Ranchi Action: रांची के खरसीदाग में ब्राउन शुगर के साथ दो तस्कर गिरफ्तार, बंगाल से लाते थे खेप, 75 पुड़िया और बाइक बरामद
रांची के खरसीदाग ओपी क्षेत्र में पुलिस ने 75 पुड़िया ब्राउन शुगर के साथ भिपी और गरूपदो सिंह मुंडा को दबोचा है। बंगाल से नशे की खेप लाने, बाइक और नकद बरामदगी के इस बड़े खुलासे की पूरी रिपोर्ट यहाँ देखें।
रांची/खरसीदाग, 6 अप्रैल 2026 – झारखंड की राजधानी रांची में 'सफेद जहर' के खिलाफ पुलिस ने एक बार फिर अपना फौलादी शिकंजा कसा है। जिले के खरसीदाग ओपी क्षेत्र में एक गुप्त सूचना के आधार पर की गई छापेमारी में पुलिस ने ब्राउन शुगर के दो बड़े सौदागरों को रंगे हाथों गिरफ्तार किया है। यह कार्रवाई रांची पुलिस द्वारा चलाए जा रहे 'नशा मुक्त अभियान' के तहत एक बड़ी सफलता मानी जा रही है। पकड़े गए तस्करों का नेटवर्क केवल स्थानीय स्तर तक सीमित नहीं था, बल्कि इसके तार पड़ोसी राज्य पश्चिम बंगाल से भी जुड़े हुए हैं।
खरसीदाग में पुलिस की सर्जिकल स्ट्राइक: 75 पुड़िया 'मौत' बरामद
सोमवार को खरसीदाग पुलिस को सूचना मिली थी कि इलाके में दो युवक बाइक पर सवार होकर नशीले पदार्थों की डिलीवरी देने वाले हैं।
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घेराबंदी और गिरफ्तारी: पुलिस टीम ने त्वरित कार्रवाई करते हुए संदिग्धों की घेराबंदी की। पकड़े गए आरोपियों की पहचान भिपी सिंह मुंडा और गरूपदो सिंह मुंडा के रूप में हुई है।
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बरामदगी: तलाशी के दौरान इनके पास से 75 पुड़िया ब्राउन शुगर बरामद की गई है। यह खेप स्थानीय युवाओं और छोटे पैडलर्स को सप्लाई की जानी थी।
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जब्ती: पुलिस ने मौके से 2200 रुपये नकद और तस्करी में इस्तेमाल की जा रही एक मोटरसाइकिल को भी जब्त कर लिया है।
बंगाल कनेक्शन: ऐसे काम करता था यह सिंडिकेट
प्रारंभिक पूछताछ में आरोपियों ने जो खुलासा किया है, वह सुरक्षा एजेंसियों के लिए चिंता का विषय है।
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सप्लाई चेन: भिपी और गरूपदो सिंह मुंडा पश्चिम बंगाल के सीमावर्ती इलाकों से ब्राउन शुगर की खेप कम दामों पर खरीदकर लाते थे।
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रिटेल नेटवर्क: बंगाल से लाई गई इस खेप को छोटी-छोटी पुड़िया में बांटकर रांची के अलग-अलग मोहल्लों, विशेषकर शैक्षणिक संस्थानों के आसपास ऊंचे दामों पर बेचा जाता था।
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नकद लेन-देन: इनके पास से बरामद नकद राशि उसी दिन की बिक्री का हिस्सा बताई जा रही है, जो यह साबित करता है कि इनका धंधा कितनी तेजी से चल रहा था।
ब्राउन शुगर का बढ़ता साया और चुनौतियां
रांची में पिछले कुछ वर्षों में गांजा और अफीम के बाद ब्राउन शुगर (स्मैक) का चलन तेजी से बढ़ा है, जो शहर की नई पीढ़ी को खोखला कर रहा है।
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बदलते हॉटस्पॉट: पहले सुखदेवनगर और हिंदपीढ़ी जैसे इलाके नशे के केंद्र माने जाते थे, लेकिन अब तस्करों ने खरसीदाग और तुपुदाना जैसे बाहरी इलाकों को अपना नया ट्रांजिट पॉइंट बना लिया है।
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बंगाल-ओडिशा रूट: झारखंड की सीमाएं बंगाल और ओडिशा से सटी होने के कारण तस्करों को घने जंगलों और कम इस्तेमाल होने वाले रास्तों (Link roads) का फायदा मिलता है। भिपी और गरूपदो ने भी इसी भौगोलिक स्थिति का लाभ उठाकर कई बार खेप पहुंचाई थी।
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पुलिस की सक्रियता: एसएसपी रांची के निर्देश पर गठित विशेष टीम अब केवल गिरफ्तारी नहीं, बल्कि इन तस्करों की संपत्ति और उनके 'किंगपिन' तक पहुंचने की रणनीति पर काम कर रही है।
रडार पर 'मास्टरमाइंड' और अन्य सदस्य
खरसीदाग पुलिस अब इस मामले के गहराई तक जाने की तैयारी कर रही है।
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नेटवर्क का विस्तार: पुलिस अब उन लोगों की पहचान कर रही है जो बंगाल में इन्हें माल उपलब्ध कराते थे। इसके लिए आरोपियों के मोबाइल कॉल डिटेल्स (CDR) खंगाले जा रहे हैं।
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सघन छापेमारी: रांची के कई संदिग्ध ठिकानों पर छापेमारी तेज कर दी गई है। पुलिस का मानना है कि इन दोनों की गिरफ्तारी से शहर में ब्राउन शुगर की सप्लाई चेन को बड़ा झटका लगा है।
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जनता से अपील: पुलिस ने नागरिकों से आग्रह किया है कि अगर उनके आसपास कोई संदिग्ध व्यक्ति नशीले पदार्थ बेचता नजर आए, तो उसकी जानकारी तुरंत पुलिस को दें। आपकी एक गुप्त सूचना शहर के भविष्य को बचा सकती है।
रांची के खरसीदाग में हुई यह कार्रवाई पुलिस की मुस्तैदी का प्रमाण है। 75 पुड़िया ब्राउन शुगर की जब्ती केवल एक आंकड़ा नहीं है, बल्कि यह उन 75 घरों की बर्बादी को रोकने की दिशा में एक कदम है जिन्हें यह जहर बेचा जाना था। भिपी और गरूपदो सिंह मुंडा के खिलाफ एनडीपीएस एक्ट (NDPS Act) के तहत मामला दर्ज कर उन्हें जेल भेज दिया गया है। रांची पुलिस ने स्पष्ट संदेश दिया है कि राजधानी की सड़कों पर 'सफेद जहर' के सौदागरों के लिए कोई जगह नहीं है।
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