करने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। कंपनी ने यह भी घोषणा की है कि अब टिकट बदलने या रद्द करने पर कोई शुल्क नहीं लिया जाएगा।
827 करोड़ का रिफंड, सरकार का सख्त रुख
यात्रियों को राहत देते हुए इंडिगो ने वापसी की तारीख 48 घंटे पहले कर दी है। यानी अब 5 दिसंबर के बजाय 3 दिसंबर से रद्द हुए टिकटों पर भी पूरा पैसा वापस किया जा रहा है। यह बदलाव दर्शाता है कि संकट कितना गहरा था।
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रिकॉर्ड वापसी: नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने बताया कि इंडिगो अब तक 9.5 लाख टिकटों का पैसा वापस कर चुका है, जिनकी कुल कीमत 827 करोड़ रुपये है। इनमें से करीब 6 लाख टिकट (569 करोड़ रुपये) 1 से 7 दिसंबर के बीच की उड़ानों के थे, जब यह संकट अपने चरम पर था।
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कड़ी कार्रवाई का आश्वासन: मंत्रालय ने विमानन कंपनी को कड़े निर्देश दिए थे कि सभी बकाया वापसी तुरंत साफ किए जाएं और यात्रियों से पुनर्निर्धारित शुल्क न लिया जाए। उड्डयन मंत्री राममोहन नायडू ने कहा कि एक उदाहरण पेश करने के लिए इंडिगो पर कड़ी कार्रवाई की जा सकती है।
संकट की जड़ में पायलट और नियमों में बदलाव
इस विमानन संकट की जड़ें उन नए उड़ान सुरक्षा नियमों से जुड़ी हैं जो सरकार ने करीब दो साल पहले जारी किए थे। इन नियमों का मकसद पायलटों की थकान कम करना था, जिसके लिए ज्यादा आराम का समय अनिवार्य किया गया।
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कर्मचारी कमी: नए नियम लागू होते ही इंडिगो, जो रोज 2200 उड़ानें चलाती है और कम ठहराव पर जोर देती रही है, वह पायलटों की कमी से जूझने लगी। इसी वजह से सैकड़ों उड़ानें रद्द करनी पड़ीं। हालात बिगड़ते देख विमानन महानिदेशालय ने अस्थायी रूप से कुछ नियमों में नरमी दी है।
विपक्ष ने उठाया दबदबे का मुद्दा
इंडिगो संकट के बाद विपक्ष ने देश में उड्डयन क्षेत्र में द्विअधिकार का मुद्दा उठाया, जहाँ केवल इंडिगो और एयर इंडिया का दबदबा है। हालांकि सरकार का कहना है कि वह हमेशा नई विमानन कंपनियों को प्रोत्साहन देती रही है और यह एक खुला बाजार है।
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