Jamshedpur Fun: जमशेदपुर के इस स्कूल में नेहरू जयंती मनाई गई, बच्चे चिड़ियाघर जाकर यह बड़ा सबक सीख आए
जमशेदपुर के जेवियर पब्लिक स्कूल में चाचा नेहरू का जन्मदिन 14 की जगह 15 नवंबर को मनाया गया है। कक्षा KG-I से IV तक के बच्चों को चिड़ियाघर भ्रमण पर ले जाया गया। वन प्राणियों और उनके संरक्षण का महत्व बच्चों को समझाया गया। सभी बच्चों ने इस शैक्षणिक भ्रमण का भरपूर आनंद लिया। जानिए इस कार्यक्रम का पूरा विवरण और बच्चों को दिए गए पर्यावरण संरक्षण के महत्वपूर्ण संदेश।
जमशेदपुर, 15 नवंबर 2025 – पंडित जवाहरलाल नेहरू का जन्मदिन, जिसे पूरे देश में 'बाल दिवस' के रूप में मनाया जाता है, बच्चों के लिए एक विशेष महत्व रखता है। जमशेदपुर के छोटा गोविंदपुर स्थित जेवियर पब्लिक स्कूल में भी यह उत्सव परंपरागत रूप से मनाया गया, लेकिन एक खास बदलाव के साथ। 14 नवंबर को अवकाश होने के कारण, विद्यालय ने यह कार्यक्रम आज, 15 नवंबर 2025, शनिवार को बड़े धूमधाम से आयोजित किया। इस दौरान बच्चों को चिड़ियाघर भ्रमण पर ले जाया गया, जहां सिर्फ मौज-मस्ती ही नहीं, बल्कि वन्यजीव संरक्षण का एक गहरा और महत्वपूर्ण सबक भी दिया गया। सवाल यह है कि क्या यह शैक्षणिक भ्रमण सिर्फ मनोरंजन था, या स्कूल ने बच्चों को इतिहास के साथ पर्यावरण संरक्षण का एक अनमोल उपहार भी दिया?
नेहरू जयंती: 14 की जगह 15 नवंबर को उत्सव
भारत के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू का बच्चों के प्रति विशेष स्नेह था, जिसके कारण उनके जन्मदिन को बाल दिवस के रूप में मनाया जाता है।
-
उत्सव का आयोजन: जेवियर पब्लिक स्कूल में 14 नवंबर (शुक्रवार) को अवकाश के चलते उत्सव को एक दिन आगे बढ़ाया गया और 15 नवंबर को धूमधाम से मनाया गया।
-
शारीरिक भ्रमण: इस अवसर पर कक्षा KG-I से लेकर कक्षा - IV तक के छोटे बच्चों के लिए एक खास कार्यक्रम के रूप में चिड़ियाघर भ्रमण का आयोजन किया गया।
चिड़ियाघर भ्रमण: वन्यजीव संरक्षण का सबक
स्कूल का उद्देश्य इस भ्रमण के माध्यम से बच्चों को केवल जंगली जानवरों को दिखाना नहीं था, बल्कि उन्हें एक महत्वपूर्ण पर्यावरणीय संदेश देना था।
-
शैक्षणिक उद्देश्य: बच्चों को वन प्राणियों और उनके संरक्षण के महत्व के बारे में बताया गया।
-
महत्वपूर्ण संदेश: उन्हें समझाया गया कि वन और उसमें रहने वाले जीवों का संरक्षण करना क्यों अनिवार्य है, ताकि आने वाली पीढ़ियां भी इस प्राकृतिक छटा और दुर्लभ जीवों को देखकर आनंदित हो सकें। यह बात बच्चों के लिए पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी का पहला पाठ थी।
नेहरू का आदर्श: शिक्षा और प्रकृति से जोड़ना
पंडित नेहरू का मानना था कि बच्चों का भविष्य देश का भविष्य है। उनका जोर हमेशा शिक्षा को सिर्फ किताबों तक सीमित न रखकर, उसे व्यावहारिक और प्राकृतिक दुनिया से जोड़ने पर रहा।
-
नेहरू की दूरदर्शिता: इस तरह के शैक्षणिक भ्रमण पंडित नेहरू की दूरदर्शिता को दर्शाते हैं, जहां बच्चों को खेल-खेल में गंभीर विषयों का ज्ञान दिया जाता है।
-
कार्यक्रम की सफलता: सभी बच्चों ने इस कार्यक्रम का भरपूर आनंद लिया, जो शिक्षकों और शिक्षिकाओं की उपस्थिति और देखरेख में सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।
जेवियर पब्लिक स्कूल ने इस तरह बाल दिवस को केवल मनोरंजन का दिन न बनाकर, ज्ञान और जिम्मेदारी का दिन बना दिया।
What's Your Reaction?


