Saraikela Death: शव मिला, चाची के अंतिम संस्कार में गया भतीजा नदी में समाया, 5 दिन बाद खरकई ने उगला बूटन का शव
सरायकेला के खरकई नदी में मंगलवार सुबह 42 वर्षीय बूटन महतो का शव बरामद हुआ है जो अपनी चाची के अंतिम संस्कार के दौरान रहस्यमयी तरीके से लापता हो गए थे। परिजनों के कोहराम और मछली पकड़ने गए ग्रामीणों द्वारा शव देखे जाने की इस पूरी मर्मस्पर्शी व हैरान कर देने वाली कड़वी हकीकत यहाँ दी गई है वरना आप भी इस अनहोनी के पीछे छिपे घटनाक्रम को नहीं जान पाएंगे।
सरायकेला, 23 दिसंबर 2025 – सरायकेला-खरसावां जिले के सरायकेला थाना क्षेत्र में मंगलवार की सुबह एक गमगीन सन्नाटे को चीरती हुई खबर आई। टिडिंगटीपा गांव के समीप बहने वाली खरकई नदी ने पांच दिनों के लंबे इंतजार के बाद एक युवक का शव उगल दिया। मृतक की पहचान हल्दीबनी निवासी 42 वर्षीय बूटन महतो के रूप में हुई है। यह महज एक शव की बरामदगी नहीं है, बल्कि एक ऐसे परिवार की त्रासदी है जो पिछले गुरुवार से अपने लाडले की सलामती की दुआ मांग रहा था। जिस नदी के किनारे बूटन अपनी चाची को अंतिम विदाई देने आए थे, उसी नदी ने उन्हें भी अपने आगोश में ले लिया।
इतिहास: खरकई नदी और घाटों पर होने वाली अनहोनी की दास्तां
सरायकेला और चाईबासा के इतिहास में खरकई नदी का महत्व केवल एक जलस्रोत के रूप में नहीं, बल्कि यहाँ की संस्कृति और अंतिम संस्कारों के मुख्य स्थल के रूप में रहा है। ऐतिहासिक रूप से खरकई के घाट, विशेष रूप से टिडिंगटीपा के समीप का हिस्सा, अपने घुमावदार बहाव और अचानक आने वाली गहराई के लिए जाने जाते हैं। पिछले कुछ दशकों में, धार्मिक और सामाजिक अनुष्ठानों के दौरान नदी में डूबने की कई घटनाएं यहाँ दर्ज की गई हैं। 2020 के बाद से इस क्षेत्र में सुरक्षा घेरों की मांग उठी है, क्योंकि घाटों पर अक्सर फिसलन और अचानक पानी के स्तर में बदलाव होने से ऐसे हादसे होते रहे हैं। बूटन महतो की यह दुखद मौत उसी खूनी इतिहास का एक और हिस्सा बन गई है।
अंतिम संस्कार के बीच 'गायब' हुए बूटन: वो मनहूस गुरुवार
घटनाक्रम की शुरुआत पिछले गुरुवार को हुई थी। परिवार में एक शोक का माहौल था क्योंकि बूटन की चाची का निधन हो गया था। पूरा परिवार अंतिम संस्कार की रस्मों के लिए टिडिंगटीपा के खरकई नदी घाट पहुँचा था।
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अंतिम शब्द: परिजनों के अनुसार, बूटन ने घाट पर पहुँचने के बाद शौच जाने की बात कही और वहां से थोड़ी दूर चले गए।
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रहस्यमयी गायब होना: घंटों बीत जाने के बाद भी जब बूटन वापस नहीं लौटे, तो परिवार की चिंता बढ़ गई। अंतिम विदाई का गम अचानक एक नई अनहोनी के डर में बदल गया। परिजनों ने अपने स्तर पर जंगल, गांव और नदी किनारे तलाशी ली, पर बूटन का कहीं पता नहीं चला।
मछुआरों ने देखा पानी में तैरता 'राज'
मंगलवार की सुबह जब कुछ ग्रामीण मछली पकड़ने के लिए खरकई नदी के तट पर पहुँचे, तो उनकी नजर पानी में तैरती एक संदिग्ध वस्तु पर पड़ी। पास जाने पर उनके होश उड़ गए—वह एक सड़ चुका शव था।
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पुलिस की मुस्तैदी: ग्रामीणों की सूचना पर सरायकेला थाना पुलिस तुरंत मौके पर पहुँची। मछुआरों के सहयोग से शव को पानी से बाहर निकाला गया।
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परिजनों का विलाप: जैसे ही बूटन के परिजनों को खबर मिली, वे घाट पर दौड़ पड़े। शरीर के हुलिए और कपड़ों के आधार पर बूटन की पहचान की गई, जिसके बाद पूरे हल्दीबनी गांव में कोहराम मच गया।
घटना का संक्षिप्त विवरण (Summary)
| विवरण | जानकारी |
| मृतक का नाम | बूटन महतो (42 वर्ष) |
| निवासी | हल्दीबनी, सरायकेला |
| लापता होने की तारीख | गुरुवार (18 दिसंबर) |
| बरामदगी का स्थान | टिडिंगटीपा घाट, खरकई नदी |
| वर्तमान स्थिति | शव पोस्टमार्टम के लिए सदर अस्पताल भेजा गया |
पुलिस की कार्रवाई और मौत की गुत्थी
सरायकेला थाना प्रभारी ने बताया कि शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए सरायकेला सदर अस्पताल भेज दिया गया है। पुलिस अब दो मुख्य पहलुओं पर जांच कर रही है:
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हादसा या साज़िश: क्या बूटन का पैर फिसलने से वे नदी के गहरे पानी में चले गए? या फिर इस लापता होने के पीछे कोई और कारण था?
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पोस्टमार्टम का इंतजार: डॉक्टरों की रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट होगा कि बूटन की मौत डूबने से हुई या मौत के बाद शव को नदी में फेंका गया था।
घाटों पर सुरक्षा का सवाल
बूटन महतो की मौत ने एक बार फिर नदी घाटों पर होने वाली दुर्घटनाओं की ओर ध्यान खींचा है। एक परिवार जो पहले से ही चाची की मौत के गम में डूबा था, उस पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। सरायकेला पुलिस की त्वरित कार्रवाई ने शव को तो बरामद कर लिया, लेकिन बूटन की मौत के असली कारणों का खुलासा होना अभी बाकी है।
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