Adityapur Poison: आदित्यपुर की आशियाना सोसाइटी और बस्तियों में घुसा इंडस्ट्रियल कचरे का जहर, आधी रात जल रहा केमिकल, सांस लेना हुआ मुहाल

आदित्यपुर के विद्युत नगर और रेल लाइन के पास जहरीला इंडस्ट्रियल कचरा जलाने से आशियाना आदित्य अपार्टमेंट समेत कई बस्तियों में प्रदूषण का संकट पैदा हो गया है। रात के अंधेरे में जल रहे इस घातक केमिकल और बच्चों-बुजुर्गों की बिगड़ती सेहत की पूरी रिपोर्ट यहाँ देखें।

Apr 6, 2026 - 15:03
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Adityapur Poison: आदित्यपुर की आशियाना सोसाइटी और बस्तियों में घुसा इंडस्ट्रियल कचरे का जहर, आधी रात जल रहा केमिकल, सांस लेना हुआ मुहाल
Adityapur Poison: आदित्यपुर की आशियाना सोसाइटी और बस्तियों में घुसा इंडस्ट्रियल कचरे का जहर, आधी रात जल रहा केमिकल, सांस लेना हुआ मुहाल

आदित्यपुर/जमशेदपुर, 6 अप्रैल 2026 – औद्योगिक नगरी आदित्यपुर इन दिनों एक गंभीर 'पर्यावरण आपातकाल' की दहलीज पर खड़ी है। विद्युत नगर बस्ती और रेल लाइन के समीप नियमों को ताक पर रखकर भारी मात्रा में जहरीला इंडस्ट्रियल कचरा जलाया जा रहा है। इस कचरे से निकलने वाला घना काला और दमघोंटू धुआं सीधे तौर पर वायुमंडल में जहर घोल रहा है। सबसे भयावह स्थिति ‘आशियाना आदित्य’ जैसे पॉश अपार्टमेंट और आसपास की बस्तियों की है, जहाँ के निवासी अब अपने ही घरों में घुटकर जीने को मजबूर हैं। यह केवल प्रदूषण नहीं, बल्कि स्थानीय प्रशासन की नाक के नीचे पनपता एक बड़ा जन-स्वास्थ्य संकट है।

घरों में घुस रहा जहर: 'आशियाना आदित्य' के निवासियों का दर्द

जैसे ही हवा का रुख बदलता है, आदित्यपुर की गगनचुंबी इमारतों और बस्तियों में मौत का धुआं दस्तक देने लगता है।

  • फ्लैट्स में घुटन: आशियाना आदित्य अपार्टमेंट के निवासियों का कहना है कि भारी कीमत चुकाकर उन्होंने सुकून के लिए यहाँ घर लिए थे, लेकिन अब उन्हें मजबूरन जहरीले प्रदूषकों को अपने फेफड़ों में भरना पड़ रहा है।

  • अदृश्य हत्यारा: कचरे के ढेर से निकलने वाला यह धुआं इतना घातक है कि घरों की खिड़कियां बंद रखने के बावजूद इसकी गंध और कालिख कमरों के भीतर तक पहुँच रही है।

  • मजबूर मजदूर: विद्युत नगर बस्ती में रहने वाले मजदूर वर्ग के लोग इस प्रदूषण की सबसे पहली और सीधी चपेट में आते हैं, जिनके पास इस जहर से बचने का कोई वैकल्पिक साधन नहीं है।

अंधेरे का खेल: तड़के और रात में जल रहा है 'कैमिकल वेस्ट'

कचरा जलाने वाले अज्ञात तत्व अब विरोध से बचने के लिए बेहद शातिर तरीका अपना रहे हैं।

  1. अवैध डंपिंग: पिछले कुछ समय से गुपचुप तरीके से यहाँ औद्योगिक कचरा लाकर डंप किया जा रहा है। इसमें प्लास्टिक, रबर और अज्ञात केमिकल शामिल होते हैं।

  2. तड़के का समय: स्थानीय लोगों का आरोप है कि रात के अंधेरे या सुबह 3 से 4 बजे के बीच कचरे के ढेर में आग लगा दी जाती है, ताकि जब तक लोग सोकर उठें, धुआं पूरे इलाके में फैल चुका हो।

  3. प्रशासनिक विफलता: पूर्व में नगर निगम की टीम द्वारा निरीक्षण के बाद कुछ दिनों तक यह गतिविधि थमी थी, लेकिन अब यह दोबारा और भी बड़े पैमाने पर शुरू हो गई है।

विकास या विनाश?

एशिया के सबसे बड़े औद्योगिक क्षेत्रों में से एक आदित्यपुर का इतिहास हमेशा से उत्पादन और रोजगार से जुड़ा रहा है, लेकिन यहाँ का कचरा प्रबंधन हमेशा से विवादों में रहा है।

  • नियमों की अनदेखी: झारखंड प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (JSPCB) के स्पष्ट दिशा-निर्देशों के बावजूद, कई इकाइयां अपने कचरे का सही निस्तारण करने के बजाय उसे खुले में फेंक देती हैं।

  • बढ़ती बीमारियाँ: इस जहरीले धुएं के कारण इलाके के बच्चों और बुजुर्गों में अस्थमा, सांस लेने में तकलीफ और आंखों में लगातार जलन की शिकायतें बढ़ रही हैं।

  • उद्यमियों की चिंता: स्थानीय उद्यमियों और कामगारों ने भी इस पर गहरी चिंता व्यक्त की है। उनका मानना है कि कुछ अज्ञात तत्वों की इस करतूत से पूरे औद्योगिक क्षेत्र की छवि खराब हो रही है।

अब आर-पार की जंग: स्थानीय नागरिकों ने दी चेतावनी

आदित्यपुर के नागरिकों ने अब प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोलने की तैयारी कर ली है।

  • सख्त कार्रवाई की मांग: स्थानीय नागरिकों ने जिला प्रशासन और नगर निगम से मांग की है कि इस क्षेत्र में तत्काल पेट्रोलिंग बढ़ाई जाए और कचरा डंप करने वाले वाहनों को जब्त किया जाए।

  • CCTV और निगरानी: निवासियों ने मांग की है कि रेल लाइन के समीप वाले इन 'हॉटस्पॉट' पर सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएं ताकि रात में कचरा जलाने वालों की पहचान हो सके।

  • अंतिम चेतावनी: यदि इस पर तत्काल रोक नहीं लगाई गई, तो आशियाना आदित्य और विद्युत नगर के लोग सड़कों पर उतरकर उग्र आंदोलन करने को मजबूर होंगे।

आदित्यपुर में इंडस्ट्रियल कचरे का जलना केवल एक पर्यावरण मुद्दा नहीं है, बल्कि यह सीधे तौर पर लोगों के जीवन के अधिकार का हनन है। जब लोग लाखों रुपये खर्च कर एक घर खरीदते हैं, तो वे कम से कम शुद्ध हवा की उम्मीद तो करते ही हैं। प्रशासन का मौन उन अज्ञात तत्वों को बढ़ावा दे रहा है जो चंद पैसों के लालच में हजारों लोगों की सेहत से खिलवाड़ कर रहे हैं। अब देखना यह है कि नगर निगम और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड इस 'जहरीले खेल' को रोकने के लिए क्या कदम उठाता है। फिलहाल, आदित्यपुर की हवा में घुला यह जहर हर दिन लोगों को बीमार बना रहा है।

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Manish Tamsoy मनीष तामसोय कॉमर्स में मास्टर डिग्री कर रहे हैं और खेलों के प्रति गहरी रुचि रखते हैं। क्रिकेट, फुटबॉल और शतरंज जैसे खेलों में उनकी गहरी समझ और विश्लेषणात्मक क्षमता उन्हें एक कुशल खेल विश्लेषक बनाती है। इसके अलावा, मनीष वीडियो एडिटिंग में भी एक्सपर्ट हैं। उनका क्रिएटिव अप्रोच और टेक्निकल नॉलेज उन्हें खेल विश्लेषण से जुड़े वीडियो कंटेंट को आकर्षक और प्रभावी बनाने में मदद करता है। खेलों की दुनिया में हो रहे नए बदलावों और रोमांचक मुकाबलों पर उनकी गहरी पकड़ उन्हें एक बेहतरीन कंटेंट क्रिएटर और पत्रकार के रूप में स्थापित करती है।