Dayal Reunion: दोस्ती महकी, 40 साल बाद गले मिले 1984 बैच के यार, जमशेदपुर में यादों का सैलाब साहिबगंज
जमशेदपुर के होटल दयाल में 1984 बैच के पूर्व छात्रों का ऐतिहासिक पुनर्मिलन समारोह संपन्न हुआ जहाँ देश-विदेश से आए 25 पुराने दोस्तों ने चार दशक बाद एक-दूसरे को गले लगाया। "दोस्त जो अक्सर याद आते हैं" थीम पर सजी इस शाम और स्कूल-कॉलेज की उन अनसुनी शरारतों की पूरी भावुक दास्तां यहाँ दी गई है वरना आप भी दोस्ती की इस मिसाल को देखने से चूक जाएंगे।
जमशेदपुर, 22 दिसंबर 2025 – वक्त की धूल रिश्तों पर जमी जरूर थी, लेकिन रविवार की शाम साकची स्थित होटल दयाल में जब 1984 बैच के पुराने यार मिले, तो वह धूल यादों की बारिश में धुल गई। "दोस्त जो अक्सर याद आते हैं" के नारे के साथ आयोजित इस वार्षिक मिलन समारोह में करीब 41 साल का लंबा इंतजार खत्म हुआ। जमशेदपुर की मिट्टी में पले-बढ़े ये पूर्व छात्र आज दुनिया के अलग-अलग कोनों में सफल पदों पर हैं, लेकिन रविवार को वे न तो मैनेजर थे और न ही बिजनेसमैन—वे सिर्फ वही शरारती दोस्त थे जो चार दशक पहले एक-दूसरे की टिफिन चोरी किया करते थे।
इतिहास: 1984 का वह स्वर्णिम दौर और जमशेदपुर
साल 1984 भारतीय इतिहास और जमशेदपुर के लिए भी बेहद महत्वपूर्ण था। वह दौर था जब जमशेदपुर की सड़कों पर टाटा स्टील की धड़कनें सुनाई देती थीं और शहर के स्कूलों-कॉलेजों में शिक्षा के साथ-साथ संस्कारों की नींव रखी जा रही थी। 1984 का बैच उस समय का गवाह है जब बिना इंटरनेट और मोबाइल के दोस्ती केवल साइकिल की सवारी और स्कूल के पीछे वाले मैदान में पनपती थी। आज 40 साल बाद भी उस बैच की एकता यह साबित करती है कि जमशेदपुर के संस्कारों ने उन रिश्तों को कितनी मजबूती दी थी।
आंखें नम और चेहरे पर मुस्कान: पुनर्मिलन की खास झलकियां
समारोह में भाग लेने के लिए 25 पूर्व छात्र देश-विदेश के विभिन्न शहरों से पहुँचे। होटल का हॉल उस वक्त तालियों और भावुक सिसकियों से गूंज उठा जब कई दोस्त एक-दूसरे को पहचानते हुए गले मिले।
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स्मृति साझाकरण सत्र: सत्र के दौरान हर किसी ने अपने छात्र जीवन के उन अविस्मरणीय पलों को याद किया जिन्हें वे आज भी अपनी व्यस्त जिंदगी में सहेज कर रखे हुए हैं।
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शरारतों का पिटारा: पुराने दिनों की मस्ती और शिक्षकों के दिए गए 'निकनेम' (उपनाम) जब फिर से पुकारे गए, तो हॉल ठहाकों से भर गया।
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भावुक क्षण: कॉलेज के दिनों के संघर्ष और वह पुरानी कैंटीन की चाय की यादों ने कई आंखों को नम कर दिया। यह केवल मिलन नहीं, बल्कि अपनी जड़ों की ओर लौटने जैसा था।
अनुभवों का संगम और प्रेरणा
आज के दौर में सफल हो चुके इन पूर्व छात्रों ने अपने व्यावसायिक और व्यक्तिगत जीवन के उतार-चढ़ाव साझा किए। अमर, अजय, वरुण और आलोक जैसे मित्रों ने बताया कि कैसे उनकी पुरानी दोस्ती ने मुश्किल वक्त में उन्हें हौसला दिया। सुजाता, कंचन और किरण जैसी सहेलियों ने अपने संवाद से माहौल को और भी आत्मीय बना दिया। आयोजकों का कहना था कि 1984 का बैच हमेशा अपनी सौहार्द और एकता के लिए मिसाल रहा है।
समारोह का संक्षिप्त विवरण (Event Snapshot)
| विवरण | जानकारी |
| बैच | 1984 (जमशेदपुर) |
| स्थान | होटल दयाल, साकची |
| थीम | "दोस्त जो अक्सर याद आते हैं" |
| उपस्थिति | 25 पूर्व छात्र (देश-विदेश से) |
| प्रमुख चेहरे | बृज, रणधीर, अजय श्रीवास्तव, फणीन्द्र, सतेन्द्र |
अगली पारी की तैयारी
समारोह के समापन पर सभी ने संकल्प लिया कि वे इस परंपरा को नियमित रखेंगे। कार्यक्रम में मुख्य रूप से बृज, रणधीर, अमर, अजय, किरण, वरुण, आलोक, अजय श्रीवास्तव, सुजाता, कंचन, फणीन्द्र, सतेन्द्र, मनोज, राज कुमार और शशि ने सक्रिय भूमिका निभाई। इन पुराने साथियों ने तय किया कि वे न केवल मिलेंगे, बल्कि समाज के लिए भी कुछ सकारात्मक योगदान देंगे।
दोस्ती का कोई रिटायरमेंट नहीं होता
होटल दयाल से बाहर निकलते वक्त सबके चेहरे पर एक अलग ही चमक थी। 1984 बैच के इस पुनर्मिलन ने यह सिखा दिया कि पद, पैसा और उम्र चाहे कितनी भी बढ़ जाए, पुराने दोस्तों के बीच बैठकर इंसान फिर से वही बच्चा बन जाता है। जमशेदपुर की इस शाम ने दोस्ती की एक नई इबारत लिख दी है।
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