Oil War: सीधी चेतावनी, ट्रंप ने भारत को दिया 500% टैरिफ का अल्टीमेटम, रूस को छोड़ वेनेजुएला से तेल लेने का दबाव
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत पर 500% टैरिफ लगाने का खतरनाक ऐलान किया है। रूस से तेल की दोस्ती तोड़ने के लिए अमेरिका ने भारत के सामने वेनेजुएला का 'सीक्रेट ऑयल ऑफर' रखा है। इस वैश्विक आर्थिक युद्ध और रिलायंस जैसी कंपनियों की नई तैयारी की पूरी रोंगटे खड़े कर देने वाली रिपोर्ट यहाँ दी गई है वरना आप भी इस बड़े बदलाव से बेखबर रह जाएंगे।
वॉशिंगटन/नई दिल्ली, 10 जनवरी 2026 – दुनिया के दो सबसे बड़े लोकतंत्रों के बीच 'ब्लैक गोल्ड' यानी कच्चे तेल को लेकर ठन गई है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बेहद कड़ा रुख अपनाते हुए रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर 500% तक टैरिफ लगाने वाले बिल को हरी झंडी दे दी है। इस फैसले ने भारतीय निर्यातकों और सरकार के माथे पर चिंता की लकीरें खींच दी हैं। हालांकि, अमेरिका ने तनाव कम करने के लिए भारत को एक ऐसा विकल्प दिया है जो रूस की कमी को पूरा कर सकता है। वॉइट हाउस ने भारत को वेनेजुएला से भारी मात्रा में कच्चा तेल खरीदने का प्रस्ताव दिया है, जो फिलहाल अमेरिकी नियंत्रण के एक विशेष 'फ्रेमवर्क' के तहत होगा।
ट्रंप का 'टैरिफ बम': क्या मंहगा हो जाएगा भारतीय सामान?
अमेरिकी प्रशासन का मानना है कि रूस से तेल की लगातार खरीदारी यूक्रेन युद्ध को और लंबा खींच रही है।
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500% का खतरा: यदि भारत रूस से अपनी तेल निर्भरता कम नहीं करता है, तो अमेरिका भारतीय उत्पादों पर टैरिफ को मौजूदा 50% से बढ़ाकर 500% कर देगा। इसका मतलब है कि अमेरिकी बाजार में भारतीय सामान पांच गुना महंगे हो जाएंगे।
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राहत का रास्ता: अमेरिका ने ऑफर दिया है कि यदि भारत रूस को छोड़ वेनेजुएला से तेल लेना शुरू करता है, तो यह टैरिफ घटाकर मात्र 25% कर दिया जाएगा।
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बदलता आयात: आंकड़ों के मुताबिक, भारत का रूसी तेल आयात जो कभी 20 लाख बैरल रोजाना था, वह जनवरी 2026 में गिरकर 10 लाख बैरल के करीब पहुँच सकता है।
वेनेजुएला का 'खजाना' और भारत की रिफाइनरी
वेनेजुएला के पास दुनिया का सबसे बड़ा कच्चा तेल भंडार (303 अरब बैरल) है। अमेरिका अब इसी भंडार का इस्तेमाल रूस को आर्थिक रूप से अलग-थलग करने के लिए करना चाहता है।
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सीधा ऑफर: अमेरिका वेनेजुएला के पास रखे 3 से 5 करोड़ बैरल तेल को भारत और चीन को बेचने की तैयारी में है।
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रिलायंस का रुख: जामनगर में दुनिया की सबसे बड़ी रिफाइनरी चलाने वाली रिलायंस इंडस्ट्रीज ने स्पष्ट किया है कि वह वेनेजुएला का तेल खरीदने के लिए तैयार है। रिलायंस की रिफाइनरी वेनेजुएला के 'हैवी क्रूड' को प्रोसेस करने के लिए दुनिया में सबसे उपयुक्त मानी जाती है।
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सरकारी कंपनियां: इंडियन ऑयल और एचपीसीएल (HPCL) भी इस डील को लेकर अमेरिकी अधिकारियों के साथ संपर्क में हैं।
तेल की वैश्विक जंग: एक तुलनात्मक विश्लेषण (Oil Market Snapshot)
| कारक (Factors) | रूस से व्यापार (With Russia) | वेनेजुएला से व्यापार (With Venezuela) |
| अमेरिकी रुख | सख्त प्रतिबंध और 500% टैरिफ | अमेरिकी नियंत्रण वाला 'कंट्रोल्ड फ्रेमवर्क' |
| टैरिफ की दर | 50% से 500% तक बढ़ोत्तरी | घटकर मात्र 25% तक संभव |
| तेल की उपलब्धता | वर्तमान में 12 लाख बैरल/दिन | 50 मिलियन बैरल का तात्कालिक भंडार |
| आर्थिक प्रभाव | यूक्रेन युद्ध की फंडिंग का आरोप | ट्रंप के 'नए मार्केट' प्लान का हिस्सा |
इतिहास का पन्ना: जब वेनेजुएला और भारत बने थे सबसे बड़े साझेदार
भारत और वेनेजुएला के तेल रिश्तों का इतिहास काफी पुराना और गहरा है। साल 2012 से 2015 के बीच भारत, वेनेजुएला के तेल का दूसरा सबसे बड़ा खरीदार हुआ करता था। रिलायंस और एस्सार (अब नायरा एनर्जी) जैसी कंपनियों ने अपनी रिफाइनरियों को खास तौर पर वेनेजुएला के 'भारी तेल' के हिसाब से डिजाइन किया था। हालांकि, 2019 में ट्रंप प्रशासन द्वारा लगाए गए कड़े प्रतिबंधों ने इस व्यापार को लगभग शून्य कर दिया था। अब 2026 में इतिहास खुद को दोहरा रहा है, लेकिन एक ट्विस्ट के साथ। ट्रंप अब खुद वेनेजुएला को रूस के खिलाफ एक हथियार के रूप में इस्तेमाल कर रहे हैं और चाहते हैं कि भारत फिर से वेनेजुएला का बड़ा बाजार बने।
भारत पर दबाव: 144 अरब यूरो का 'रूसी बिल'
यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद से भारत ने रूस से भारी डिस्काउंट पर करीब 144 अरब यूरो का तेल खरीदा है। अमेरिका का तर्क है कि भारत का यह पैसा सीधे तौर पर रूसी सेना को मजबूती दे रहा है।
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डिस्काउंट का खेल: पहले रूस डिस्काउंट दे रहा था, लेकिन अब अमेरिका वेनेजुएला के तेल पर उससे भी बड़ी छूट देने का संकेत दे रहा है।
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ग्लोबल रिजर्व: वेनेजुएला के पास दुनिया के कुल तेल भंडार का 20 फीसदी हिस्सा है। ट्रंप चाहते हैं कि अमेरिकी कंपनियां वहां निवेश करें और इस तेल को भारत जैसे बड़े उपभोक्ताओं तक पहुँचाएं।
कूटनीति की अग्निपरीक्षा
भारत के लिए यह फैसला आसान नहीं होगा। रूस एक पुराना और भरोसेमंद रणनीतिक साझेदार है, जबकि अमेरिका सबसे बड़ा व्यापारिक बाजार। 500% टैरिफ भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए किसी झटके से कम नहीं होगा। ऐसे में वेनेजुएला का तेल भारत के लिए एक 'सुरक्षित निकास द्वार' साबित हो सकता है।
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