Dhanbad Digital: रिटायर्ड शिक्षक को सीबीआई का डर दिखाकर किया 'डिजिटल अरेस्ट', 10 लाख की ठगी करने वाला भोपाल का जालसाज गिरफ्तार
धनबाद में एक रिटायर्ड शिक्षक को 'डिजिटल अरेस्ट' कर साढ़े दस लाख रुपये लूटने वाले गिरोह का पर्दाफाश हुआ है। भोपाल से गिरफ्तार हुए मुख्य आरोपी अरुण अहिरवार और सीबीआई के नाम पर चल रहे इस खौफनाक स्कैम की पूरी रिपोर्ट यहाँ दी गई है वरना आप भी साइबर अपराधियों के इस नए और खतरनाक जाल को समझने से चूक जाएंगे।
धनबाद, 21 जनवरी 2026 – कोयलांचल में साइबर अपराधियों ने ठगी का एक ऐसा मायाजाल बुना है जिसने अब पढ़े-लिखे समाज और बुजुर्गों को अपना निशाना बनाना शुरू कर दिया है। टुंडी थाना क्षेत्र के रतनपुर निवासी रिटायर्ड शिक्षक सेबेस्टियन होरो को 'डिजिटल अरेस्ट' कर 10 लाख 50 हजार रुपये की ठगी करने वाले गिरोह का धनबाद साइबर पुलिस ने पर्दाफाश किया है। पुलिस ने इस मामले में मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल से अरुण अहिरवार को गिरफ्तार किया है। यह गिरफ्तारी साबित करती है कि साइबर ठगी के तार अब झारखंड से निकलकर देश के दूसरे राज्यों तक मजबूती से फैल चुके हैं।
सीबीआई का खौफ और 10 लाख की चपत: कैसे हुआ खेल?
यह पूरा मामला 8 जनवरी को शुरू हुआ, जब सेबेस्टियन होरो के मोबाइल पर एक अनजान नंबर से फोन आया। अपराधी ने खुद को सीबीआई (CBI) का अधिकारी बताया।
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डिजिटल अरेस्ट: अपराधियों ने शिक्षक को व्हाट्सएप वीडियो कॉल पर लिया और कहा कि उन पर 'मनी लॉन्ड्रिंग' का गंभीर मामला दर्ज है। उन्हें डराया गया कि अब ईडी (ED) और सीबीआई की टीम उन्हें गिरफ्तार करने आ रही है।
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भयादोहन का शिकार: डर के मारे रिटायर्ड शिक्षक अपराधियों के चंगुल में फंस गए। अपराधियों ने उन्हें घंटों तक वीडियो कॉल पर बंधक (डिजिटल अरेस्ट) बनाए रखा और जेल जाने का डर दिखाकर अलग-अलग बैंक खातों में साढ़े दस लाख रुपये ट्रांसफर करा लिए।
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पैसों की बंदरबांट: जांच में पता चला कि आरोपी अरुण अहिरवार ने चेक के माध्यम से 5 लाख रुपये तुरंत निकाल लिए थे और अपने साथियों में बांट दिए थे।
एसआइटी की भोपाल में रेड: ऐसे पकड़ा गया 'खाताधारक'
ग्रामीण एसपी कपिल चौधरी ने प्रेस वार्ता में बताया कि प्राथमिकी दर्ज होते ही इंस्पेक्टर रविकांत प्रसाद के नेतृत्व में एक विशेष जांच टीम (SIT) का गठन किया गया।
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फर्जी कंपनी का जाल: गिरफ्तार अरुण अहिरवार ने फर्जी दस्तावेजों के आधार पर एक कंपनी के नाम पर 'करंट अकाउंट' खुलवा रखा था ताकि बड़ी रकम के ट्रांजेक्शन पर शक न हो।
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इलेक्ट्रॉनिक सबूत: आरोपी के पास से पुलिस ने कई मोबाइल फोन, सिम कार्ड और बैंक ट्रांजेक्शन के पुख्ता सबूत बरामद किए हैं।
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टीम की कामयाबी: एसआइ विश्वजीत ठाकुर और विकास प्रसाद की टीम ने भोपाल के भानपुर इलाके में छापेमारी कर आरोपी को धर दबोचा।
धनबाद डिजिटल अरेस्ट कांड: मुख्य विवरण (Crime Snapshot)
| विवरण | जानकारी (Details) |
| पीड़ित | सेबेस्टियन होरो (रिटायर्ड शिक्षक, टुंडी) |
| ठगी की राशि | ₹10,50,000 (10.5 लाख रुपये) |
| आरोपी | अरुण अहिरवार (निवासी: भोपाल, एमपी) |
| मोडस ऑपरेंडी | डिजिटल अरेस्ट (नकली सीबीआई अधिकारी) |
| बरामदगी | गैजेट्स और बैंक ट्रांजेक्शन रिकॉर्ड |
इतिहास का पन्ना: धनबाद में 'ठगी' का बदलता चेहरा और जामताड़ा से भोपाल तक का सफर
धनबाद और आसपास के इलाकों का इतिहास हमेशा से 'कोयला' और 'मजदूरी' से जुड़ा रहा है, लेकिन साल 2015 के बाद यह क्षेत्र साइबर अपराध की नई प्रयोगशाला बन गया। इतिहास गवाह है कि झारखंड का 'जामताड़ा' कभी फिशिंग (Phishing) का केंद्र था, जहाँ लोग बैंक अधिकारी बनकर छोटे-मोटे फ्रॉड करते थे। लेकिन 2023-24 के बाद अपराधियों ने 'डिजिटल अरेस्ट' जैसी परिष्कृत तकनीक अपनाई है। पहले ठगी के तार जामताड़ा और देवघर तक सीमित थे, लेकिन अब भोपाल, जामनगर और मेवात जैसे इलाकों से बैठकर अपराधी झारखंड के लोगों को निशाना बना रहे हैं। रिटायर्ड शिक्षक सेबेस्टियन होरो के साथ हुई यह घटना इतिहास की उन कड़ियों को जोड़ती है जहाँ अपराधियों ने अब 'डर और कानून' को अपना हथियार बना लिया है। यह इस बात का प्रमाण है कि 2026 में अपराधी अब केवल अनपढ़ नहीं, बल्कि बैंकिंग सिस्टम और तकनीकी खामियों के माहिर खिलाड़ी बन चुके हैं।
क्या होता है 'डिजिटल अरेस्ट'? पुलिस ने दी चेतावनी
ग्रामीण एसपी ने लोगों से अपील की है कि वे किसी भी अनजान वीडियो कॉल से न डरें।
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कानून का सच: भारत में कोई भी सरकारी एजेंसी (CBI, ED या पुलिस) वीडियो कॉल पर किसी को 'अरेस्ट' नहीं करती और न ही पैसे की मांग करती है।
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सावधानी ही बचाव: यदि कोई आपको डराता है, तो तुरंत फोन काटें और स्थानीय थाने या 1930 साइबर हेल्पलाइन पर कॉल करें।
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टारगेट पर बुजुर्ग: अपराधी अक्सर उन लोगों को चुनते हैं जो रिटायर हो चुके हैं और जिनके पास जीवन भर की पूंजी जमा है।
अपराधियों के लिए कड़ा संदेश
धनबाद साइबर पुलिस की यह कार्रवाई दर्शाती है कि अपराधी चाहे देश के किसी भी कोने में छिपा हो, कानून के हाथ वहां तक पहुँच ही जाएंगे। अरुण अहिरवार की गिरफ्तारी से इस गिरोह के अन्य सदस्यों के नाम भी जल्द सामने आने की उम्मीद है।
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