Hatiya Action: हटिया स्टेशन पर मची अफरा-तफरी, ट्रेन की बोगी से उठा धुआं और बजने लगे सायरन, NDRF ने मोर्चा संभालते ही बदला मंजर
रांची के हटिया रेलवे स्टेशन पर अचानक ट्रेन की बोगी से धुएं का गुबार उठने और सायरन बजने से हड़कंप मच गया। NDRF और RPF के इस रोंगटे खड़े कर देने वाले रेस्क्यू ऑपरेशन की पूरी इनसाइड स्टोरी यहाँ मौजूद है वरना आप आपदा प्रबंधन की इस सबसे बड़ी तैयारी का अपडेट मिस कर देंगे।
रांची/हटिया, 19 फरवरी 2026 – झारखंड की राजधानी रांची के हटिया रेलवे स्टेशन पर गुरुवार को उस समय सांसें थम गईं, जब प्लेटफॉर्म पर खड़ी एक ट्रेन के डिब्बे से अचानक धुएं का काला गुबार उठने लगा। सायरन की गूंज और भागते हुए जवानों को देखकर यात्री सहम गए और उन्हें लगा कि कोई बहुत बड़ा रेल हादसा हो गया है। लेकिन कुछ ही देर में स्थिति साफ हुई कि यह कोई वास्तविक दुर्घटना नहीं, बल्कि मौत के मुंह से जिंदगियां छीन लाने की एक बड़ी तैयारी थी। दरअसल, राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (NDRF) और रेलवे सुरक्षा बल (RPF) ने संयुक्त रूप से यहाँ एक 'मॉक ड्रिल' का आयोजन किया था।
धुएं से भरी बोगी और जवानों का 'सुपरफास्ट' एक्शन
ड्रिल की शुरुआत एक बहुत ही डरावने दृश्य के साथ हुई। ट्रेन के एक कोच में भीषण आग लगने और उसमें यात्रियों के फंसे होने का काल्पनिक सीन तैयार किया गया।
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आग पर काबू: जैसे ही इमरजेंसी सायरन बजा, NDRF के जवान आधुनिक फायर फाइटिंग सूट और ऑक्सीजन सिलेंडर पहनकर धुएं से भरी बोगी के अंदर घुस गए।
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घायलों का रेस्क्यू: कोच के अंदर फंसे 'घायलों' (डमी यात्रियों) को स्ट्रेचर और कंधों पर उठाकर बाहर लाया गया। जवानों की फुर्ती ऐसी थी कि मानो वे किसी असली रणभूमि में हों।
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मेडिकल बैकअप: स्टेशन के बाहर पहले से ही एंबुलेंस और मेडिकल टीमें तैनात थीं। घायलों को प्राथमिक उपचार देने और उन्हें शिफ्ट करने की प्रक्रिया को सेकंडों के हिसाब से परखा गया।
RPF का सुरक्षा घेरा: भीड़ पर कड़ा नियंत्रण
स्टेशन जैसे भीड़भाड़ वाले इलाके में सबसे बड़ी चुनौती घबराहट (Panic) को रोकना होती है।
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कॉर्डन ऑफ (Cordon Off): RPF की टीम ने तुरंत प्रभावित कोच के चारों ओर सुरक्षा घेरा बनाया ताकि आम यात्री रेस्क्यू ऑपरेशन में बाधा न बनें।
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वायरलेस कम्युनिकेशन: कंट्रोल रूम और ग्राउंड टीम के बीच पल-पल की जानकारी वायरलेस सेट के जरिए साझा की गई। यह परखा गया कि क्या दोनों एजेंसियां (NDRF और RPF) बिना किसी भ्रम के एक साथ तालमेल बिठा पा रही हैं।
हटिया मॉक ड्रिल: ऑपरेशन की मुख्य बातें (Exercise Highlights)
| विवरण | प्रमुख जानकारी (Key Details) |
| स्थान | हटिया रेलवे स्टेशन, रांची |
| प्रमुख एजेंसियां | NDRF (12वीं बटालियन) और RPF |
| दृश्य (Scenario) | ट्रेन कोच में आग और यात्रियों का रेस्क्यू |
| उपकरण इस्तेमाल | हाइड्रोलिक कटर, फायर एक्सटिंग्विशर, स्ट्रेचर |
| मकसद | आपदा के समय त्वरित प्रतिक्रिया और समन्वय |
सिस्टम की परीक्षा: गलतियों से सीखने का मौका
अधिकारियों ने बताया कि इस मॉक ड्रिल का उद्देश्य केवल प्रदर्शन करना नहीं था, बल्कि सिस्टम की खामियों को पकड़ना भी था।
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रिस्पॉन्स टाइम: कॉल मिलने के कितनी देर बाद पहली टीम मौके पर पहुँची, इसकी बारीकी से गणना की गई।
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इक्विपमेंट चेक: क्या हाइड्रोलिक कटर और गैस डिटेक्टर सही समय पर काम कर रहे थे?
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समन्वय: क्या अलग-अलग विभागों के अधिकारी एक-दूसरे की भाषा समझ रहे थे?
आपकी सुरक्षा, हमारी प्राथमिकता
इस संयुक्त अभ्यास ने साबित कर दिया कि रांची का रेल प्रशासन किसी भी अप्रिय घटना से निपटने के लिए पूरी तरह मुस्तैद है। यात्रियों से भी अपील की गई कि ऐसी ड्रिल के दौरान घबराएं नहीं, बल्कि सुरक्षा निर्देशों का पालन करें।
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