Ghatsila Achievement: सर्जेंट श्रुति रॉय को राज्यपाल ने किया सम्मानित, पूरे झारखंड को गर्व!
घाटशिला की श्रुति रॉय को एनसीसी में शानदार प्रदर्शन के लिए झारखंड के राज्यपाल ने सम्मानित किया। जानिए, कैसे उन्होंने यह उपलब्धि हासिल की और क्यों पूरे झारखंड को उन पर गर्व है?

घाटशिला: झारखंड के संत नंदलाल स्मृति विद्या मंदिर की छात्रा सर्जेंट श्रुति रॉय ने एक और बड़ी उपलब्धि अपने नाम कर ली है। एनसीसी में उत्कृष्ट योगदान के लिए उन्हें झारखंड के राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने विशेष सम्मान से नवाजा। यह सम्मान 25 फरवरी को रांची में आयोजित एक भव्य समारोह में दिया गया, जहां कई सेना अधिकारी, एनसीसी अधिकारी, एएनओ और शिक्षाविद मौजूद थे।
श्रुति रॉय: घाटशिला की बेटी ने बढ़ाया झारखंड का मान
सर्जेंट श्रुति रॉय कक्षा 9वीं की छात्रा हैं और एक मेधावी एनसीसी कैडेट भी। उन्होंने CATC, IGGBC, RDC जैसे सात कठिन एनसीसी शिविरों में भाग लिया और सभी मुश्किल चुनौतियों को पार कर यह प्रतिष्ठित सम्मान प्राप्त किया। खास बात यह है कि श्रुति को गणतंत्र दिवस परेड (RDC) में दिल्ली के कर्तव्य पथ पर मार्च करने का भी गौरव प्राप्त हो चुका है।
विद्यालय की प्राचार्या नीलकमल सिन्हा का कहना है कि श्रुति का घाटशिला जैसे छोटे शहर से निकलकर राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाना, पूरे झारखंड के लिए गर्व की बात है। एनसीसी अधिकारी डॉ. प्रसेनजीत कर्मकार ने श्रुति को दूसरे छात्रों के लिए प्रेरणा स्रोत बताया और कहा कि उनकी मेहनत और लगन हर युवा को सीख दे सकती है।
एनसीसी: अनुशासन और नेतृत्व का कड़ा इम्तिहान
एनसीसी (National Cadet Corps) देश के युवाओं को अनुशासन, नेतृत्व और सेवा भावना का पाठ पढ़ाने वाला भारत का सबसे बड़ा युवा संगठन है। इसमें शामिल होना ही एक बड़ी उपलब्धि होती है, लेकिन श्रुति रॉय जैसी प्रतिभाशाली कैडेट्स राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाकर झारखंड का नाम रोशन कर रही हैं। एनसीसी कैडेट बनने के बाद युवाओं को सैनिक अनुशासन, परेड, आत्मरक्षा, शूटिंग और आपदा प्रबंधन जैसे विशेष प्रशिक्षण दिए जाते हैं।
गर्व का क्षण: परिवार से लेकर घाटशिला तक हर कोई खुश
श्रुति रॉय की इस उपलब्धि पर परिवार, विद्यालय और पूरे घाटशिला शहर में खुशी की लहर है। वे पूर्वी सिंहभूम जिले की पहली छात्रा हैं, जिन्होंने यह गौरव प्राप्त किया। यह साबित करता है कि छोटे शहरों के छात्र भी मेहनत और समर्पण से राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बना सकते हैं।
श्रुति की इस सफलता से झारखंड के अन्य छात्रों को भी एनसीसी में शामिल होकर अपने देश के लिए कुछ करने की प्रेरणा मिलेगी। अब सभी की निगाहें श्रुति के अगले लक्ष्य पर टिकी हैं, जो निश्चित रूप से और भी बड़े सम्मान की ओर बढ़ रही हैं।
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