Chhattisgarh Politic : 6 महीने बाद जेल से बाहर आएंगे कांग्रेस विधायक, जानें पूरा मामला
छत्तीसगढ़ की राजनीति में बड़ा मोड़! बलौदाबाजार हिंसा मामले में 6 महीने से जेल में बंद कांग्रेस विधायक देवेंद्र यादव को सुप्रीम कोर्ट ने जमानत दे दी। जानें पूरा मामला!

भिलाई: छत्तीसगढ़ की सियासत में बड़ा उलटफेर! सुप्रीम कोर्ट ने भिलाई नगर के कांग्रेस विधायक देवेंद्र यादव को जमानत दे दी है। 6 महीने से जेल में बंद विधायक को मिली इस राहत के बाद समर्थकों में जबरदस्त खुशी की लहर है। माना जा रहा है कि स्थानीय प्रक्रिया पूरी होने के बाद वे शुक्रवार शाम तक रायपुर जेल से रिहा हो सकते हैं।
कैसे फंसे थे देवेंद्र यादव?
10 जून 2024 को बलौदाबाजार में हुए हिंसक प्रदर्शन के दौरान कलेक्टर और एसपी कार्यालय को आग के हवाले कर दिया गया था।
इस प्रदर्शन में देवेंद्र यादव पर भीड़ को भड़काने का आरोप लगाया गया था।
इसके बाद पुलिस ने उनके खिलाफ केस दर्ज कर उन्हें 17 अगस्त 2024 को भिलाई स्थित उनके घर से गिरफ्तार कर लिया था।
6 महीने तक जेल में रहने के दौरान उनकी कई जमानत याचिकाएं निचली अदालतों में खारिज हो चुकी थीं।
सुप्रीम कोर्ट में क्या बोले देवेंद्र यादव?
सुप्रीम कोर्ट में देवेंद्र यादव की तरफ से दलील दी गई कि वह केवल सभा में शामिल हुए थे।
उन्होंने कोई भाषण नहीं दिया।
हिंसा के वक्त वे घटनास्थल पर मौजूद भी नहीं थे।
उनकी गिरफ्तारी उनके घर से हुई, जो घटनास्थल से कई किलोमीटर दूर था।
इन दलीलों को सुनने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने 20 फरवरी को उनकी जमानत याचिका मंजूर कर ली और अब वे जल्द ही जेल से बाहर आएंगे।
क्या है बलौदाबाजार हिंसा का पूरा मामला?
15 मई 2024 की रात बलौदाबाजार के मानाकोनी बस्ती में धार्मिक चिन्ह जैतखाम को क्षतिग्रस्त कर दिया गया था।
इस घटना से सतनामी समाज के लोग नाराज हो गए और प्रशासन के खिलाफ आंदोलन छेड़ दिया।
19 मई को तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया गया, लेकिन समाज के लोग संतुष्ट नहीं हुए।
10 जून को हुए प्रदर्शन में हालात बेकाबू हो गए, कलेक्टर-एसपी दफ्तर को आग के हवाले कर दिया गया और कई गाड़ियां जला दी गईं।
प्रदर्शन में देवेंद्र यादव की मौजूदगी का एक वीडियो भी वायरल हुआ था, जिसके बाद उन्हें आरोपी बनाया गया।
जमानत मिलते ही कांग्रेस में उत्साह, बीजेपी ने उठाए सवाल!
देवेंद्र यादव की जमानत पर कांग्रेस ने इसे ‘न्याय की जीत’ बताया और कहा कि विपक्षी साजिश के तहत उन्हें फंसाया गया था।
वहीं, बीजेपी ने सवाल उठाते हुए कहा कि बलवा, आगजनी और सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने वालों को जमानत कैसे मिल सकती है?
अब आगे क्या?
बलौदाबाजार की अदालत में सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों से जुड़े दस्तावेज पेश किए जाएंगे।
स्थानीय प्रक्रिया पूरी होते ही विधायक देवेंद्र यादव जेल से रिहा होंगे।
सियासी हलकों में इस फैसले का बड़ा असर पड़ सकता है, क्योंकि आगामी चुनाव में यह मुद्दा गरमा सकता है।
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