Tatanagar Rescue: टाटानगर स्टेशन पर 13 नाबालिगों की जिंदगी बची, तमिलनाडु ले जाते दो मानव तस्कर आरपीएफ द्वारा गिरफ्तार
जमशेदपुर के टाटानगर स्टेशन पर 13 नाबालिगों (एक बच्चा और 12 बच्चियों) को तमिलनाडु के सलेम ले जाया जा रहा था। आरपीएफ के उड़न दस्ते को इन मानव तस्करों पर शक हुआ और उन्होंने उन्हें पकड़ा। 13 से 16 वर्ष की उम्र के इन नाबालिगों को काम का झांसा दिया गया था। सुनील और जमबीरा नामक दोनों तस्करों को गिरफ्तार करने के बाद चाइल्ड लाइन को सौंपा गया है।
जमशेदपुर, 19 नवंबर 2025 – जमशेदपुर का टाटानगर रेलवे स्टेशन एक बार फिर मानव तस्करी के नेटवर्क को तोड़ने का गवाह बना है। आरपीएफ (RPF) के उड़न दस्ते ने सघन जांच के दौरान दो मानव तस्करों को गिरफ्तार किया है, जो 13 नाबालिगों को बेहतर काम दिलाने के झूठे वादे के साथ झारखंड से हजारों किलोमीटर दूर तमिलनाडु राज्य के सलेम लेकर जा रहे थे। रेस्क्यू किए गए नाबालिगों में 12 बच्चियां और 1 बच्चा शामिल है, जिनकी उम्र 13 से 16 वर्ष के बीच बताई जाती है। यह घटना एक बार फिर यह चिंता जाहिर करती है कि झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम जैसे गरीब जिले अभी भी मानव तस्करों के लिए एक आसान शिकार (soft target) क्यों बने हुए हैं?
13 नाबालिगों को तमिलनाडु ले जाने की साजिश
टाटानगर रेलवे स्टेशन पर आरपीएफ का उड़न दस्ता नियमित जांच कर रहा था, तभी उन्हें एक जगह पर बड़ी संख्या में नाबालिग और केवल दो वयस्क दिखाई दिए।
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शक की वजह: टाटानगर आरपीएफ के अफसर इंचार्ज राकेश मोहन ने बताया कि इतनी बड़ी संख्या में नाबालिगों का एक ही स्थान पर मौजूद होना और केवल दो वयस्कों का साथ होना संदिग्ध लगा।
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गुमराह करने की कोशिश: पूछताछ में वयस्कों ने सटीक जवाब नहीं दिया, जिसके बाद सभी को आरपीएफ थाना लाया गया। गहन जांच में खुलासा हुआ कि ये सभी नाबालिग पश्चिम सिंहभूम जिले के निवासी हैं और इन्हें बेहतर काम दिलवाने के नाम पर तमिलनाडु के सलेम लेकर जाया जा रहा था।
गिरफ्तार किए गए दो तस्कर
मानव तस्करी के इस रैकेट में शामिल दोनों आरोपी भी पश्चिम सिंहभूम जिले के ही हैं।
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तस्करों की पहचान: आरपीएफ ने तत्काल कार्रवाई करते हुए दोनों मानव तस्करों को गिरफ्तार कर लिया। उनकी पहचान सुनील और जमबीरा के रूप में हुई है।
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मानव तस्करी का इतिहास: झारखंड, खासकर पश्चिमी सिंहभूम और सिमडेगा जैसे जिले, हमेशा से मानव तस्करों के निशाने पर रहे हैं। गरीबी और शिक्षा की कमी के कारण यहां के नाबालिगों को अक्सर मेट्रो शहरों में नौकरी का झांसा देकर ले जाया जाता है।
बच्चों को चाइल्ड लाइन को सौंपा
आरपीएफ ने त्वरित कानूनी प्रक्रिया पूरी करने के बाद सभी 13 नाबालिगों को चाइल्ड लाइन (Child Line) को सौंप दिया है।
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आगे की प्रक्रिया: चाइल्ड लाइन की टीम अब इन नाबालिगों के बयान दर्ज करने और उन्हें उनके परिजनों को सुरक्षित वापस सौंपने की प्रक्रिया पूरी करेगी।
टाटानगर आरपीएफ की यह सतर्कता और कार्रवाई लाखों माता-पिता के लिए एक बड़ी राहत है, जिनके बच्चे अभी भी ऐसे तस्करों के जाल में फंस सकते हैं।
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