West Singhbhum Strike : सारंडा के जंगलों में झारखंड-ओडिशा की संयुक्त छापेमारी, 8000 किलो जावा महुआ और 900 लीटर शराब नष्ट, तस्करों में दहशत
पश्चिमी सिंहभूम जिले में जिला प्रशासन और ओडिशा के उत्पाद विभाग की संयुक्त टीम ने जगन्नाथपुर थाना क्षेत्र के गुटूसाई और बुरूहातु में छापेमारी करके 8000 किलोग्राम जावा महुआ और 900 लीटर अवैध शराब बरामद करके नष्ट कर दिया। प्रशासन की सख्ती से अवैध शराब कारोबारियों में हड़कंप मच गया है।
झारखंड और ओडिशा की सीमाएं अक्सर अवैध गतिविधियों के लिए तस्करों का आसान रास्ता बन जाती हैं। इनमें सबसे प्रमुख है अवैध महुआ शराब का कारोबार, जो स्वास्थ्य के लिए खतरा होने के साथ-साथ राज्य के राजस्व को भी भारी नुकसान पहुंचाता है। इसी पर नकेल कसने के लिए पश्चिमी सिंहभूम जिला प्रशासन ने सीमावर्ती राज्य ओडिशा के चंपुआ एक्साइज विभाग के साथ मिलकर एक बड़ी और संयुक्त कार्रवाई को अंजाम दिया है।
सीमावर्ती इलाकों में अवैध शराब का इतिहास काफी जटिल रहा है। तस्कर अक्सर एक राज्य से दूसरे राज्य में फायदा उठाते हुए इन सामानों को आसानी से पहुंचा देते थे। लेकिन झारखंड और ओडिशा के प्रशासन ने मिलकर यह साबित कर दिया है कि अब उनकी मिलीभगत से तस्करों के लिए भागना आसान नहीं होगा।
जगन्नाथपुर के तीन गांवों पर धावा
जिला प्रशासन और ओडिशा की टीम ने जगन्नाथपुर थाना अंतर्गत तीन मुख्य अवैध शराब निर्माण स्थलों को निशाना बनाया।
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छापेमारी स्थल: गुटूसाई, बुरूहातु एवं खुटियापदा गांवों में संयुक्त टीम ने दबिश दी। इन इलाकों में भारी मात्रा में अवैध शराब बनाने का सामान और तैयार शराब बरामद हुआ।
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विशाल बरामदगी: टीम ने छापेमारी के दौरान लगभग 8000 किलोग्राम अवैध जावा महुआ (शराब बनाने के लिए किण्वित सामग्री) और 900 लीटर अवैध महुआ शराब बरामद की।
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मौके पर नष्ट: प्रशासन ने किसी भी तरह के पुनः उपयोग से बचने के लिए इस बरामद सामग्री को मौके पर ही नष्ट कर दिया।
तस्करों में हड़कंप, कार्रवाई रहेगी जारी
इतनी बड़ी मात्रा में अवैध सामग्री का नष्ट होना अवैध शराब के कारोबारियों के लिए एक बड़ा झटका है। प्रशासन की इस सख्ती से पूरे इलाके में हड़कंप मच गया है।
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प्रशासन का संकल्प: जिला प्रशासन की टीम ने स्पष्ट किया है कि अवैध शराब के कारोबार पर रोक लगाने के लिए यह कार्रवाई की गई है और यह आगे भी जारी रहेगी। सीमावर्ती राज्यों के बीच सहयोग का यह कदम तस्करों के लिए सभी रास्ते बंद कर देगा।
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कारोबारी पलायन कर रहे: प्रशासन की सख्ती को देखते हुए अवैध शराब के कारोबारी फिलहाल अपनी गतिविधियों से दूर रहने लगे हैं। लेकिन पुलिस की नजर हर गतिविधि पर बनी हुई है।
यह संयुक्त कार्रवाई अवैध शराब से होने वाले सामाजिक और आर्थिक नुकसान को रोकने की दिशा में एक सकारात्मक कदम है। प्रशासन ने निश्चित कर लिया है कि जिले में अवैध शराब को किसी भी हालत में बढ़ावा नहीं मिलेगा।
आपकी राय में, सीमावर्ती इलाकों में अवैध शराब तस्करी को पूरी तरह से समाप्त करने और स्थानीय लोगों को इस धंधे से बाहर निकालने के लिए सरकार को कौन से दो आर्थिक और कानूनी रणनीतिक कदम उठाने चाहिए?
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