Chaibasa Massacre: खूनी तांडव, चाईबासा में नरभक्षी हाथी का कहर, एक रात में 6 को रौंदा, 7 दिनों में 16 लाशें
पश्चिमी सिंहभूम के चाईबासा में एक पागल दंतैल हाथी ने भरबरिया गांव में एक साथ 6 लोगों को मौत के घाट उतार दिया है। महज एक हफ्ते में 16 जिंदगियां लील चुके इस आदमखोर को पकड़ने के लिए अब रात में 'थर्मल ड्रोन' उड़ाए जा रहे हैं वरना आप भी कोल्हान के जंगलों में छिपे इस मौत के साये की खौफनाक सच्चाई कभी नहीं जान पाएंगे।
चाईबासा, 7 जनवरी 2026 – झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम जिले में प्रकृति का सबसे खौफनाक बदला देखने को मिल रहा है। चाईबासा के जंगलों से निकलकर एक पागल दंतैल हाथी ने जो 'डेथ ट्रैक' बनाया है, वह अब एक बड़े नरसंहार में तब्दील हो चुका है। मंगलवार की देर रात नोवामुंडी प्रखंड के भरबरिया गांव में इस हाथी ने एक ही झटके में 6 लोगों को कुचलकर मार डाला। पिछले 7 दिनों के भीतर यह हाथी कुल 16 लोगों की जान ले चुका है। अब यह केवल वन्यजीव संघर्ष नहीं, बल्कि एक राष्ट्रीय त्रासदी जैसा मंजर है। वन विभाग के तमाम दावे फेल हो चुके हैं और अब चाईबासा के ग्रामीण इलाकों में लोग अपने घरों में नहीं, बल्कि पेड़ों और ऊंचे मचानों पर रात गुजारने को मजबूर हैं।
भरबरिया में कत्लेआम: एक झोपड़ी और 6 लाशें
रात के करीब 10 बजे थे, जब भरबरिया गांव के लोग गहरी नींद में थे। तभी 'यमराज' बनकर आए दंतैल ने सनातन मेराल के घर पर हमला बोल दिया।
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पूरा परिवार खत्म: हाथी ने सनातन मेराल, उनकी पत्नी जोंकों कुई और उनके दो मासूम बच्चों को बेरहमी से कुचल दिया। पास के ही दूसरे परिवार के भी दो सदस्य इस हमले की भेंट चढ़ गए।
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चश्मदीद बच्चा: सनातन का एक बच्चा अपनी आंखों के सामने पूरे परिवार को खत्म होते देख किसी तरह भागने में सफल रहा, जो अब सदमे में है।
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बेबस प्रशासन: चाईबासा डीएफओ आदित्य नारायण ने स्वीकार किया है कि हाथी इतनी तेजी से लोकेशन बदल रहा है कि उसे ट्रेस करना नामुमकिन हो रहा है।
7 दिनों का खूनी हिसाब: कहाँ-कहाँ गिरीं लाशें?
हाथी के इस तांडव की शुरुआत 1 जनवरी से हुई और तब से हर दिन नया खून बह रहा है:
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1 जनवरी: टोंटो, बिरसिंहहातु और रोरो ग्राम में 3 मौतें (मंगल सिंह, उर्दूप और विष्णु सुंडी)।
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2 जनवरी: गोइलकेरा के सायतवा में 13 साल के रेंगा कयोम की दर्दनाक मौत।
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4-5 जनवरी: कुईडा और मिस्त्रीबेड़ा में एक महिला और जोंगा लागुरी को हाथी ने मार डाला।
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6 जनवरी: सोवा गांव में पिता और उसके 8 माह की बच्ची समेत 3 की मौत और टोंटो में जगमोहन सवईया की हत्या।
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7 जनवरी: भरबरिया गांव में सबसे बड़ा हमला— 6 लोगों की मौत।
चाईबासा किलर हाथी: अब तक का डेटा (Death Toll Tracker)
| तारीख | इलाका | मौतें | घायल |
| 1 जनवरी | टोंटो / सदर | 03 | 02 |
| 2-4-5 जन. | गोइलकेरा | 03 | 03 |
| 6 जनवरी | सोवा / टोंटो | 04 | 01 |
| 7 जनवरी | भरबरिया | 06 | 02 |
| कुल योग | - | 16 | 08 |
इतिहास और रंजिश: कोल्हान के दंतैल का 'रक्त-चरित्र'
पश्चिमी सिंहभूम का सारंडा और कोल्हान वन क्षेत्र ऐतिहासिक रूप से हाथियों का गढ़ रहा है। लेकिन 16 लोगों की एक हफ्ते में मौत की यह घटना 50 सालों के इतिहास में सबसे वीभत्स है। जानकार बताते हैं कि जब कोई हाथी 'मस्त' (Musth) अवस्था में होता है या उसे झुंड से बेदखल कर दिया जाता है, तो वह इंसानों को अपना सबसे बड़ा दुश्मन मानने लगता है। 2012 में भी एक हाथी ने पलामू में कोहराम मचाया था, लेकिन चाईबासा का यह दंतैल उससे कहीं ज्यादा शातिर है। यह न केवल लोगों को मार रहा है, बल्कि लगातार अपना रास्ता बदलकर वन विभाग को चकमा दे रहा है।
ऑपरेशन 'थर्मल ड्रोन': बंगाल से बुलाई गई एक्सपर्ट टीम
16 मौतों के बाद अब वन विभाग ने 'वॉर फुटिंग' पर काम शुरू किया है।
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नाइट विजन टेक्नोलॉजी: डीएफओ ने बताया कि अब रात के अंधेरे में हाथी को खोजने के लिए थर्मल सेंसर ड्रोन उड़ाए जा रहे हैं, जो शरीर की गर्मी से हाथी की सही लोकेशन बता पाएंगे।
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ट्रेंकुलाइज की तैयारी: पश्चिम बंगाल से विशेष रूप से 'एलिफेंट स्क्वॉड' बुलाई गई है। यह टीम हाथी को देखते ही उसे ट्रेंकुलाइज (बेहोश) करने की कोशिश करेगी।
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ग्रामीणों में उबाल: लगातार बढ़ती लाशों के कारण ग्रामीणों का गुस्सा सातवें आसमान पर है। कई इलाकों में लोगों ने वन विभाग की गाड़ियों को रोकने की कोशिश की है।
सिस्टम की सुस्ती या प्रकृति का प्रकोप?
चाईबासा में जो हो रहा है, वह दिल दहला देने वाला है। 8 महीने की बच्ची से लेकर 60 साल के बुजुर्ग तक, कोई भी सुरक्षित नहीं है। अगर थर्मल ड्रोन और बंगाल की टीम भी फेल हो गई, तो भरबरिया जैसी घटना किसी और गांव में भी दोहराई जा सकती है। 16 मौतें केवल आंकड़ा नहीं, 16 परिवारों का उजड़ना है।
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