Bokaro Accident: रेलवे ट्रैक पार करते समय बड़ी चूक, कर्मचारी की दर्दनाक मौत!

बोकारो के गोमिया रेलवे स्टेशन के पास बड़ा हादसा! रेलवे ट्रैक पार करते समय पैसेंजर ट्रेन ने डीएवी स्कूल कर्मचारी मोतीलाल यादव को कुचला, मौके पर ही मौत। जानें पूरी खबर।

Apr 3, 2025 - 09:42
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Bokaro Accident: रेलवे ट्रैक पार करते समय बड़ी चूक, कर्मचारी की दर्दनाक मौत!
Bokaro Accident: रेलवे ट्रैक पार करते समय बड़ी चूक, कर्मचारी की दर्दनाक मौत!

झारखंड के बोकारो जिले से दर्दनाक खबर सामने आई है। गोमिया रेलवे स्टेशन के पास बुधवार को डीएवी स्कूल स्वांग में चपरासी के पद पर कार्यरत मोतीलाल यादव की पैसेंजर ट्रेन की चपेट में आने से मौत हो गई।

यह हादसा उस वक्त हुआ जब 50 वर्षीय मोतीलाल यादव रेलवे ट्रैक पार कर रहे थे। उन्हें शायद अंदाजा नहीं था कि यह गलती उनकी जिंदगी का अंत बन जाएगी।

  • घटनास्थल: गोमिया रेलवे स्टेशन से कुछ दूर पिपराडीह शिव मंदिर के पास

  • मृतक: मोतीलाल यादव, डीएवी स्कूल स्वांग में चपरासी

  • परिवार: पत्नी और एक बेटा

रेलवे पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए तेनुघाट अनुमंडलीय अस्पताल भेज दिया है।

आंखों का ऑपरेशन बना अनहोनी की वजह?

जानकारी के मुताबिक, मोतीलाल यादव ने 10 दिन पहले अपनी आंखों का ऑपरेशन कराया था। क्या ऑपरेशन के कारण उनकी दृष्टि कमजोर हो गई थी?

  • उन्होंने ऑपरेशन के बाद भी काम पर जाना जारी रखा

  • किसी जरूरी काम से रेलवे ट्रैक पार कर रहे थे

  • अचानक आती हुई पैसेंजर ट्रेन को देख नहीं सके और चपेट में आ गए

यह सवाल उठता है कि क्या उन्हें रेलवे ट्रैक पार करते समय सतर्क रहना चाहिए था, या फिर रेलवे को इस तरह की घटनाओं से बचाव के लिए कुछ कदम उठाने चाहिए?

रेलवे ट्रैक पर हादसे क्यों होते हैं?

भारत में हर साल सैकड़ों लोग रेलवे ट्रैक पार करने के दौरान हादसे का शिकार हो जाते हैं।

  • 2022 में भारतीय रेलवे में करीब 12,000 मौतें ट्रैक पार करने के दौरान हुईं

  • रेलवे ट्रैक पर पैदल चलना या पार करना कानूनी रूप से अपराध माना जाता है

  • कई बार सुनने और देखने में समस्या होने के कारण लोग ट्रेन की गति और दूरी का सही अनुमान नहीं लगा पाते

क्या रेलवे की भी गलती है?

गोमिया रेलवे स्टेशन के पास इस तरह की घटनाएं पहले भी हो चुकी हैं, लेकिन सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम नहीं हैं।

  • रेलवे ट्रैक के पास कोई चेतावनी बोर्ड नहीं था

  • आसपास फेंसिंग नहीं थी जिससे लोग ट्रैक पार न करें

  • लोकल पैसेंजर ट्रेनें अक्सर बिना हॉर्न दिए तेज गति से गुजरती हैं

अगर रेलवे समय रहते सतर्कता बरतता, तो शायद यह हादसा टाला जा सकता था।

परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़

मोतीलाल यादव की मौत के बाद उनका परिवार सदमे में है।

  • पत्नी का रो-रोकर बुरा हाल

  • बेटा बेसुध पड़ा है, पिता का साया हमेशा के लिए उठ गया

  • गांव के लोग भी इस घटना से स्तब्ध हैं

परिवार वालों का कहना है कि अगर रेलवे क्रॉसिंग पर सुरक्षा के उपाय होते, तो यह हादसा नहीं होता

क्या हादसों को रोका जा सकता है?

भारत में रेलवे हादसे आम हो गए हैं, लेकिन इनसे बचाव के लिए कुछ उपाय किए जा सकते हैं।

रेलवे ट्रैक पार करने पर रोक – रेलवे को सख्ती से लोगों को ट्रैक पार करने से रोकना चाहिए।
सुरक्षित पैदल पुल या अंडरपास – जहां रेलवे ट्रैक पार करने की जरूरत हो, वहां फुटओवर ब्रिज या अंडरपास बनाए जाने चाहिए।
CCTV कैमरों की निगरानी – ट्रेनों की स्पीड और लोगों की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए निगरानी बढ़ाई जानी चाहिए।
लोगों को सतर्क करना – रेलवे स्टेशन और ट्रैक के पास बड़े-बड़े चेतावनी बोर्ड लगाए जाएं ताकि लोग सतर्क रहें।

क्या मिलेगा परिवार को मुआवजा?

रेलवे की पॉलिसी के तहत, अगर कोई व्यक्ति रेलवे ट्रैक पार करने के दौरान हादसे का शिकार होता है, तो उसे मुआवजा नहीं मिलता।

  • यह केस रेलवे के अनाधिकृत क्रॉसिंग के तहत आता है

  • रेलवे अक्सर ऐसे मामलों में कोई आर्थिक सहायता नहीं देता

  • हां, अगर ट्रेन हादसा रेलवे की लापरवाही से हुआ हो, तो मुआवजा दिया जा सकता है

परिवार अब सरकार से मदद की गुहार लगा रहा है।

क्या कहती है पुलिस?

रेलवे पुलिस ने कहा कि ट्रेन चालक ने तेज ब्रेक लगाने की कोशिश की थी, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी

  • CCTV फुटेज खंगाले जा रहे हैं

  • प्रत्यक्षदर्शियों के बयान लिए जा रहे हैं

  • पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है

रेलवे ने भी मामले की जांच शुरू कर दी है, लेकिन सवाल अब भी बना हुआ है—क्या यह हादसा टल सकता था?

सावधानी ही बचाव है

गोमिया रेलवे स्टेशन के पास हुई यह घटना एक बार फिर से यह साबित करती है कि रेलवे ट्रैक पार करना कितना खतरनाक हो सकता है

  • अगर मोतीलाल यादव थोड़ी सतर्कता बरतते, तो शायद आज जिंदा होते

  • अगर रेलवे ट्रैक पर सुरक्षा उपाय होते, तो हादसा रोका जा सकता था

  • अगर लोगों में जागरूकता होती, तो ऐसे मामले कम होते

अब वक्त है कि रेलवे प्रशासन और आम जनता दोनों इस खतरे को गंभीरता से लें, क्योंकि एक छोटी सी लापरवाही, जिंदगी छीन सकती है।

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Nihal Ravidas निहाल रविदास, जिन्होंने बी.कॉम की पढ़ाई की है, तकनीकी विशेषज्ञता, समसामयिक मुद्दों और रचनात्मक लेखन में माहिर हैं।