Tatanagar Railway Station Shock: सालगाझड़ी रेलवे स्टेशन पर यात्रियों के साथ मजाक हुआ, टाटा-खड़गपुर ट्रेन के दौरान बड़ा हादसा टल गया
सालगाझड़ी रेलवे स्टेशन पर मंगलवार को टाटा से खड़गपुर जाने वाली 68124 ट्रेन के आगमन के दौरान रेलवे की बड़ी लापरवाही सामने आई। अनाउंसमेंट के बाद प्लेटफॉर्म पर पहुंची ट्रेन बिना पूरी तरह रुके धीरे-धीरे सरकती रही। ट्रेन की अचानक बढ़ी रफ़्तार से अफरा-तफरी मची और कई यात्री बाल-बाल बच गए। स्टेशन मास्टर और रेलवे डायरेक्टर ने जिम्मेदारी लेने से पल्ला झाड़ लिया। जानिए इस गंभीर लापरवाही का पूरा विवरण और यात्रियों के हंगामे का कारण।
जमशेदपुर, 12 नवंबर 2025 – भारतीय रेलवे, जो देश की जीवन रेखा कहलाती है, वहां जब सुरक्षा को लेकर गंभीर लापरवाही सामने आती है, तो यात्रियों की जान खतरे में पड़ जाती है। मंगलवार को सालगाझड़ी रेलवे स्टेशन पर टाटा से खड़गपुर जाने वाली गाड़ी संख्या 68124 के आगमन के दौरान कुछ ऐसा ही हुआ, जहां चंद सेकंड की लापरवाही ने एक बड़ा ट्रेन हादसा होते-होते टाल दिया। ट्रेन के प्लेटफॉर्म पर न रुकना और अचानक तेज हो जाना एक गंभीर प्रश्न खड़ा करता है। सबसे बड़ी चिंता की बात यह है कि इस गंभीर लापरवाही पर न तो स्टेशन मास्टर और न ही रेलवे डायरेक्टर ने जिम्मेदारी ली। सवाल यह है कि क्या रेलवे केवल तब जागेगी जब कोई बड़ी दुर्घटना होगी, और इस लापरवाही के पीछे क्या रेलवे की तकनीकी खामी थी या मानवीय भूल?
यात्रियों के साथ मजाक: ट्रेन क्यों नहीं रुकी
यह घटना मंगलवार को सालगाझड़ी स्टेशन पर हुई, जिसने यात्रियों को दहशत में डाल दिया।
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घोषणा: सूत्रों के अनुसार, स्टेशन पर टाटा-खड़गपुर गाड़ी संख्या 68124 के आगमन का अनाउंसमेंट हुआ कि ट्रेन कुछ ही देर में आने वाली है।
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लापरवाही: थोड़ी ही देर बाद ट्रेन प्लेटफॉर्म पर पहुंची, लेकिन प्लेटफॉर्म पर पूरी तरह रुकने के बजाय धीरे-धीरे सरकती रही।
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खतरा: इस दौरान कई यात्री ट्रेन पर चढ़ने की कोशिश करने लगे, तभी अचानक ट्रेन की रफ़्तार बढ़ गयी, जिससे वहां भारी अफरा-तफरी मच गई और कई यात्री दुर्घटनाग्रस्त होने से बाल-बाल बच गए।
लापरवाही पर हंगामा: जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ा क्यों
घटना के बाद यात्रियों ने स्टेशन पर जमकर हंगामा किया और इस गंभीर लापरवाही के लिए रेलवे अधिकारियों से जवाब मांगा।
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स्टेशन मास्टर: जब इस संबंध में स्टेशन मास्टर से बात की गयी, तो उन्होंने सीधे जवाब देने से इनकार करते हुए कहा कि "मैं कुछ नहीं कह सकता, जो भी कहेंगे डायरेक्टर साहब कहेंगे।"
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रेलवे डायरेक्टर: वहीं, जब रेलवे डायरेक्टर से संपर्क किया गया, तो उन्होंने भी यह कहते हुए पल्ला झाड़ लिया कि "सालगाझड़ी स्टेशन मेरे अधीन नहीं आता।"
सुरक्षा व्यवस्था पर बड़ा सवाल
रेलवे अधिकारियों का इस तरह जिम्मेदारी से भागना, सुरक्षा व्यवस्था पर बड़ा सवाल खड़ा करता है।
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गंभीर प्रश्न: इस गंभीर लापरवाही की जिम्मेदारी आखिर कौन लेगा, और यात्रियों की सुरक्षा क्यों सुनिश्चित नहीं की जा रही है।
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बड़ा हादसा टल गया: यदि समय रहते यात्रियों ने खुद को संभाला नहीं होता, तो प्लेटफॉर्म पर ट्रेन से गिरने से कई लोग घायल हो सकते थे, या उनकी जान भी जा सकती थी।
यह घटना रेलवे के विभिन्न विभागों के बीच समन्वय की कमी को भी उजागर करती है, जो सीधे तौर पर लाखों यात्रियों की जान को खतरे में डाल सकती है। रेलवे को जल्द ही इस मामले की उच्च स्तरीय जांच करनी चाहिए।
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