Chakradharpur Cold Death: प्लास्टिक के नीचे सोए गरीब दंपत्ति की ठंड से मौत, पत्नी के बाद पति ने भी तोड़ा दम, क्यों नहीं जले अलाव?
चक्रधरपुर में दिल दहलाने वाली घटना! प्लास्टिक ओढ़कर सो रहे खानाबदोश दंपति की ठंड से मौत। पत्नी की अस्पताल में मौत के बाद अगले दिन पति भी सर्द रात में चल बसा। पार्षद ने कराया अंतिम संस्कार, प्रशासन से अलाव की मांग।
चक्रधरपुर, 27 नवंबर 2025 – पश्चिमी सिंहभूम (West Singhbum) जिले के चक्रधरपुर (Chakradharpur) इलाके से एक दिल दहलाने वाली (Heart-Wrenching) घटना सामने आई है, जिसने बढ़ती सर्दी (Cold Wave) और सरकारी व्यवस्था (Government Arrangements) पर गंभीर सवाल (Serious Questions) खड़े कर दिए हैं। यहां पांच मोड़ पर प्लास्टिक (Plastic) टांगकर रहने वाले एक खानाबदोश (Nomadic) दंपत्ति की ठंड (Cold) के कारण बारी-बारी से मौत (Death) हो गई। दोनों ही गरीबी (Poverty) और लाचारी (Helplessness) में खुले आसमान (Open Sky) के नीचे रहने को मजबूर थे। इस घटना ने स्थानीय जनप्रतिनिधियों (Public Representatives) और प्रशासन को झकझोर (Shaken) दिया है।
पत्नी की अस्पताल में मौत, पति सर्दी में चल बसा
स्थानीय वार्ड पार्षद सोमनाथ रजक (Somnath Rajak) ने इस दुखद (Tragic) घटना की पुष्टि (Confirmed) की और बताया कि यह दंपत्ति भिक्षाटन (Begging) करके गुजर बसर (Livelihood) कर रहा था। पिछले कुछ दिनों से चक्रधरपुर में पारे में तेजी से गिरावट (Drop in Temperature) दर्ज की गई थी, जिसका सबसे बुरा असर इन गरीब लोगों पर पड़ा।
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मानवता का पहला कदम: पार्षद सोमनाथ रजक को कुछ दिन पहले सूचना मिली थी कि खानाबदोश दंपत्ति में से पत्नी की हालत गंभीर (Critical) है और वह ठंड के कारण बीमार (Sick) पड़ गई है। उन्होंने मानवता (Humanity) दिखाते हुए महिला को चक्रधरपुर के अनुमंडल अस्पताल (Sub-Divisional Hospital) में भर्ती (Admitted) कराया।
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अंतिम परिणाम: इलाज के दौरान महिला की मौत हो गई। पार्षद ने ही उसका अंतिम संस्कार (Funeral) कराया। लेकिन अगले ही दिन यह खबर आई कि उसका पति भी प्लास्टिक के नीचे सोते हुए सर्द रात में (In the Cold Night) चल बसा।
आरपीएफ और जीआरपी की मौजूदगी में अंतिम संस्कार
पहचान (Identification) न होने के बावजूद, पार्षद सोमनाथ रजक ने दूसरे दिन भी मानवीय जिम्मेदारी (Humanitarian Responsibility) उठाई। उन्होंने आरपीएफ (RPF - रेलवे सुरक्षा बल) और जीआरपी (GRP - सरकारी रेलवे पुलिस) के अधिकारियों (Officials) की मौजूदगी (Presence) में खानाबदोश पति का भी अंतिम संस्कार कराया। इस दौरान कांग्रेस नेता शेखावत हुसैन समेत कई स्थानीय लोग मौजूद थे।
अलाव की व्यवस्था पर सवाल, प्रशासन से विशेष ध्यान की मांग
इस दर्दनाक हादसे (Tragic Incident) ने स्थानीय प्रशासन के दावों (Claims) की पोल (Exposed) खोल दी है। पार्षद रजक ने साफ कहा कि तेजी से लुढ़कते पारे (Falling Mercury) के बीच सरकार को अब गरीबों को राहत (Relief) देने पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है।
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खुले आसमान के नीचे: चक्रधरपुर में हाड़ कंपा देने वाली सर्दी (Biting Cold) पड़ रही है, लेकिन गरीब लोग खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर हैं।
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अलाव गायब: सबसे बड़ी चिंता (Concern) यह है कि प्रशासन द्वारा शहर में कहीं भी अलाव (Bonfire) की व्यवस्था (Arrangement) नहीं की गई है।
पार्षद ने प्रशासन से मांग की है कि इस गंभीर मानवीय समस्या (Humanitarian Problem) पर तुरंत (Immediate) ध्यान दिया जाए और ठंड से बचाव (Protection) के लिए जरूरी कदम उठाए जाएं। यह घटना एक उदाहरण (Example) है कि कैसे आधारभूत (Basic) व्यवस्थाओं के अभाव में गरीबों की जान जा रही है।
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