Manoharpur Arrest: नक्सली मददगार धरे गए, बालिबा से हुई दो बड़ी गिरफ्तारियां, सारंडा के जंगलों में पुलिस की सर्जिकल स्ट्राइक

पश्चिमी सिंहभूम के छोटानागरा में पुलिस ने नक्सलियों को रसद पहुँचाने और सुरक्षा बलों की जासूसी करने वाले दो मददगारों, विकास और सुदर्शन को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। सारंडा के दुर्गम इलाकों में सक्रिय नक्सलियों की रसद श्रृंखला को तोड़ने वाली इस बड़ी कार्रवाई और पुलिस के गुप्त ऑपरेशन की पूरी हकीकत यहाँ दी गई है।

Dec 22, 2025 - 13:37
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Manoharpur Arrest: नक्सली मददगार धरे गए, बालिबा से हुई दो बड़ी गिरफ्तारियां, सारंडा के जंगलों में पुलिस की सर्जिकल स्ट्राइक
Manoharpur Arrest: नक्सली मददगार धरे गए, बालिबा से हुई दो बड़ी गिरफ्तारियां, सारंडा के जंगलों में पुलिस की सर्जिकल स्ट्राइक

मनोहरपुर (पश्चिमी सिंहभूम), 22 दिसंबर 2025 – झारखंड के नक्सल प्रभावित पश्चिमी सिंहभूम जिले से सुरक्षा बलों के लिए एक बड़ी सफलता की खबर आई है। मनोहरपुर प्रखंड के छोटानागरा थाना क्षेत्र में पुलिस ने एक सटीक और गुप्त ऑपरेशन के जरिए प्रतिबंधित नक्सली संगठन को रसद और सूचनाएं पहुँचाने वाले दो मुख्य मददगारों को दबोच लिया है। बालिबा गांव से हुई इन गिरफ्तारियों ने नक्सलियों के सप्लाई नेटवर्क की कमर तोड़ दी है। गिरफ्तार किए गए विकास होनहागा और सुदर्शन बरजो न केवल नक्सलियों को भोजन और जरूरी सामान पहुँचा रहे थे, बल्कि वे क्षेत्र में आपराधिक गतिविधियों को बढ़ावा देने में भी सक्रिय थे।

इतिहास: सारंडा का जंगल और नक्सलियों का 'रसद तंत्र'

पश्चिमी सिंहभूम का सारंडा जंगल ऐतिहासिक रूप से अपनी सघनता और दुर्गम रास्तों के लिए जाना जाता है। $1990$ के दशक के अंत से ही यह इलाका नक्सली गतिविधियों का केंद्र रहा है। नक्सलियों की ताकत उनका हथियार नहीं, बल्कि उनका सप्लाई नेटवर्क (Logistics Network) होता है, जिसमें स्थानीय स्तर पर कुछ लोग उन्हें राशन, दवाइयां और पुलिस की गतिविधियों की जानकारी पहुँचाते हैं। पुलिस ने बीते वर्षों में 'ऑपरेशन एनाकोंडा' जैसे कई अभियान चलाकर इस तंत्र को कमजोर किया है। बालिबा और छोटानागरा जैसे इलाकों में नक्सलियों की पैठ कम करना हमेशा से सुरक्षा बलों के लिए एक बड़ी चुनौती रही है। आज की कार्रवाई इसी ऐतिहासिक संघर्ष की एक नई और सफल कड़ी है।

गुप्त सूचना और घेराबंदी: ऐसे पकड़े गए 'स्लीपर सेल'

डीएसपी जयदीप लकड़ा के नेतृत्व में हुई यह कार्रवाई पूरी तरह से खुफिया तंत्र की सूचना पर आधारित थी।

  • सूचना का आधार: पुलिस को पुख्ता खबर मिली थी कि बालिबा गांव के दो व्यक्ति गुप्त रूप से जंगलों के भीतर रसद सामग्री (चावल, तेल, दवाइयां और बैटरी) की बड़ी खेप पहुँचाने की योजना बना रहे हैं।

  • तत्काल एक्शन: छोटानागरा थाना पुलिस ने बिना वक्त गंवाए इलाके की घेराबंदी की। पुलिस को देखते ही आरोपियों ने छिपने का प्रयास किया, लेकिन टीम ने विकास होनहागा और सुदर्शन बरजो को उनके ठिकानों से धर दबोचा।

अपराध और नक्सलवाद का गठजोड़

जांच में यह भी सामने आया है कि ये दोनों केवल सामान नहीं पहुँचा रहे थे, बल्कि ये नक्सलियों के 'कान और आंख' का काम भी कर रहे थे।

  1. सुरक्षा बलों की निगरानी: ये आरोपी क्षेत्र में पुलिस और सीआरपीएफ (CRPF) की आवाजाही पर नजर रखते थे।

  2. अपराध को बढ़ावा: डीएसपी के अनुसार, ये नक्सलियों के नाम पर क्षेत्र में भय पैदा कर स्थानीय व्यापारियों से लेवी वसूलने और अपराध को बढ़ावा देने में भी संलिप्त पाए गए हैं।

गिरफ्तारी का संक्षिप्त विवरण (Quick Facts)

विवरण जानकारी
गिरफ्तार आरोपी विकास होनहागा और सुदर्शन बरजो
निवासी बालिबा गांव, मनोहरपुर
आरोप नक्सलियों को रसद पहुँचाना और जासूसी
थाना क्षेत्र छोटानागरा थाना
अगली कार्रवाई न्यायिक हिरासत में जेल भेजा गया

स्थानीय लोगों ने ली राहत की सांस

मनोहरपुर और छोटानागरा के आम ग्रामीणों ने पुलिस की इस कार्रवाई का खुलकर स्वागत किया है। लंबे समय से ये ग्रामीण नक्सलियों और उनके मददगारों के बीच पिस रहे थे। स्थानीय निवासियों का मानना है कि जब तक नक्सलियों के मददगारों को नहीं पकड़ा जाएगा, तब तक क्षेत्र में शांति और विकास की सरकारी योजनाएं धरातल पर नहीं उतर पाएंगी। "पुलिस की यह कार्रवाई हमें सुरक्षा का अहसास कराती है," यह कहना है एक स्थानीय ग्रामीण का।

नक्सलियों के खिलाफ निर्णायक जंग

पश्चिमी सिंहभूम पुलिस ने स्पष्ट संदेश दे दिया है कि नक्सलियों को किसी भी प्रकार का सहयोग देने वाले को बख्शा नहीं जाएगा। विकास और सुदर्शन की गिरफ्तारी के बाद अब पुलिस उनसे मिले सुरागों के आधार पर जंगलों में छिपे नक्सलियों के मुख्य ठिकानों पर प्रहार करने की तैयारी में है। सारंडा में अब शांति की उम्मीद एक बार फिर से जागी है।

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Manish Tamsoy मनीष तामसोय कॉमर्स में मास्टर डिग्री कर रहे हैं और खेलों के प्रति गहरी रुचि रखते हैं। क्रिकेट, फुटबॉल और शतरंज जैसे खेलों में उनकी गहरी समझ और विश्लेषणात्मक क्षमता उन्हें एक कुशल खेल विश्लेषक बनाती है। इसके अलावा, मनीष वीडियो एडिटिंग में भी एक्सपर्ट हैं। उनका क्रिएटिव अप्रोच और टेक्निकल नॉलेज उन्हें खेल विश्लेषण से जुड़े वीडियो कंटेंट को आकर्षक और प्रभावी बनाने में मदद करता है। खेलों की दुनिया में हो रहे नए बदलावों और रोमांचक मुकाबलों पर उनकी गहरी पकड़ उन्हें एक बेहतरीन कंटेंट क्रिएटर और पत्रकार के रूप में स्थापित करती है।